नोएडा पुलिस की लापरवाही पर कमिश्नर सख्त, फेस-3 थाना प्रभारी सस्पेंड
नोएडा में सामने आए कथित लव जिहाद मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में लापरवाही उजागर होने के बाद पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है।

Noida News : नोएडा में सामने आए कथित लव जिहाद मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में लापरवाही उजागर होने के बाद पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। इस प्रकरण में थाना फेस-3 प्रभारी और विवेचक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि सेंट्रल नोएडा के एसीपी प्रथम की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
नोएडा पुलिस की जांच में सामने आई बड़ी चूक
जानकारी के अनुसार, पीड़िता की ओर से नोएडा के थाना फेस-3 में वाद संख्या 111/2026 दर्ज कराया गया था। इस मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 351 और 308 के तहत केस पंजीकृत किया गया। लेकिन बाद में जब पूरे प्रकरण की समीक्षा की गई तो पाया गया कि मामले की प्रकृति के मुताबिक कुछ अहम धाराएं शामिल नहीं की गई थीं। नोएडा पुलिस कमिश्नरेट स्तर पर हुई जांच में यह बात सामने आई कि इस संवेदनशील केस में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 5(3) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) नहीं जोड़ी गई। इसी को गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की गई। इस मामले में लापरवाही सामने आने के बाद नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सख्त कदम उठाते हुए थाना फेस-3 प्रभारी पुनीत कुमार और विवेचक उपनिरीक्षक प्रीति गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। नोएडा पुलिस की इस कार्रवाई को संवेदनशील मामलों में जवाबदेही तय करने के तौर पर देखा जा रहा है।
एसीपी स्तर तक पहुंची जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल थाना स्तर तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई है। एसीपी प्रथम सेंट्रल नोएडा उमेश यादव, थाना प्रभारी पुनीत कुमार और विवेचक प्रीति गुप्ता की भूमिका की जांच अब एडीसीपी नोएडा को सौंप दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे और भी कार्रवाई संभव मानी जा रही है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाकर उससे संबंध बनाए। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उसे वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। Noida News
Noida News : नोएडा में सामने आए कथित लव जिहाद मामले ने पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। शुरुआती जांच में लापरवाही उजागर होने के बाद पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सख्त रुख अपनाते हुए बड़ा प्रशासनिक एक्शन लिया है। इस प्रकरण में थाना फेस-3 प्रभारी और विवेचक को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है, जबकि सेंट्रल नोएडा के एसीपी प्रथम की भूमिका भी जांच के दायरे में आ गई है।
नोएडा पुलिस की जांच में सामने आई बड़ी चूक
जानकारी के अनुसार, पीड़िता की ओर से नोएडा के थाना फेस-3 में वाद संख्या 111/2026 दर्ज कराया गया था। इस मुकदमे में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69, 351 और 308 के तहत केस पंजीकृत किया गया। लेकिन बाद में जब पूरे प्रकरण की समीक्षा की गई तो पाया गया कि मामले की प्रकृति के मुताबिक कुछ अहम धाराएं शामिल नहीं की गई थीं। नोएडा पुलिस कमिश्नरेट स्तर पर हुई जांच में यह बात सामने आई कि इस संवेदनशील केस में उत्तर प्रदेश विधि विरुद्ध धर्म संपरिवर्तन प्रतिषेध अधिनियम की धारा 5(3) और एससी/एसटी एक्ट की धारा 3(2)(5) नहीं जोड़ी गई। इसी को गंभीर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई की गई। इस मामले में लापरवाही सामने आने के बाद नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने सख्त कदम उठाते हुए थाना फेस-3 प्रभारी पुनीत कुमार और विवेचक उपनिरीक्षक प्रीति गुप्ता को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। नोएडा पुलिस की इस कार्रवाई को संवेदनशील मामलों में जवाबदेही तय करने के तौर पर देखा जा रहा है।
एसीपी स्तर तक पहुंची जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए केवल थाना स्तर तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी गई है। एसीपी प्रथम सेंट्रल नोएडा उमेश यादव, थाना प्रभारी पुनीत कुमार और विवेचक प्रीति गुप्ता की भूमिका की जांच अब एडीसीपी नोएडा को सौंप दी गई है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे और भी कार्रवाई संभव मानी जा रही है। पीड़िता का आरोप है कि आरोपी ने अपनी पहचान छिपाकर उससे संबंध बनाए। इतना ही नहीं, विरोध करने पर उसे वीडियो वायरल करने की धमकी भी दी गई। Noida News












