
Noida News : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर मंगलवार को एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ साइकोलॉजी एंड एलाइड सांइसेस, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हैल्थ एंड एलाइड सांइसेस और एमिटी सेंटर फॉर गाइडेंस एंड कांउसलिंग द्वारा ‘‘मानव स्वास्थ्य एक सार्वभौमिक मानव अधिकार है’’ विषय पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम के शुभारंभ समारोह में वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेंटल हैल्थ के कान्स्टिटूअन्सी डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष और मनोचिकित्सक डॉ. सुनिल मित्तल, वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एन. जी. देसाई, एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. बलविंदर शुक्ला, एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ साइकोलॉजी एंड एलाइड सांइसेस की प्रमुख डॉ. रंजना भाटिया द्वारा किया गया।
वर्ल्ड फेडरेशन ऑफ मेंटल हैल्थ के कान्स्टिटूअन्सी डेवलपमेंट के उपाध्यक्ष और मनोचिकित्सक डॉ. सुनील मित्तल ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छात्रों के मध्य आकर मानसिक स्वास्थय पर चर्चा करके स्वयं के व्यक्तित्व में उत्साह का अनुभव करता हूं। जीवन में सफल होने के लिए मानसिक स्वास्थ्य का सुदृढ़ होना आवश्यक है। डॉ. मित्तल ने कहा वैश्विक परिस्थितियों जैसे महामारी, युद्ध, जलवायु परिवर्तन आदि ने मानसिक स्वास्थय को प्रभावित किया है। हर व्यक्ति के पास स्वस्थ मानसिक स्वास्थय का अधिकार है और 1966 के यूएन कनवेंशन में समान अधिकार, 2006 यूएनसीआरपीडी कन्वेंशन, विकलांग व्यक्तियों की स्थिति के लिए मानव अधिकारों पर संयुक्त राष्ट्र घोषणापत्र से स्थापित मानव अधिकार सिद्धांतों को लागू करता है। भारत में भी 2017 में मेंटल केयर एक्ट को पारित किया गया। डॉ. मित्तल ने कहा कि आप योग, मेडिटेशन, व्यायाम और अच्छी जीवन शैली सेे एक बेहतर मानसिक स्वास्थय का निर्माण कर सकते है इसलिए आज से अभियान चलाये कि स्वयं भी मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक होंगे और अन्य लोगों को भी करेंगे।
वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. एन. जी. देसाई ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में कठिनाईयां और समस्याएं सदैव आपको और भी मजबूत बनाती है इसलिए स्वंय के मानसिक स्वास्थय को संतुलित बनायें। कई बार इस उम्र में पीढ़ियों के मध्य का रिक्त स्थान का बोझ या आपसी मतभेद भी मानसिक विकार पैदा करते है, इसलिए सदैव शांत मन दूसरे व्यक्ति के विचारों को समझे। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका सहित पश्चिम में मानसिक विकास बहुत आम है लेकिन भारत में केवल 10 से 12 प्रतिशत आबादी को सामाजिक सांस्कृतिक कारकों, पारिवारिक जुड़ाव, देखभाल की प्रकृति और कई अन्य कारकों के कारण मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं हैं।
एमिटी विश्वविद्यालय की वाइस चांसलर डॉ. बलविंदर शुक्ला ने कहा कि कुछ वर्षों पहले लोग मानसिक स्वास्थ्य या विकारों के बारे में बात करने में असहज महसूस करते थे, लेकिन आज लोग इस मुद्दे पर खुल कर बात कर रहे हैं। अगर व्यक्ति मानसिक रूप से स्वस्थ है तो वह सकारात्मक विचार रखेगा और सकारात्मक कार्य करेगा। डॉ. शुक्ला ने कहा हैप्पीनेस इंडेक्स में हमारी रैकिंग भी हमारे मानसिक स्वास्थ्य पर आधारित होती है। आज कई देशों से लोग हमारे देश में मेडिकल सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए आते है और आने वाले समय में मानसिक स्वास्थय रोग से जुड़े व्यक्ति भी बड़ी संख्या में हमारे मनोचिकित्सकों से परामर्श व उनकी सेवाये प्राप्त करने के लिए आयेंगे इसलिए छात्रों के इस स्वास्थ्य के क्षेत्र में कैरियर बनाने का बेहतरीन अवसर भी है।
एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ साइकोलॉजी एंड एलाइड सांइसेस की प्रमुख डॉ. रंजना भाटिया ने अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि एक अच्छी शिक्षा, मानसिक स्वास्थय के जीवन में महत्वपूर्ण परिपेक्ष्य है। इस मानसिक स्वास्थ्य दिवस का आयोजन विश्व में लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने के लिए किया जाता है। इस वर्ष की थीम ‘‘मानव स्वास्थय एक सार्वभौमिक मानव अधिकार’’ हर व्यक्ति के मानसिक स्वास्थय को मजबूत बनाने में सहायक होगा क्योकी यह सभी का अधिकार है।
कार्यक्रम में एमिटी इंस्टीटयूट ऑफ बिहेवियरल हैल्थ एंड एलाइड सांइसेस की निदेशक डॉ. रूशी तमन्ना, एमिटी सेंटर फॉर गाइडेंस एंड कांउसलिग की डॉ. हरमिंदर गुजराल उपस्थित थे। सम्मेलन के अंर्तगत आधारित तकनीकी सत्र में दिल्ली के द होप फांउडेशन के संस्थापक निदेशक डॉ. दीपक रहेजा, नोएडा के बिलबांग हाई इंटरनेशन स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. शर्मिला चैटर्जी , अधिवक्ता सुश्री स्वाति शंकर, थिरेपहील प्राइवेट लिमिटेड की संस्थापक निदेशक डॉ. अनन्या सिन्हा आदि ने अपने विचार रखे।
मंगलवार को ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क-5 स्थित गौतमबुद्ध बालक इंटर कॉलेज में छात्रों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरुकता शिविर का आयोजन किया गया। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ. तनुजा गुप्ता के नेतृत्व में डीएमएचपी (डिस्ट्रिक्ट मेंटल हेल्थ प्रोग्राम) गौतमबुद्ध नगर की टीम ने छात्रों व शिक्षकों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया । उन्होंने मानसिक रोगों के लक्षण को जानने-पहचानने और समय से चिकित्सक से संपर्क करने के बारे में बताया। शिविर में छात्रों व शिक्षकों ने चिकित्सक से सवाल भी पूछे। इस अवसर पर कॉलेज के प्रधानाचार्य राजीव कुमार व सभी अध्यापक व अध्यापिकाएं मौजूद रहे।