
Noida News : उत्तर भारत सहित दिल्ली एनसीआर में मंगलवार की दोपहर भूकंप के तेज झटकों ने एक बार फिर नोएडा व ग्रेटर नोएडा में रहने वालों की सांसों को थाम दिया। भूकंप की तीव्रता रिएक्टर स्केल पर 6.2 थी और इसका केंद्र भारत का पड़ोसी देश नेपाल था जहां भूकंप झटके इतने तेज थे कि वहां घर की दीवारें गिरने की तस्वीरें सामने आई है। नोएडा व ग्रेटर नोएडा में रहने वाले लाखों लोगों के लिए भूकंप के झटके एक बड़ी तबाही के संकेत हैं। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में ऐसी किसी भी त्रासदी से निपटने के इंतजाम नहीं हैं।
दिल्ली एनसीआर के नोएडा व ग्रेटर नोएडा सहित अन्य कई बड़े शहर भूकंप के लिहाज से खतरनाक जोन माने वाले सिस्मिक जोन 4 में आते हैं। उत्तर प्रदेश के नोएडा व ग्रेटर नोएडा में वर्ष 2005 के बाद तेज रफ्तार से हाईराइज बिल्डिंगों का निर्माण शुरू हुआ। आज नोएडा, ग्रेटर नोएडा व ग्रेटर नोएडा वेस्ट में हजारों हाईराइज बिल्डिंग हैं, जहां लाखों लोग रह रहे हैं। कई हाईराइज बिल्डिंगे तो 25 फ्लोर तक बनी हुई हैं।
भूकंप को लेकर संवेदनशीलता के मामले में दिल्ली एनसीआर सिस्मिक जोन-4 में आता है, जो कि रिक्टर स्केल पर तीव्रता 6 तक का झटका आने और भूकंप का केंद्र यहां होने पर भारी तबाही मचा सकता है। आपको बता दें कि 11 नवंबर 2013 को सुबह 7 बजे से 10 बजे तक 2.5 से 3 तक की तीव्रता के भूकंप के तीन झटके महसूस किए गए थे, उस समय एनसीआर ही भूकंप का केंद्र था। कई हाईराइज सोसाइटी में उस समय लोगों को ऐसा महसूस हुआ था जैसे झूले पर बैठे हो।
आपदा विशेषज्ञ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि संवेदनशीलता के मामले में नोएडा व ग्रेटर नोएडा जोन-4 में आता है। यदि यहां केंद्र होने पर 5 रिक्टर स्केल से अधिक की तीव्रता का भूकंप आता है तो तबाही मच सकती है। साथ ही, आम लोगों और बचाव कार्य करने वाले दलों को पहले से प्रशिक्षण देने की नियमित जरूरत है। इससे ऐसी आपदा आने पर जोखिम को 60 फीसदी तक कम किया जा सकता है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा में करीब हजारों हाईराइज सोसाइटी के प्रॉजेक्ट हैं। यह शहर सिस्मिक जोन-4 में आता है। इसके बावजूद डिजास्टर मैनेजमेंट सेल एक्टिव नहीं है। इस सेल में न तो जरूरत के अनुसार मैन पॉवर और संसाधन हैं और न ही ट्रेंड प्रोफेशनल। कभी इस आपदा सेल के माध्यम से किसी सरकारी अस्पताल या अन्य बिल्डिंग में मॉक ड्रिल करा दी जाती है, लेकिन इस प्रकार की मॉक ड्रिल का जमीनी स्तर पर कोई फायदा नजर नहीं आता।
जानकारों का कहना है कि भूकंप से हाईराइज सोसाइटियों को अंदरूनी नुकसान हो सकता है। डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट 2005 में लाया गया था। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की अधिकांश बिल्डिंग का निर्माण उसके बाद ही हुआ है। इसके बावजूद 30-35 प्रतिशत बिल्डिंग में भी भूकंप रोधी इंतजाम नहीं है।
भारत के इतिहास में सबसे बड़ा भूकंप और तेज भूकंप 1934 में आया था। इसमें नेपाल और बिहार में सबसे ज्यादा क्षेत्र प्रभावित हुए, इसकी तीव्रता 8.0 थी इस भूकंप से बहुत ज्यादा तबाही मची थी। 15 जनवरी 1934 को यह भूकंप आया था
23 अक्तूबर 2011 : तुर्की के दक्षिणी पूर्वी प्रांत में 7.2 की तीव्रता वाले भूकंप से 200 लोगों की मौत और 1000 घायल हुए।
11 मार्च 2011 : जापान में 8.9 की तीव्रता के भूकंप से 20,000 लोग मारे गए या लापता हुए। भूकंप की वजह से आई सूनामी से 1986 में चर्नोबिल के बाद सबसे बड़ी परमाणु दुर्घटना का सामना।
22 फरवरी 2011 : न्यूजीलैंड के क्राइस्टचर्च में 6.9 की तीव्रता वाले भूकंप से 160 लोगों की मौत और 1,00,000 लोगों के घरों को नुकसान पंहुचा।
14 अप्रैल 2010 : चीन की चिंघाई प्रांत में 6.9 तीव्रता वाले भूकंप से 400 लोगों की मौत।
12 जनवरी 2010 : हेटी में आए 7.0 की तीव्रता वाले भूकंप से 2,30,000 लोगों की मौत।
6 अप्रैल 2009 : इंडोनेशिया के सुमात्रा द्वीप पर आए भूकंप में 1,000 लोगों की मौत।
29 अक्तूबर 2008 : पाकिस्तान के बलूचिस्तान में 6.4 तीव्रता वाले भूकंप से 300 लोग मारे गए।
12 मई 2008 : चीन के सिचुआन प्रांत में आए भूकंप से 87,000 लोगों की मौत और 3,70,000 लोग घायल हुए।
15 अगस्त 2007 : पेरू में 519 लोगों की मौत हुई. भूकंप की तीव्रता थी 7.9।
27 मई 2006 : इंडोनेशिया के द्वीप जावा में 6.2 की तीव्रता वाले भूकंप से 5,700 लोगों की मौत।
1 अप्रैल 2006 : ईरान में 6.0 की तीव्रता वाले भूकंप से 70 लोगों की मौत और 1200 लोग घायल हुए।
8 अक्तूबर 2005 : 7.6 तीव्रता के एक भूकंप ने उत्तरी पाकिस्तान और पाक अधिकृत कश्मीर में भारी तबाही मचाई। इसमें 73 हज़ार से अधिक लोगों की जानें गई।
28 मार्च 2005 : पश्चिमी सुमात्रा में स्थित इंडोनेशिया के द्वीप नियास में आए भूकंप ने 1300 लोगों की जानें ली।
22 फ़रवरी 2005 : कई सौ लोग 6.4 तीव्रता के भूकंप में मारे गए। ये भूकंप ईरान के करमान प्रांत के ज़ारालैंड में आया था।
26 दिसंबर 2004 : एशिया के समुद्र में 9.2 तीव्रता के भूकंप से सूनामी पैदा हुई और इसने एशिया के 14 देशों में भारी तबाही मचाई। इसमें दो लाख से अधिक लोग मारे गए।
24 फरवरी 2004 : मोरक्को के तट पर आए भूकंप ने 500 से अधिक लोगों की जानें ली।
26 दिसंबर 2003 : दक्षिण ईरान के एतिहासिक शहर बाम में आए भूकंप में 26 हजार लोग मारे गए।
21 मई 2003 : अल्जीरिया में दो दशकों का सबसे बड़ा भूकंप आया। इस भूकंप को स्पेन के समुद्री इलाक़े में महसूस किया गया। इसमें दो हजार लोग मारे गए और आठ हजार घायल हुए।
26 जनवरी 2001 : भारत में गुजरात के भुज इलाक़े में आए भूकंप की वजह से 20 हजार से अधिक लोग मारे गए और दस लाख से अधिक लोग बेघर हो गए। इसकी तीव्रता 7.9 मापी गई थी। इससे अहमदाबाद के आसपास के इलाके भी प्रभावित हुए थे।
- 0 से 1.9 की तीव्रता वाले भूकंप का पता सिर्फ सीज्मोग्राफ से ही चलता है।
- 2 से 2.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर हल्का कंपन होता है।
- 3 से 3.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर ऐसा लगता है जैसे मानो बगल से कोई ट्रक गुजर गया हो।
- 4 से 4.9 की तीव्रता के भूकंप में खिड़कियां टूट सकतीं हैं। दीवारों पर टंगे फ्रेम गिर सकते हैं।
- 5 से 5.9 की तीव्रता वाले भूकंप में घर का फर्नीचर हिल सकता है।
- 6 से 6.9 की तीव्रता वाला भूकंप इमारतों की नींव को दरका सकता है, ऊपरी मंजिलों को नुकसान पहुंच सकता है।
- 7 से 7.9 की तीव्रता का भूकंप आने पर इमारतें ढह जातीं हैं। जमीन के अंदर पाइप लाइन फट जातीं हैं।
- 8 से 8.9 की तीव्रता के भूकंप में इमारतों के साथ-साथ बड़े-बड़े पुल भी गिर सकते हैं।
- 9 या उससे ज्यादा की तीव्रता का भूकंप आने पर जमकर तबाही मचती है। Noida News