
Noida News (चेतना मंच)। नोएडा प्राधिकरण की घोर लापरवाही के कारण कभी भी नोएडा में शाहबेरी से भी बड़ा दर्दनाक हादसा हो सकता है। लापरवाही का आलम यह है कि करीब 4 वर्ष पूर्व नोएडा प्राधिकरण द्वारा चिन्हित की गई 1757 इमारतों का न तो सुधार किया गया और न ही प्राधिकरण द्वारा कथित तौर पर ध्वस्त की जाने वाली 114 इमारतों को आज तक ध्वस्त नहीं किया गया। ये इमारतें अभी भी मौत बनकर खड़ी हुई है।
नोएडा प्राधिकरण की लापरवाही यहीं खत्म नहीं हो जाती है। बल्कि अभी तक गांवों में तीन मंजिला से अधिक चिन्हित 1320 इमारतों का आज तक सत्यापन नहीं हो पाया कि उनका निर्माण प्राधिकरण के अधिसूचित क्षेत्र में किया गया है या नहीं। नोएडा प्राधिकरण ने करीब चार साल पहले एक सर्वे कराया था। इस सर्वे के तहत कुल 1757 इमारतों को चिह्नित किया गया था। इसमें 114 इमारतें ऐसी थी जिनको ध्वस्त कर दिया जाना चाहिए था।
अब तक किसी भी इमारत को ध्वस्त नहीं किया गया। प्राधिकरण ने ये सर्वे चार श्रेणी में कराया था। पहला असुरक्षित व जर्जर, दूसरा अधिसूचित व अर्जित भवन पर अवैध कब्जा, तीसरा अधिसूचित व अनार्जित पर बनी इमारत व चौथा ग्राम की मूल आबादी में बनी बहुमंजिला इमारतों को शामिल किया गया था। सर्वे के परिणाम चौंकाने वाले थे। पहली श्रेणी में कुल 56 जर्जर व असुरक्षित इमारत थी। कुल मिलाकर 1757 इमारतों की एक सूची बनाई गई। इस सूची के हिसाब से नोएडा प्राधिकरण ने जर्जर मकानों पर असुरक्षित भवन की मार्किंग भी की। लेकिन अब तक ये जस की तस है।
शहर के गांवों के अलावा कई स्थानों पर सैकड़ों इमारतों को अवैध जर्जर करार देकर नोटिस जारी किए थे। इसमें सर्वाधिक इमारतें हिंडन विहार व गढ़ी चौखंडी गांव की थी। यहां धड़ल्ले से अवैध निर्माण किया जा रहा था। यहां बनाई गई इमारतें सात-आठ मंजिल तक है। विगत वर्ष इनका निर्माण कार्य रुकवाया गया साथ ही नोटिस जारी कर ध्वस्तीकरण के निर्देश दिए गए, लेकिन अब तक इमारतों को गिराया नहीं जा सका। इसी तरह निठारी, हरौला में दर्जनों अवैध इमारतों को नोटिस जारी कर गिराने का निर्देश दिया था। Noida News