
Noida News : यूपी के नोएडा- ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सक्रिय बिल्डरों ने अनेक लोगों के पैसे अवैध रूप से अपने पास जमा कर रखे हैं। बिल्डरों से फ्लैट लेने के इच्छुक हजारों लोग ऐसे हैं जिन्होंने बिल्डरों द्वारा घोषित योजनाओं में रजिस्ट्रेशन के नाम पर करोड़ों रूपये जमा करा रखे हैं। ऐसे ही दो फ्लैट बॉयर्स को अदालत से न्याय मिल गया है।
आवासीय योजना में पैसा लगाने वाले दो फ्लैट बॉयर्स को गौतमबुद्धनगर जिले की उपभोक्ता फोरम ने बड़ी राहत दिलवाई है। उपभोक्ता फोरम अदालत ने दो बिल्डरों को आदेश दिये हैं कि वह खरीददारों का पैसा 6 प्रतिशत ब्याज के साथ 30 दिन में वापस लौटा दें। अदालत ने बॉयर्स का मानसिक उत्पीड़न करने के आरोप में बिल्डर्स पर आर्थिक जुर्माना भी लगाया है।
गौतमबुद्धनगर जिले के जिला उपभोक्त विवाद परितोष आयोग (उपभोक्त फोरम) ने दो बिल्डरों के खिलाफ आदेश पारित किया है। पहला आदेश डिसेंट बुल्डवेल प्रा.लि. नामक बिल्डर्स के खिलाफ दिया गया है। इस मामले में आशु कुमार जैन नामक बॉयर ने बिल्डर के पास फ्लैट लेने के लिए 15 लाख रूपये जमा कराये थे। 15 लाख रूपये जमा कराने के बाद भी बिल्डर ने फ्लैट का निर्माण तक शुरू नहीं किया। पैसा वापस मांगने पर बिल्डर कंपनी ने आशु कुमार जैन को तरह-तरह के बहाने बनाकर बहकाते रहे।
Read More - नोएडा-ग्रेटर नोएडा में तेजी से फैल रहा है डेंगू का डंक, 125 तक पहुंचा मरीजों का आंकड़ादूसरा मामला ग्रेटर नोएडा टेक जोन में रहने वाले बॉयर दिनेश राणा का है। दिनेश राणा ने एक बिल्डर के पास 27 लाख रूपये जमा कराये थे किन्तु इस बिल्डर ने भी न तो फ्लैट बनाया और न ही दिनेश राणा के पैसे वापस लौटा रहा है। दोनों ही मामलों में जिला उपभोक्त अदालत ने सख्त आदेश जारी किये हैं। अदालत ने दोनों बिल्डरों को 30 दिन के अंदर दोनों उपभोक्ताओं का मूल धन 6 प्रतिशत ब्याज के साथ जोडक़र वापस लौटाने के आदेश दिए हैं। पैसा न लौटाने पर बिल्डर को सख्त कार्यवाही की चेतावनी भी दी गई है।
दोनों ही मामलों में यह अपील की गई थी कि पैसा जमा कराने के बाद फ्लैट न मिलने पर उपभोक्ताओं का घोर मानसिक उत्पीडऩ हुआ है। मानसिक उत्पीड़न की बात को स्वीकार करते हुए उपभोक्ता फोरम ने बिल्डरों पर 2-2 हजार रूपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। उपभोक्ताओं के अधिवक्ता योगेश दीक्षित ने बताया कि यह जुर्माना सांकेतिक तौर पर लगाया गया है। जिसका अर्थ यह होता है कि अदालत ने मानसिक उत्पीडऩ को सैद्धांतिक व कानूनी तौर पर मान्यता दी है। Noida News