नोएडा के महर्षि नगर में रामलीला के दौरान श्रीराम अभिषेक, वनगमन, राम-केवट संवाद और भरत मनावन का भावपूर्ण मंचन हुआ। जानिए रामकथा के खास प्रसंग।

श्रीराम अभिषेक की तैयारी से भरत मनावन तक के प्रसंगों ने दर्शकों को दिया प्रेम, त्याग और मर्यादा का संदेश
Noida News : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर नोएडा के सेक्टर-110 स्थित महर्षि नगर में आयोजित दुर्गा पूजा एवं श्रीरामलीला महोत्सव में गुरुवार को रामकथा के विभिन्न महत्वपूर्ण प्रसंगों का भव्य और भावपूर्ण मंचन किया गया। श्रीराम के अभिषेक की तैयारी, मंथरा-कैकेयी संवाद, राजा दशरथ-कैकेयी संवाद, राम मनावन, राम-केवट संवाद, भरत-कैकेयी संवाद और भरत मनावन के प्रसंगों ने श्रद्धालुओं को भावविभोर कर दिया। कलाकारों ने अपने प्रभावशाली अभिनय के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, पारिवारिक संबंधों की मर्यादा और त्याग की भावना को जीवंत कर दिया।
रामलीला का घटनाक्रम श्रीराम के राज्याभिषेक की तैयारियों से शुरू हुआ। अयोध्या में श्रीराम के अभिषेक को लेकर उत्साह के बीच मंथरा द्वारा कैकेयी को प्रभावित करने और इसके बाद कैकेयी द्वारा राजा दशरथ से अपने वरदान मांगने के प्रसंग का प्रभावशाली मंचन किया गया। इन घटनाओं ने रामकथा के उस महत्वपूर्ण मोड़ को सजीव कर दिया, जिसने अयोध्या के राजपरिवार की परिस्थितियों को बदल दिया। इसके बाद श्रीराम को वनगमन से रोकने के प्रयासों से जुड़े राम मनावन प्रसंग का मंचन हुआ। इस दौरान पारिवारिक प्रेम, भावनात्मक लगाव, त्याग और कर्तव्य के बीच के संघर्ष को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत किया गया। भगवान श्रीराम का पिता के वचन और धर्म की मर्यादा का पालन करते हुए वन जाने का निर्णय दर्शकों के लिए प्रेरणादायी रहा।
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महोत्सव में राम-केवट संवाद का मंचन भी विशेष आकर्षण का केंद्र रहा। इस प्रसंग के माध्यम से भगवान श्रीराम और केवट के बीच के आत्मीय संबंध, निष्काम प्रेम, भक्ति और समर्पण की भावना को सुंदर ढंग से प्रस्तुत किया गया। मीडिया प्रभारी ए.के. लाल ने बताया कि रामलीला के प्रत्येक प्रसंग को इस उद्देश्य से प्रस्तुत किया जा रहा है कि दर्शक भगवान श्रीराम के जीवन से जुड़े आदर्शों को समझें और उन्हें अपने दैनिक जीवन में अपनाने की प्रेरणा लें।
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रामकथा के अगले चरण में भरत-कैकेयी संवाद और भरत मनावन के प्रसंगों का मंचन किया गया। इन दृश्यों में भरत का अपने बड़े भाई भगवान श्रीराम के प्रति अटूट प्रेम, सम्मान और समर्पण प्रभावशाली ढंग से सामने आया। भरत का त्याग और श्रीराम को वापस अयोध्या लाने का प्रयास दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ने में सफल रहा। इन प्रसंगों ने संदेश दिया कि सच्चा प्रेम स्वार्थ से ऊपर होता है और रिश्तों की मजबूती त्याग, विश्वास तथा मर्यादा से बनती है। रामलीला के माध्यम से श्रद्धालुओं को पारिवारिक एकता, कर्तव्यपालन और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा मिली।
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श्रीरामलीला मंचन के साथ महर्षि नगर में दुर्गा पूजन, वेद पाठ, भजन-कीर्तन, प्रवचन और आरती सहित विभिन्न धार्मिक कार्यक्रम भी आयोजित किए जा रहे हैं। प्रतिदिन सुबह मां दुर्गा की पूजा-अर्चना और शाम को भक्ति संगीत तथा वैदिक अनुष्ठानों से पूरा क्षेत्र भक्तिमय बना हुआ है। श्रद्धालु उत्साह और आस्था के साथ इन कार्यक्रमों में भाग ले रहे हैं। आयोजकों के अनुसार, दुर्गा पूजा, विजयादशमी एवं श्रीरामलीला महोत्सव का उद्देश्य भगवान श्रीराम के आदर्श जीवन, भारतीय संस्कृति और सनातन परंपराओं को जन-जन तक पहुंचाना है। रामलीला के माध्यम से प्रेम, त्याग, पारिवारिक संबंधों, कर्तव्य, मर्यादा और धर्म के मूल्यों को प्रस्तुत कर लोगों को नैतिक जीवन अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। साथ ही, यह आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का भी महत्वपूर्ण माध्यम बन रहा है।
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इस अवसर पर महर्षि महेश योगी संस्थान के अध्यक्ष एवं महर्षि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति अजय प्रकाश श्रीवास्तव, श्री दुर्गा पूजा, विजयादशमी एवं श्रीरामलीला महोत्सव के संयोजक रामेंद्र सचान तथा प्रबंध समिति के सदस्य विनोद श्रीवास्तव, शिशिर कांत श्रीवास्तव, विनीत श्रीवास्तव, विनोद दीक्षित, एस.पी. गर्ग, श्रीकांत ओझा, मनोज श्रीवास्तव, संतोष श्रीवास्तव, लल्लन पाठक, दयाशंकर गुप्ता, राजेंद्र शुक्ला, राजेंद्र खंतवाल और नरेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। महर्षि नगर में आयोजित यह धार्मिक एवं सांस्कृतिक महोत्सव आस्था, भक्ति और भारतीय परंपराओं के संगम के रूप में श्रद्धालुओं को भगवान श्रीराम के आदर्शों से जोड़ रहा है।
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