नोएडा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के टिकट की दावेदारी के बीच मुकेश शर्मा की भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा के साथ एक तस्वीर चर्चा में है। भाजपा और आरएसएस से कथित जुड़ाव के दावों, राजनीतिक पृष्ठभूमि, संगठन के प्रति प्रतिबद्धता और जमीनी कार्यकर्ताओं की भूमिका को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

Noida News :
चेतना मंच की पुरानी खबर फिर चर्चा में, भाजपा और RSS से जुड़ाव के दावों के बीच समाजवादी पार्टी की उम्मीदवारी पर उठ रहे सवाल; क्या टिकट की राजनीति में धनबल, संगठन और वैचारिक प्रतिबद्धता की कसौटी होगी निर्णायक ?
उत्तर प्रदेश की राजनीति में विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज होने के साथ ही उत्तर प्रदेश की औद्योगिक नगरी के रूप में पहचाने जाने वाले नोएडा शहर की नोएडा विधानसभा सीट को लेकर संभावित उम्मीदवारों की चर्चा भी दिलचस्प होती जा रही है। इस बीच कारोबारी पृष्ठभूमि वाले मुकेश शर्मा की एक तस्वीर ने राजनीतिक हलकों में नई बहस को जन्म दिया है। तस्वीर में मुकेश शर्मा, नोएडा के भाजपा सांसद डॉ. महेश शर्मा के साथ एक धार्मिक कार्यक्रम के मंच पर दिखाई दे रहे हैं। इसी तस्वीर को आधार बनाकर समाजवादी पार्टी से विधानसभा टिकट की दावेदारी कर रहे मुकेश शर्मा की राजनीतिक निष्ठा, वैचारिक प्रतिबद्धता और संगठन के प्रति उनकी जवाबदेही पर सवाल उठाए जा रहे हैं। यह मामला इसलिए भी चर्चा में है, क्योंकि चेतना मंच पहले भी मुकेश शर्मा की राजनीतिक महत्वाकांक्षाओं और उनकी कथित राजनीतिक पृष्ठभूमि को लेकर एक टिप्पणीपूर्ण खबर प्रकाशित कर चुका है। उस खबर का शीर्षक था— 'बड़ी खबर : नोएडा शहर का एक और धनपति हो गया है ‘‘पागल’’'। अब भाजपा से नोएडा के सांसद के साथ सामने आई तस्वीर ने उस पुरानी बहस को फिर से प्रासंगिक बना दिया है। लेकिन इस पूरे प्रकरण का वास्तविक राजनीतिक महत्व केवल एक तस्वीर तक सीमित नहीं है। बड़ा सवाल यह है कि नोएडा विधानसभा सीट पर समाजवादी पार्टी टिकट का फैसला करते समय संभावित उम्मीदवार की आर्थिक हैसियत को प्राथमिकता देगी या उसकी वैचारिक प्रतिबद्धता, संगठनात्मक सक्रियता और पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच स्वीकार्यता को भी बराबर महत्व दिया जाएगा ?
यहां प्रकाशित की जा रही तस्वीर में मुकेश शर्मा भाजपा से नोएडा क्षेत्र के लोकप्रिय सांसद डॉ. महेश शर्मा के साथ एक सार्वजनिक धार्मिक आयोजन में दिखाई दे रहे हैं। ऐसे आयोजनों में विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और कारोबारियों की मौजूदगी असामान्य नहीं है। धार्मिक और सामाजिक कार्यक्रमों में सार्वजनिक जीवन से जुड़े लोगों का एक मंच पर आना अपने आप में किसी राजनीतिक गठबंधन या वैचारिक सहमति का प्रमाण नहीं होता है। इसके बावजूद यह तस्वीर राजनीतिक चर्चा का विषय इसलिए बनी है, क्योंकि मुकेश शर्मा को समाजवादी पार्टी से नोएडा विधानसभा सीट के संभावित दावेदार के रूप में देखा जा रहा है। उनके भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े होने के दावे भी राजनीतिक चर्चाओं में उठते रहे हैं। नोएडा क्षेत्र के राजनीतिक विश्लेषक बोल रहे है। कि यदि कोई नेता एक राजनीतिक विचारधारा से लंबे समय तक जुड़ा रहा हो और बाद में दूसरी विचारधारा वाली पार्टी से चुनाव लड़ने की दावेदारी करे, तो उसके राजनीतिक बदलाव के कारणों पर सवाल उठना स्वाभाविक है।
समाजवादी पार्टी और भारतीय जनता पार्टी के बीच उत्तर प्रदेश की राजनीति में लंबे समय से वैचारिक और चुनावी प्रतिस्पर्धा रही है। दोनों दलों के राजनीतिक एजेंडे, समर्थक आधार और चुनावी रणनीतियों में महत्वपूर्ण अंतर हैं। ऐसे में यदि भाजपा या RSS से जुड़ाव रखने का दावा झेल रहा कोई कारोबारी समाजवादी पार्टी से टिकट मांगता है, तो पार्टी के सामने उसकी राजनीतिक स्वीकार्यता परखने की चुनौती खड़ी हो सकती है। यहां सवाल केवल मुकेश शर्मा का नहीं है। यह उस व्यापक राजनीतिक प्रवृत्ति से भी जुड़ा है, जिसमें चुनाव जीतने की संभावना, आर्थिक संसाधन और सामाजिक प्रभाव रखने वाले संभावित उम्मीदवारों को पार्टी में जगह देने पर विचार किया जाता है। राजनीतिक दलों के सामने अक्सर दो रास्ते होते हैं। पहला, लंबे समय से संगठन में काम करने वाले कार्यकर्ताओं को प्राथमिकता देना। दूसरा, ऐसे प्रभावशाली चेहरों को मौका देना जिनके पास चुनाव लड़ने के संसाधन और स्थानीय स्तर पर प्रभाव होने की संभावना हो। इन दोनों के बीच संतुलन बनाना ही टिकट वितरण की असली परीक्षा है। यदि किसी पार्टी को लगता है कि कोई नया चेहरा चुनावी तौर पर उपयोगी हो सकता है, तो उसे यह भी देखना पड़ता है कि उसकी उम्मीदवारी से वर्षों से काम कर रहे कार्यकर्ताओं का मनोबल किस कदर टूट जाएगा।
मुकेश शर्मा को नोएडा क्षेत्र के बड़े कारोबारी और धनपति के रूप में प्रस्तुत किया जाता रहा है। हालांकि, उनकी संपत्ति या आर्थिक हैसियत से संबंधित कोई लिखित दस्तावेज अभी तक प्रकाश में नहीं आया है। इसलिए इस चर्चा का केंद्र उनकी संपत्ति का अनुमान लगाने के बजाय उस राजनीतिक धारणा पर होना चाहिए, जिसमें आर्थिक रूप से प्रभावशाली व्यक्ति को चुनावी टिकट का मजबूत दावेदार माना जाता है। लोकतंत्र में चुनाव लड़ने के लिए आर्थिक संसाधन होना अपने आप में कोई दोष नहीं है। लेकिन धनबल को राजनीतिक लोकप्रियता, संगठनात्मक स्वीकार्यता और वैचारिक प्रतिबद्धता का विकल्प भी नहीं माना जा सकता। किसी विधानसभा क्षेत्र में चुनाव जीतने के लिए स्थानीय समस्याओं की समझ, जनता से नियमित संवाद, पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल और मतदाताओं का विश्वास महत्वपूर्ण होता है। कारोबारी सफलता और राजनीतिक सफलता दो अलग-अलग कसौटियां हैं। यदि कोई संभावित उम्मीदवार केवल अपनी आर्थिक क्षमता या प्रभावशाली संपर्कों के आधार पर टिकट की दावेदारी मजबूत करना चाहता है, तो पार्टी के लिए यह देखना आवश्यक हो जाता है कि वह जनता के बीच कितना स्वीकार्य है और चुनाव के बाद भी संगठन के साथ कितनी मजबूती से रहेगा या फिर तुरन्त पलटी मार देगा।
किसी भी राजनीतिक दल की ताकत उसके जमीनी कार्यकर्ता होते हैं। चुनाव के दौरान यही कार्यकर्ता घर-घर जाकर प्रचार करते हैं, बूथों पर जिम्मेदारी निभाते हैं और पार्टी के पक्ष में जनसमर्थन जुटाने की कोशिश करते हैं। ऐसे में यदि लंबे समय से पार्टी के लिए काम कर रहे कार्यकर्ताओं को लगता है कि टिकट वितरण में उनके योगदान के बजाय किसी प्रभावशाली बाहरी चेहरे को प्राथमिकता दी जा रही है, तो असंतोष पैदा होने की आशंका रहती है। मुकेश शर्मा की उम्मीदवारी को लेकर भी राजनीतिक बहस का एक पक्ष यही है। यदि समाजवादी पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच उनकी राजनीतिक पृष्ठभूमि या पार्टी के प्रति प्रतिबद्धता को लेकर प्रश्न हैं, तो पार्टी नेतृत्व के लिए उन प्रश्नों को नजरअंदाज करना आसान नहीं होगा।
डॉ. महेश शर्मा नोएडा ही नहीं देश के प्रमुख भाजपा नेताओं में शामिल हैं। उनके साथ किसी सामाजिक या धार्मिक कार्यक्रम में मंच साझा करने की तस्वीर राजनीतिक चर्चा पैदा कर सकती है, खासकर तब जब तस्वीर में मौजूद दूसरा व्यक्ति किसी प्रतिद्वंद्वी दल से टिकट मांगने की चर्चा में हो। लेकिन राजनीति में सामाजिक संपर्क और राजनीतिक निष्ठा के बीच अंतर करना जरूरी है। सार्वजनिक कार्यक्रमों में नेताओं का मिलना, अभिवादन करना या एक मंच पर उपस्थित होना कई बार सामान्य सामाजिक शिष्टाचार का हिस्सा भी होता है। मुकेश शर्मा से यह सवाल तो पूछा ही जाना चाहिए कि उनकी वास्तविक राजनीतिक पृष्ठभूमि क्या है, वह समाजवादी पार्टी से क्यों जुड़ना चाहते हैं और पार्टी के राजनीतिक कार्यक्रमों तथा विचारधारा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता कितनी स्पष्ट है ? यदि मुकेश शर्मा का भाजपा या RSS से पुराना जुड़ाव रहा है, तो उनके लिए इस बदलाव की वजह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट करना राजनीतिक दृष्टि से उपयोगी हो सकता है। इसी तरह समाजवादी पार्टी भी अपने संभावित उम्मीदवार की पृष्ठभूमि और संगठन के साथ उसके संबंधों की पड़ताल कर सकती है।
चेतना मंच ने पहले प्रकाशित खबर के शीर्षक में मुकेश शर्मा की राजनीतिक दावेदारी को लेकर तीखी टिप्पणी की थी। उस खबर के शीर्षक में प्रयुक्त शब्द 'पागल' को राजनीतिक व्यंग्य और टिप्पणी के संदर्भ में देखा जाना चाहिए, न कि किसी चिकित्सकीय निष्कर्ष के रूप में। उस समय उठाया गया मूल राजनीतिक सवाल यह था कि यदि कोई व्यक्ति भाजपा और RSS से जुड़ा रहा हो, तो वह समाजवादी पार्टी के टिकट पर चुनाव लड़ने की दावेदारी क्यों कर रहा है। अब सामने आई तस्वीर ने उसी सवाल को एक नया संदर्भ दिया है। फिर भी, किसी पुराने आरोप या टिप्पणी को केवल दोहराने के बजाय मौजूदा तथ्यों की जांच करना जरूरी है। मुकेश शर्मा की राजनीतिक यात्रा, भाजपा या RSS से उनके संबंधों का स्वरूप, समाजवादी पार्टी में उनकी औपचारिक भूमिका और टिकट के लिए उनकी दावेदारी की वास्तविक स्थिति को स्पष्ट करने वाले प्रमाण ही इस बहस को मजबूत आधार दे सकते हैं। इस पूरे मामले को समझाने के मकसद से हम चेतना मंच की पुरानी खबर को भी नीचे पढ़वा रहे हैं। Noida News :
नोएडा शहर में अनेक प्रकार के मार्गों से लोग ‘‘धनपति” बने हैं। हाल ही में नोएडा शहर के एक ‘‘धनपति” के ‘‘पागल” हो जाने का बड़ा समाचार चेतना मंच के न्यूज पोर्टल https://chetnamanch.com/ पर प्रकाशित किया गया था। खबर आई है कि नोएडा का एक और नया-नया ‘‘धनपति” बना युवक भी ‘‘पागल’’ हो गया है। नोएडा शहर के इस नये-नये ‘‘धनपति” ने तो सारी हदें पार कर दी हैं। यह ‘‘धनपति” अंदरखाने तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जुड़ा हुआ है किन्तु नोएडा में विधानसभा के चुनाव के लिए टिकट समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव से ले आया है। इस ‘‘धनपति” का दावा है कि समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने उनके कमाल के (Talent) को देखकर उन्हें नोएडा विधानसभा क्षेत्र से विधानसभा का टिकट दे दिया है। नोएडा के इस ‘‘धनपति” ने घोषणा कर दी है कि अपने धन के बल पर वह नोएडा के वर्तमान विधायक पंकज सिंह को चुनाव में पटकनी देकर नोएडा विधानसभा क्षेत्र से विधायक बन जाएगा। नोएडा में अनेक दशक से समाजवादी पार्टी के लिए ‘‘दरी बिछाने वाले” नेता तथा कार्यकर्ता बोल रहे हैं कि पता नहीं कि पार्टी नेतृत्व नोएडा विधानसभा सीट पर इतने बड़े ‘‘धनपति” के ऊपर दांव कैसे लगा देगा ?
हम यहां बात कर रहे हैं नोएडा के धनपति मुकेश शर्मा की। दरअसल मुकेश शर्मा के ऊपर यहां प्रसिद्ध शेर शत-प्रतिशत लागू हो रहा है कि ‘‘तुम्हारा लहजा बता रहा है कि यह दौलत नई-नई है” मुकेश शर्मा का नाम इन दिनों नोएडा क्षेत्र में बड़ी चर्चा का विषय बना हुआ है। इस चर्चा का सबसे बड़ा कारण नोएडा शहर में करोड़ों रूपए की लागत से लगाए गए बड़े-बड़े होर्डिंग्स बने हुए हैं। मूल रूप से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) की पृष्ठभूमि से आने वाले मुकेश शर्मा की पूरी पोल उस समय खुल गई जब नोएडा स्टेडियम में श्री सनातन धर्म रामलीला के ध्वजारोहण कार्यक्रम में सनातन धर्म समिति के महासचिव तथा भाजपा के वरिष्ठ नेता संजय बाली ने लोगों को मुकेश शर्मा का परिचय बताया। परिचय बताने के संबोधन के दौरान भाजपा के उपाध्यक्ष तथा सांसद प्रतिनिधि संजय बाली ने कहा कि पं. मुकेश शर्मा बड़े समाजसेवी तथा शिक्षाविद् हैं। इन्होंने समय-समय पर (RSS) के स्कूल निर्माण में बहुत बड़ा सहयोग भी प्रदान किया है। संघ तथा भाजपा के प्रति इनका जुड़ाव सर्वविदित है।
नए-नए धनपति मुकेश शर्मा के विषय में सबसे बड़ा सवाल यह पैदा होता है कि संघ तथा भाजपा की पृष्ठभूमि से जुड़े किसी व्यक्ति को समाजवादी पार्टी आखिर विधानसभा जैसा महत्वपूर्ण टिकट कैसे दे सकती है? समाजवादी पार्टी के कुछ वरिष्ठ नेताओं ने बताया कि मुकेश शर्मा न तो समाजवादी पार्टी के प्राथमिक सदस्य हैं और न ही उन्होंने नोएडा में कभी समाजवादी पार्टी के लिए कोई काम किया है। अचानक पैराशूट की तरह जगह-जगह होर्डिंग लगवाकर मुकेश शर्मा क्या संदेश देना चाह रहे हैं ? Noida News :
नए-नए धनपति बने मुकेश शर्मा को शायद यह किसी गुरू ने बताया ही नहीं कि केवल धन के बल पर समाज के बीच में स्थापित होना कभी भी संभव नहीं था। उनके गुरूजनों ने उन्हें नोएडा जैसे शहर का राजनैतिक इतिहास भी नहीं बताया। दुर्भाग्य तो यह भी है कि उन्हें तो यह भी नहीं पता कि यदि धनपति होने से ही विधायक तथा सांसद बन जाया करता तो इस देश में सभी सांसद तथा विधायक मुकेश अंबानी तथा गौतम अडानी के घर वाले तथा उनके अरबपति निदेशक, महाप्रबंधक तथा प्रबंधक कब के विधायक तथा सांसद बन गए होते। मुकेश शर्मा के नोएडा से विधायक बनने के सपने को ‘‘पागलपन” न कहें तो और क्या कह सकते हैं? पाठक अपनी राय हमें वाहटसप नम्बर- 96506 73031 पर दे सकते हैं। Noida News :
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