
अब ज्यादातर सरकारी और प्राइवेट अस्पताल में सी-सेक्शन डिलीवरी होने लगी है। डिलीवरी के समय ज्यादातर डॉक्टर और नर्स माँ और बच्चे को मेडिकली स्टेबल करने में लग जाते हैं। इस बीच वे गोल्डन आवर के बारे में भूल जाते हैं। गोल्डन ऑवर में ब्रेस्ट फ्रीडिंग से मिले हाइपोथर्मिया से नवजात को सुरक्षा मिलती है। निमोनिया व डायरिया जैसे रोगों से भी बचाव होता है। शिशु भी जन्म के पहले घंटे में बहुत सक्रिय होता है इसलिए जब बच्चे को भूख लगे तो स्तनपान कराना जरूरी होता है। माँ के दूध में जो विटामिन होते हैं वे प्राकृतिक होते हैं जबकि फॉर्मूला मिल्क में सिंथेटिक, ऐसे में पहले छह महीने तक माँ का दूध बच्चे के लिए एक अनिवार्य आहार होता है। इसके बाद से डेढ़ से दो वर्ष तक ठोस आहार के साथ माँ का दूध दिया जा सकता है। Noida News