
Noida News : नोएडा प्राधिकरण में हुआ मुआवजा घोटाला नोएडा से लेकर लखनऊ और सुप्रीम कोर्ट तक चर्चा का विषय बना हुआ है। नोएडा प्राधिकरण के काम काज पर निगाह रखने वाले जानकारों का दावा है कि नोएडा के मुआवजा घोटाले की ठीक-ठीक जांच हो गई तो यह घोटाला एक हजार करोड़ रूपये से भी बड़ा घोटाला साबित होगा। इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार की SIT सोमवार से नोएडा प्राधिकरण की फाइलों को खंगाल रही है।
आपको बता दें कि नोएडा प्राधिकरण में हुए मुआवजा घोटाले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट मेंं चल रही है। मजेदार बात यह है कि यह सुनवाई नोएडा के मुआवजा घोटाले में दोषी करार दिए गए नोएडा प्राधिकरण के विधि अधिकारी (लीगल सहायक) वीरेन्द्र सिंह नागर की एक अपील पर चल रही है। वीरेन्द्र नागर अपने विरूद्ध की गई कार्यवाही को गलत बताते हुए सुप्रीम कोर्ट गए थे। सुप्रीम कोर्ट ने पूरे मामले को बेहद गंभीर मानते हुए पूरे प्रकरण की बारीकी से जांच के आदेश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर उत्तर प्रदेश सरकार ने नोएडा के मुआवजा घोटाले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है।
आपको बता दें क नोएडा में हुए मुआवजा घोटाले की जांच के लिए SITबनाई गई है। इस एसआईटी का नेतृत्व उत्तर प्रदेश राजस्व बोर्ड के चेयरमैन हेमंत राव को सौंपा गया है। उत्तर प्रदेश के वरिष्ठ आईएएस अफसर हेमंत राव ही पूरी एसआईटी की टीम के प्रमुख हैं। उनके साथ मेरठ मंडल की कमिश्नर सेल्वा कुमारी जे तथा नोएडा (गौतमबुद्धनगर) के डीएम..... मनीष कुमार वर्मा को एसआईटी टीम में शामिल किया गया है। एसआईटी की टीम ने सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के दफ्तर में पहुंचकर जांच शुरू कर दी है। यह जांच अगले दो दिन तक और चलेगी। उसके बाद एक विस्तृत रिपोर्ट बनाकर एसआईटी सुप्रीम कोर्ट के सामने अपनी रिपोर्ट पेश करने वाली है।
एसआईटी की नोएडा के मुआवजा घोटाले की जो जांच सौंपी गयी है वह घोटाला प्रथम दृष्टया 100 करोड़ रूपए का बताया जा रहा है। नोएडा प्राधिकरण के कामकाज को समझने वालों का दावा है कि यदि पूरे मामले की ठीक से जांच हो गयी तो यह मामला एक हजार करोड़ रूपए से भी अधिक के घोटाले का मामला है। सूत्रों की मानें तो एसआईटी ने वर्ष-2002 से अब तक बांटे गए मुआवजे की फाइलें तलब कर ली हैं। कुछ जानकारों का यह भी कहना है कि घोटाले में शामिल कुछ बड़े-बड़े अफसरों को बचाने के लिए जांच केवल खानापूर्ति करके खत्म की जा सकती है। फिर सुप्रीम कोर्ट के अगले कदम से तय होगा कि असली घोटालेबाज जांच के दायरे में लाए जाएंगे अथवा केवल जांच की खानापूर्ति करके सुप्रीम कोर्ट को संतुष्ट कर दिया जाएगा।
नोएडा क्षेत्र में हुए मुआवजा घोटाले की जांच में दो दर्जन से अधिक गांवों की जमीन के अधिग्रहण की जांच की जानी है। जिन गांवों में मुआवजा घोटाला होने की बात सामने आई है उनमें बादौली बांगर, बादौली खादर, सुथियाना, कुंडली बांगर, छिजारसी, रोहिल्लापुर, सुल्तानपुर, याकूबपुर, बेगमपुर, छपरौली बांगर, सदरपुर, लखनावली, बहलोलपुर, चोटपुर, नगली-नगला, सलारपुर, हल्दौनी, झटटा, शाहपुर-गोवर्धनपुर खादर, गुलावली, रायपुर खादर, छलेरा बांगर, गेझा तिलपताबाद, गढ़ी चौखंडी, पर्थला-खंजरपुर, नलगढ़ा, शहदरा, सोरखा-जाहिदाबाद, असगरपुर जागीर आदि गांव शामिल हैं।