
Noida News किसानों की पूरी दुनिया में अन्नदाता कहा जाता है। दुर्भाग्य से अन्नदाता के साथ हमेशा भेदभाव व अन्याय होता है। इसी भेदभाव व अन्याय के विरुद्ध नोएडा के किसानों ने एक बार फिर जोरदार मांग उठाई है। किसानों का कहना है कि नोएडा प्राधिकरण व यूपी की सरकार उनके हकों पर डाका डाल रही है।
नोएडा क्षेत्र के 82 गांवों के किसानों का आरोप है कि उनकी जमीन का अधिग्रहण करते समय नोएडा प्राधिकरण ने गलती की है। नोएडा प्राधिकरण के कर्मचारियों व अधिकारियों ने जानबूझ कर अर्जन लैंड एक्यूजेशन के दौरान जमीन के रिकार्ड में गड़बड़ी की है। अपने गांव में मौजूद आबादी की जमीन पर किसान अपनी अपनी जमीन पर रह रहे हैं।
नोएडा प्राधिकरण ने उन्हीं की जमीन पर रहने को अवैध कब्जा करार दे दिया है। नोएडा प्राधिकरण की इस गलती का किसानों को नुकसान यह हो रहा है कि उन्हें उनकी अधिग्रहित जमीन के बदले मिलने वाला आबादी का 5 प्रतिशत भूखंड नहीं मिल पा रहा है। इस प्रकार नोएडा प्राधिकरण व सरकार किसानों के हकों पर डाका डालकर उल्टे किसानों को ही चोर बना रहे हैं।
नोएडा क्षेत्र के किसानों की इस शिकायत पर नोएडा के करीब 40 गांवों में जमीन पर अतिक्रमण मामले की जांच मंगलवार से शुरू हो गई है। नोएडा प्राधिकरण के आलाधिकारी मंगलवार को बादौली बांगर पहुंचे और जांच की। इस तरह से जांच कर यह सुनिश्चित किया जाएगा कि किसान का हक न मारा जाए। नियमों के तहत पांच प्रतिशत आबादी के भूखंड उन्हें मिल सके।
Read More - नोएडा से लेकर अमेरिका तक हो रही ” गुर्जर समाज के लाल तैने कर दिया कमाल” नारे की गूंज, बेहद खास है हर्षवर्धन सिंह का अमेरिकी चुनाव में उतरनादरअसल, किसानों का नोएडा प्राधिकरण पर यह आरोप है कि जमीनों के अर्जन के दौरान प्राधिकरण से गलती हुई है। उन्होंने अपने आंकड़ों में भी गलत सूचना दर्ज की है। अब जब आबादी का मूल किसान अपने सही जमीन पर रह रहा है तो प्राधिकरण इसे अतिक्रमण मानता है। इस आधार पर किसानों को 5 प्रतिशत आबादी के भूखंड के हक से बेदखल किया जा रहा है। यह आरोप नोएडा के करीब 40 से 45 गांवों के किसान लगा रहे हैं। इसी को सुनिश्चित करने के लिए नवनियुक्त CEO लोकेश एम. के निर्देश पर प्राधिकरण की टीम ने अभियान शुरू किया है।
मंगलवार को एसीईओ प्रभाष कुमार, वर्क सर्किल 10 के वरिष्ठ प्रबंधक केवी सिंह के अलावा भूलेख और वर्क सर्किल के अन्य अधिकारी बादौली बांगर गांव पहुंचे। यहां नक्शे से मिलान कराया गया। नक्शे के आधार पर यह पाया गया कि करीब 8-9 किसानों की जमीन यहां निकल रही है। अब नियम के तहत प्राधिकरण इनके मामले में कार्रवाई करेगा। ACEO ने बताया कि किसानों की ओर से हमेशा यह मांग की जाती रही है कि आबादी विनियमितिकरण के तहत उनकी जमीनों को न अतिक्रमण का हिस्सा नहीं माना जाए। Noida News in hindi