नोएडा में 72 बीमार एंबुलेंस के सहारे मरीज, नोटिस जारी
Noida News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 06:19 PM
Noida News : स्वास्थ्य विभाग का हाल बहुत बुरा है। जिले में संचालित 72 एंबुलेंस भगवान भरोसे चल रही हैं। यह वह एंबुलेंस हैं जिनकी फिटनेस एक्सपायर हो चुकी है और उसके बाद भी बिना फिटनेस टेस्ट कराए इनके संचालक इनका प्रयोग कर रहे हैं। ऐसे में मरीजों के लिए ये खतरे से कम नहीं हैं। कभी भी कोई दुर्घटना इन खराब हो चुकी एंबुलेंस के चक्कर में हो सकती है या बीच रास्ते में खराब होने पर सीरियस मरीज की जान भी जा सकती है।
बीते छह माह में इनकी संख्या कम होने की जगह और बढ़ी
अहम यह है कि बीते छह माह में इनकी संख्या कम होने की जगह और बढ़ गई है। जून 2024 में ऐसी एंबुलेंस की संख्या 60 थी छह माह बाद यह संख्या बढ़कर 72 पहुंच गई हैं। एक बार फिर से विभाग की ओर से इन्हें नोटिस तो जारी किया ही गया है। साथ ही इन्हें फिटनेस कराने के लिए सख्त हिदायत भी दे दी गई है। जाहिर है कि जिले में कुल 647 एंबुलेंस का संचालन हो रहा है। हर दो साल में इनकी फिटनेस करानी पड़ती है। फिटनेस खत्म होने से 30 दिन पहले ही एंबुलेंस संचालक के मोबाइल पर मैसेज भेजा जाता है कि यह जल्द से जल्द एंबुलेंस की फिटनेस करा लें। इसके अलावा फिटनेस खत्म होने के बाद विभाग की ओर से नोटिस जारी किया जाता है। एंबुलेंस को सड़क पर दौड़ते हुए पकड़ने पर पांच हजार रुपये जुर्माने का भी प्रावधान है।
स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट के बाद मिलता है प्रमाण पत्र
एंबुलेंस को फिटनेस प्रमाण देने के पहले एआरटीओ की ओर से एक आवश्यक रिपोर्ट सीएमओ कार्यालय में ली जाती है। एआरटीओ डॉ. सियाराम वर्मा ने बताया कि लगभग डेढ़ माह से एंबुलेंस की फिटनेस रिपोर्ट के पहले सीएमओ कार्यालय से एक रिपोर्ट ली जाती है। जहां एंबुलेस में आवश्यक सुविधाओं के बाबत रिपोर्ट दी जाती है। इस रिपोर्ट के दुरुस्त होने पर ही किसी भी एंबुलेंस को रोड पर चलने की परमीशन मिलती है।
तीन श्रेणियों में होता है पंजीकरण
उप संभागीय अधिकारी डॉ. सियाराम वर्मा बताते हैं कि एआईएस 125 नियम के तहत एंबुलेस का तीन श्रेणी ए, बी और सी में पंजीकरण होता है। इसलिए तीनों श्रेणियों के फिटनेस नियम अलग-अलग हैं। आमतौर पर एंबुलेंस में एसी, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन, ईएमटी आॅक्सीजन सिलिंडर के अलावा जरूरी दवाएं होनी चाहिए। साथ ही उसकी कंडीशन भी अच्छी होनी चाहिए। हर दो वर्षों में इस वजह से ही इनकी फिटनेस करानी होती है। एंबुलेंस के रूप में उपयोग किया जा रहा वाहन वातानुकूलित होना चाहिए। उसमें पर्याप्त जगह होनी चाहिए, ताकि मरीज को घबराहट और घुटन न हो। Noida News
एंबुलेंस संचालकों को नोटिस जारी किया जा चुका
जानकार बताते हैं कि फिटनेस के खर्चे से बचने के लिए एंबुलेंस संचालक मरीजों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। उप संभागीय परिवहन अधिकारी डॉ. सियाराम वर्मा बताते हैं कि फिटनेस समाप्त हो चुकी सभी एंबुलेंस संचालकों को नोटिस जारी किया जा चुका है। अगर कोई भी एंबुलेंस बिना फिटनेस सड़क पर चलती हुई पाई गई तो प्रवर्तन टीम उसे सीज करने के साथ ही संबंधित थाने में रिपोर्ट भी दर्ज कराएगी। Noida News