
Noida News (चेतना मंच)। निजाम बदला तथा हुक्कमरान बदले। यदि नहीं कुछ बदला तो वह नोएडा प्राधिकरण के अफसरों की कार्यशैली। लेटलतीफी के शिकार प्राधिकरण के कर्मचारी अभी भी अपनी आदत से बाज नहीं आ रहे हैं। छोटे कर्मचारियों की कौन कहे, अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी (ACEO) तथा विशेष कार्याधिकारी (OSD) जैसे शीर्ष अफसर भी CEO डा. लोकेश एम की नहीं सुन रहे हैं। मजबूरन CEO को कार्यालय आदेश जारी कर लेटतलीफी आने वाले अफसरों को चेताना पड़ा।
प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों से खुश नहीं है। इसकी बड़ी वजह अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी, ओएसडी और अन्य विभागाध्यक्ष व मंडलीय अधिकरियों का समय से कार्यालय नहीं पहुंचना है। सीईओ ने कार्यालय आदेश जारी करते हुए विलंब से आने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए कहा है।
सीईओ की ओर से जारी कार्यालय आदेश में स्पष्ट है कि प्राधिकरण का कार्यालय सुबह 9:30 से शाम 6 बजे तक खुलता है, लेकिन जिम्मेदार पदों पर तैनात एसीईओ और ओएसडी रैंक के अधिकारी 10 बजे तक भी कार्यालय उपस्थति नहीं होते है। इससे जहां एक ओर जनसामान्य को असुविधा होती है वहीं दूसरी ओर प्राधिकरण की छवि पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। यह आचरण बेहद आपत्तिजनक और उ.प्र. कर्मचारी सेवा विनियमावली के विपरीत है।
नोएडा प्राधिकरण के CEO डॉ. लोकेश एम ने कार्यालय आदेश में यहाँ तक लिखा है कि नोएडा प्राधिकरण के अधिकारी सेक्टर 14 A में निवास करते हैं यह सेक्टर नोएडा प्राधिकरण के कार्यालय से मात्र दो किलोमीटर की दूरी पर है। फिर भी अधिकारी समय से कार्यालय नहीं आते हैं। यह बेहद चिंताजनक है। CEO ने साफ़ किया है कि आगे से समय पर कार्यालय नहीं आने वाले अधिकारियों के ख़िलाफ़ सख़्त कार्रवाई की जाएगी। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि नोएडा प्राधिकरण के सीईओ के इस आदेश को उनके अधिकारी गंभीरता से लेते हैं अथवा नहीं या फिर पहले की तरह से ही जब चाहे तब दफ़्तर में आना और जब चाहें तब चले जाना वाली गतिविधि जारी रहती है। सीईओ के इस आदेश को नोएडा के प्रशासनिक अमले में आमूलचूल बदलाव की कडी का एक हिस्सा माना जा रहा है। Noida News