
Noida News : यूपी के नोएडा में फर्जी GST फर्म तैयार करके सरकार को करोड़ों रुपये का चूना लगाने वाले अंतर्राज्जीय गिरोह में शामिल 3 शातिरों के खिलाफ नोएडा पुलिस कमिश्नरेट की नोएडा के थाना सेक्टर 20 पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर CRPC की धारा 80 के तहत फगोड़ा घोषित करते हुए आरोपियों के मकानों पर नोटिस चस्पा करने की कार्यवाही की है। यह कार्यवाही नोएडा की पुलिस ने आरोपियों के हरियाणा राज्य स्थित आवास पर पहुंचकर की है। साथ ही पुलिस ने मुनादी भी कराई कि दोनों आरोपियों को भगोड़ा घोषित कर दिया गया है।
आपको बता दें कि नोएडा में कुछ दिनों पूर्व फर्जी फर्म तैयार कर जीएसटी रिफंड के करोड़ों रुपये का घोटाला उजागर हुआ था। इस मामले में नोएडा पुलिस कई आरोपियों को गिरफ्तार करके जेल भेज चुकी है, लेकिन 3 अन्य आरोपी कुनाल मेहता उर्फ गोल्डी पुत्र राकेश कुमार मेहता निवासी म.नं. 739/13 मुल्तानी चौक हिसार जनपद हिसार हरियाणा, आशीष अलावादी पुत्र नवीन अलावादी निवासी मकान नंबर 412 नियर चिल्ड्रन पब्लिक स्कूल शिव मंदिर वाली गली सिरसा हरियाणा तथा बलदेव उर्फ बल्ली पुत्र सतेन्द्र कुमार निवासी मकान नंबर 679/13 दौगरान मौहल्ला वाल्मीकि चौक हिसार हरियाणा फरार चल रही है। नोएडा के थाना सेक्टर 20 पुलिस लगातार इन आरोपियों को खोज रही है, लेकिन आरोपियों का कुछ पता नहीं चल रहा है।
Greater Noida : बड़े भाई ने घर में घुसकर छोटे भाई की बीवी और बेटी पर किया ईंट से हमला
फरार आरोपियों को लेकर कोर्ट द्वारा सीआरपीसी की धारा 80 के तहत भगोड़ा घोषित करने की कार्यवाही की गई है। जिसके बाद शनिवार को थाना सेक्टर-20 नोएडा पुलिस ले कोर्ट के आदेश का अनुपालन करते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ हरियाणा के सिरसा और हिसार पहुंचकर तीनों आरोपियों के घरों पर भगोड़ा घोषित किए जाने की मुनादी कराई और कोर्ट की ओर से जारी नोटिस चस्पा किया। आपको बता दें कि तीनों अभियुक्तों की गिरफ्तारी पर 25000-25000 रुपये का इनाम भी घोषित है।
आम भाषा में समझें तो CRPC की धारा 82 के मुताबिक, वह व्यक्ति जो किसी अपराध या किसी कर्ज की वजह से बच निकलने के मकसद से कही फरार हो जाता है या भाग जाता है, तो अदालत उसके फरार हो जाने की उद्घोषणा करती है। इस धारा में केवल वह फरार व्यक्ति के बारे में उद्घोषणा करने को बताती है।
सीआरपीसी (CRPC) अंग्रेजी का शब्द है। जिसकी फुल फॉर्म Code of Criminal Procedure (कोड ऑफ क्रिमिनल प्रोसिजर) होती है। इसे हिंदी में 'दंड प्रक्रिया संहिता' कहा जाता है। CRPC में 37 अध्याय (Chapter) हैं, जिनके अधीन कुल 484 धाराएं (Sections) मौजूद हैं। जब कोई अपराध होता है, तो हमेशा दो प्रक्रियाएं होती हैं, एक तो पुलिस अपराध (Crime) की जांच करने में अपनाती है, जो पीड़ित (Victim) से संबंधित होती है और दूसरी प्रक्रिया आरोपी (Accused) के संबंध में होती है। सीआरपीसी (CrPC) में इन प्रक्रियाओं का ब्योरा दिया गया है।
सीआरपीसी के लिए 1973 में कानून (Law) पारित किया गया था। इसके बाद 1 अप्रैल 1974 से दंड प्रक्रिया संहिता यानी सीआरपीसी (CRPC) देश में लागू हो गई थी। तब से अब तक CRPC में कई बार संशोधन (Amendment) भी किए गए है।