
Noida News : पश्चिमी उत्तर प्रदेश के नोएडा, ग्रेटर नोएडा, दादरी, बुलंदशहर, लोनी, शामली व मुजफ्फरनगर में अचानक एक नारा गूंज रहा है। नारा यह है कि ''गुर्जर समाज के लाल तैने कर दिया कमाल''। इस नारे के पीछे की वजह बेहद खास है। यह वजह आपको भी जरुर जान लेनी चाहिए। हम यहां विस्तार से बता रहे हैं कि आखिर नोएडा से लेकर अमेरिका (USA) तक यह अनोखा नारा क्यों गूंज रहा है ?
दरअसल, भारत के उत्तर प्रदेश में स्थित बुलंदशहर जिले के मूल निवासी हर्षवर्धन सिंह ने अमेरिका USA में राष्ट्रपति पद की दावेदारी पेश की है। इस दावेदारी का समाचार सोशल मीडिया पर तेजी से फैला है। खुद हर्षवर्धन सिंह ने ट्विटर पर एक वीडियो पोस्ट करके अमेरिका के राष्ट्रपति पद की दावेदारी करने की घोषणा की है। इस घोषणा के बाद से ही भारत से लेकर अमेरिका USA तक हर्षवर्धन सिंह की व्यापक चर्चा हो रही है। हर्षवर्धन सिंह मूल रुप से गुर्जर समाज से आते हैं। सबसे जानते हैं कि देश व दुनिया में गुर्जर समाज का बेहद गौरवशाली इतिहास रहा है। उसी गौरव से जोड़ते हुए गुर्जर समाज के युवक हर जगह यह नारा लगा रहे हैं ''गुर्जर समाज के लाल तैने कर दिया कमाल''।
आपको बता दें कि भारतीय मूल के हर्षवर्धन सिंह ने अमेरिका USA के अगले राष्ट्रपति के तौर पर अपनी दावेदारी पेश की है। यह दावेदारी उन्होंने अमेरिका (USA) में अपनी रिपब्लिकन पार्टी के सामने रखी है। उनका दावा है कि USA के अगले चुनाव में वे पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चुनाव हरा देंगे। यह दावेदारी पेश होते ही भारत से लेकर अमेरिका तक हर्षवर्धन सिंह के नाम की ही चर्चा हो रही है। प्रिंट हो या इलेक्ट्रानिक मीडिया हो या फिर सोशल मीडिया पर इस समय हर्ष सिंह की खबरें खूब प्रकाशित व प्रसारित हो रही है।
Read More - Noida News : UP की औद्योगिक राजधानी में ”तीसरी आंख” संभालेगी सुरक्षा व्यवस्था, आपरेशन दृष्टि हुआ तेजUSA (अमेरिका) के राष्ट्रपति पद की दावेदारी करने वाले भारतीय मूल के हर्षवर्धन सिंह BJP के दिवंगत नेता चौधरी हुकुम सिंह के धेवते हैं। हर्षवर्धन सिंह मूल रुप से उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले में रहने वाले त्रिभुवन सिंह के पुत्र है। हर्षवर्धन सिंह की मां भाजपा के दिग्गज नेता रहे चौधरी हुकुम सिंह की बेटी है। हर्षवर्धन सिंह के दादा (बाबा) डा. नौनिहाल सिंह भाटी USA की प्रसिद्ध यूनिवर्सिटी कैंब्रिज में प्रोफेसर थे।
पूर्व प्रधानमंत्री स्व. श्रीमती इंदिरा गांधी के बुलावे पर वे भारत वापस आ गए थे। उन्हीं दिनों डा. नौनिहाल सिंह भाटी की मुलाकात उस वक्त कांग्रेस की राजनीति में सक्रिय स्व. चौधरी हुकुम सिंह से हुई थी। आगे चलकर वर्ष 1997 में चौधरी नौनिहाल सिंह भाटी को राज्यसभा का सांसद भी चुना गया था। नौनिहाल सिंह के पुत्र त्रिभुवन सिंह लगभग 40 वर्ष पूर्व पूरी तरह से अमेरिका में चले गए थे। हर्षवर्धन सिंह अमेरिका में कारोबार करते हैं। वें USA के न्यूजर्सी शहर में रहते हैं और अमेरिका की राजनीति में खूब सक्रिय है।
भारतीय मूल के अमेरिकी नागरिक हर्षवर्धन सिंह को उनके मित्र ''धरती पकड़'' कह कर भी चिढ़ाते हैं। असल में यह बात सब जानते हैं कि उत्तर प्रदेश के बरेली में रहने वाले एक शख्स नगर पालिका के चुनाव से लेकर अनेक बार भारत के राष्ट्रपति तक का चुनाव लड़ थे। धीरे धीरे उनका नाम धरती पकड़ गया था। हर्षवर्धन सिंह को भी उनके मित्र अमेरिकी धरती पकड़ कहकर मजाक बनाते हैं। असल में हर्षवर्धन सिंह राजनीति में हाथ आजमाते हुए अनके चुनाव हार चुके हैं।
Read More - Noida News : माफिया की करनी मुथूट बैंक को पड़ेगी भारी, बैंक में रखा सोना हो जाएगा कुर्कUSA के राष्ट्रपति पद के चुनाव की दावेदारी करने वाले हर्षवर्धन सिंह अमेरिका में अब तक 281 चुनाव हार चुके हैं। ग्राम पंचायत से लेकर लोकसभा, विधानसभा, विधान परिषद और यहां तक की राष्ट्रपति चुनाव तक में वो अपनी दावेदारी पेश कर चुके वयोवृद्ध नेता धरती पकड़ का असली नाम नागरमल बाजोरिया है। नागरमल उर्फ धरती पकड़ अब तक 281 बार चुनाव लड़ चुके हैं।
धरती पकड़ रहने वाले बिहार के है, लेकिन बहुत सारे चुनाव उन्होंने बिहार से बाहर जाकर देश के विभिन्न राज्यों में भी लड़े हैं। कह सकते हैं कि चुनाव लड़ने की उनकी आदत उन्हें कश्मीर से कन्या कुमारी तक की सैर करा चुकी है। इससे भी खास बात ये रही है कि वह अपने 281 चुनावों में से एक में भी नहीं जीते। चुनाव चाहे वार्ड स्तर का रहा हो या फिर राष्ट्रपति का। हर जगह उन्होंने पराजय का सामना किया, फिर भी उनकी चुनाव लड़ने की जिद नहीं छूटी।