
Noida News (अरूण सिन्हा) : ‘मेरा घर- राहुल गांधी का घर’। यह नारा सियासत की औपचारिकता निभाने तथा अपने नेता के प्रति संवेदना जताने के लिए तो ठीक रहता है। लेकिन जब इसे हकीकत में उतारने की बात आती है तो अधिकांश कन्नी काटते नजर आते हैं। यही हाल इन दिनों कांग्रेस पार्टी का है।
लोकसभा की सदस्यता बर्खास्त होने के बाद सरकार ने राहुल गांधी को 1 महीने के अंदर सांसद आवास छोडऩे का नोटिस दिया है। बेघर हुए राहुल के प्रति संवेदना जताने के लिए देश व प्रदेश भर के कांग्रेस पदाधिकारी व कार्यकर्ताओं ने अपना घर राहुल गांधी को देने का अभियान शुरू कर दिया है। सभी ने अपने के घर के बाहर पोस्टर चिपका दिया है जिसमें लिखा है ‘मेरा घर- राहुल गांधी का घर’ तथा ‘यह घर राहुल गांधी का है’।
इस बाबत चेतना मंच ने कई पदाधिकारियों व कार्यकर्ताओं से पूछा कि क्या वे वास्तव में अपना घर राहुल गांधी को देने को तैयार है? क्या वह अपने मकानों की रजिस्ट्री राहुल गांधी के नाम करने को तैयार हैं। अधिकांश नेता इस बात पर मुकर गए। उनका तर्क था कि ऐसा कोई आदेश हाईकमान से नहीं आया है। सिर्फ पोस्टर लगाकर अभियान चलाने के ही निर्देश मिले हैं। चंद शीर्ष पदाधिकारियों ने कहा कि यदि पार्टी आदेश करेगी तो वे उस पर विचार करेंगे।
कुल मिलाकर अधिकांश पदाधिकारी व कार्यकर्ता राहुल गांधी के नाम अपनी संपत्तियों की रजिस्ट्री करने के मुद्दे पर कन्नी काटते नजर आए।
युवक कांग्रेस के राष्ट्रीय सचिव तथा एआईसीसी सदस्य दीपक भाटी चोटीवाला ने कहा कि वे अपना मकान कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष व पार्टी के फायर ब्रांड नेता राहुल गांधी के नाम रजिस्ट्री करने को तैयार हैं। उन्होंने कहा कि सिर्फ वे ही नहीं बल्कि देशभर के कार्यकर्ता अपने तथा पार्टी के प्रति समर्पित निष्ठावान है। वे राहुल गांधी तथा कांग्रेस के लिए हर तरह की कुर्बानी देने को तैयार हैं। Noida News
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