रणछोड़ का डर और बदल गया सपा का प्रत्याशी, यूं हुआ बदलाव
Noida News
भारत
चेतना मंच
29 Nov 2025 01:30 PM
Noida News : लोकसभा चुनाव के बीच उत्तर प्रदेश की नोएडा (गौतमबुद्धनगर) सीट चर्चा का विषय बनी हुई है। नोएडा की सीट पर विपक्षी खेमे ने प्रत्याशी क्यों बदला? यह सवाल चारों तरफ पूछा जा रहा है। नोएडा (गौतमबुद्धनगर) की राजनीति को ठीक से समझने वाले विश्लेषकों का मत है कि यह बदलाव प्रत्याशी के "रणछोड़" बन जाने के खतरे के कारण किया गया है। कांग्रेस के एक पुराने नेता का दावा है कि सपा मुखिया अखिलेश यादव को जल्दी ही "रणछोड़" वाली बात समझ में आ गई तो उन्होंने समय रहते नोएडा सीट के प्रत्याशी को बदल दिया।
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क्या है "रणछोड़" वाला डर
आपको बता दें कि नोएडा (लोकसभा) सीट पर वर्ष-2014 के लोकसभा चुनाव में एक बहुत बड़ा खेला हो गया था। वर्ष-2014 के चुनाव में नोएडा सीट पर कांग्रेस ने पुराने भाजपाई रमेश चंद तोमर को टिकट दिया था। रमेश चंद तोमर नोएडा (गौतमबुद्धनगर) सीट का चुनाव बीच में ही छोडक़र भाग गए थे। उस समय रमेश चंद तोमर को "रणछोड़" कहा गया था। यहां यह तथ्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है कि उस समय डा. महेन्द्र नागर कांग्रेस के जिलाध्यक्ष थे। नोएडा सीट पर कांग्र्र्रेस प्रत्याशी के रणछोड़ बन जाने की घटना पूरी कांग्रेस पार्टी की फजीहत का बड़ा कारण बनी थी। उसके बाद वर्ष-2019 के लोकसभा चुनाव के समय भी डा. महेन्द्र नागर ही कांग्रेस पार्टी के जिलाध्यक्ष थे। डा. महेन्द्र नागर के प्रयास से अरविंद सिंह को नोएडा सीट से कांग्रेस का टिकट मिला था। अरविंद सिंह भी "रणछोड़" साबित हुआ था। नोएडा की सीट पर कांग्रेस पार्टी की दुर्गति होने की यह दूसरी घटना थी।
कहीं सपा भी ना फंस जाए ?
राजनीतिक विश्लेषकों का दावा है कि सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को नोएडा सीट पर "रणछोड़" वाली पूरी घटना याद दिलाई गई। "रणछोड़" वाली कहानी को सुनकर अखिलेश यादव को लगा कि नोएडा की सीट पर कांग्रेस की दुर्गति की ही तरहर कहीं उनकी पार्टी सपा की भी दुर्गति ना हो जाए। इस कारण से सपा को नोएडा से अपने घोषित प्रत्याशी को बदलने में ही समझदारी लगी और प्रत्याशी बदल गया। कुछ राजनीतिक विश्लेषक नोएडा सीट पर टिकट बदलने के पीछे प्रत्याशी की आर्थिक ताकत को भी एक कारण बता रहे हैं। "रणछोड़" वाली कहानी नोएडा में खूब चर्चा का विषय है।