
Noida News नोएडा । हाल ही में बारिश के दौरान शहर में जलभराव को लेकर सिंचाई विभाग (Irrigation Department) तथा नोएडा प्राधिकरण के बीच टकराव बढ़ गया है। सिंचाई विभाग अब नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) के खिलाफ खुलकर उतर आया है। अब दोनों विभागों के बीच तलवारें खिंच गई है। शासन को उत्तर प्रदेश सिंचाई विभाग ने पूरे प्रकरण की रिपोर्ट उपलब्ध कराई है, इस रिपोर्ट में नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की कार्य प्रणाली पर सवालिया निशान लगा मनमानी करने का आरोप लगा दिया है।
रिपोर्ट में स्पष्ट किया गया है कि प्राधिकरण की ओर से वर्षा जल के लिए तैयार किया गया कोंडली नाले में 60 सीवर के नालों को अवैध तरीके से छोड़ा गया है। इन नालों को बंद करने के लिए पिछले दो वर्ष से दर्जनों रिमाइंडर लेटर जारी किये जा रहे हैं, लेकिन प्राधिकरण ने आज तक सुध नहीं ली। यही नहीं प्राधिकरण (Noida Authority) की ओर से सेक्टर-168 में बने एसटीपी से शोधित व बिना शोधित जल रेगुलेटर के आगे डाला जा रहा है। जो एनजीटी नियमों का खुला उल्लंघन है। इस मामले पर पिछले दो वर्ष में पांच से अधिक रिमाइंडर जारी किए गए है, लेकिन प्राधिकरण ने न तो नाले को गिरने से रोका और न ही एसटीपी पानी को छोडऩा बंद किया। रही बात यमुना बैकफ्लो की तो बैराज से जैसे ही 1 लाख 79 हजार क्यूसेक पानी पास हुआ, उसके बाद रेगुलेटर का गेट बंद कर दिया गया था, लेकिन नोएडा के अवैध नालों की वजह से बैकफ्लो हुआ, इससे नोएडा के अंदर जलभराव हुआ। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चार वर्ष से नोएडा ने कोंडली नाले की सफाई नहीं करवाई है।
विभाग ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि जल स्तर बढऩे पर कोंडली नाले पर बने रेगुलेटर के सभी गेटों को बंद किया गया। लगभग 90 घंटे तक बंद होने के बाद 15 जुलाई को दोबारा से सभी गेटों को खोल दिया गया। ताकि नोएडा शहर में जलभराव स्थिति न हो। उन्होंने रिपोर्ट में कहा कि गेटों के संचालन में दिक्कत होती तो आपातकाल की स्थिति में गेट को खोलना और बंद किया जाना संभव नहीं हो पाता।