
Noida News : नोएडा। नोएडा-ग्रेटर नोएडा में लाखों फ्लैट बॉयर्स के साथ ठगी करने वाले बिल्डर्स के बुरे दिन आने वाले हैं। नोएडा प्राधिकरण ने निर्देश जारी कर दिए हैं कि जो बिल्डर बैंक में अपना एस्क्रो एकाउंट (Escrow Account) नहीं खोलेगा उसकी आरसी जारी कर दी जाएगी। जिन बिल्डरों का रिकॉर्ड खराब है ऐसे 15 बिल्डरों को एस्क्रो एकाउंट (Escrow Account) खोलने के निर्देश जारी कर दिए गए हैं।
आपको बता दें कि पिछले वर्षों में उत्तर प्रदेश में रही समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) व बहुजन समाज पार्टी (Bahujan samaj party) की सरकारों में नोएडा व ग्रेटर नोएडा क्षेत्र में सरकारी जमीनों की खूब बंदरबांट की गयी थी। बिल्डरों के नाम पर ऐसे-ऐसे लोगों को जमीनें आवंटित कर दी गयी थीं जिनका बिल्डर के व्यवसाय से कोई भी लेना-देना नहीं था। इन बिल्डरों ने बड़ा-बड़ा प्रचार तंत्र चलाकर देश भर से फ्लैट लेने के इच्छुक लाखों लोगों से करोड़ों रूपए ठग लिए थे। रजिस्ट्रेशन के नाम पर जमा कराए गए रूपए दूसरी जगह डायवर्ट करके बिल्डर या तो फरार हो गए या फिर उन्होंने अपने आपको दिवालिया घोषित करा लिया। इससे देश भर के लाखों फ्लैट बॉयर्स की फ्लैट खरीदने की तमन्ना केवल तमन्ना ही रह गई। पैसे जमा करने के बाद भी उन्हें ना तो फ्लैट ही मिले और ना ही पैसा वापस मिला। इस कारण उप्र सरकार, रेरा व प्राधिकरणों में एक नई व्यवस्था बनाई है। इस व्यवस्था में एस्क्रो एकाउंट खोला जाना अनिवार्य है। जिन बिल्डर परियोजनाओं के काम वर्तमान में चल रहे हैं उन बिल्डरों को एस्क्रो एकाउंट खोलकर घर खरीददारों का पूरा पैसा उस एकाउंट में जमा रखना पड़ेगा ताकि उस पैसे को कहीं दूसरी जगह डायवर्ट ना किया जा सके।
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी डा. लोकेश एम ने बताया कि शहर के उन सभी बिल्डरों को एस्क्रो एकाउंट खोलना अनिवार्य कर दिया गया है जिनके प्रोजेक्ट वर्तमान में चल रहे हैं। ऐसे 15 बिल्डरों को चिन्हित किया गया है। इन सभी बिल्डरों को तुरंत एस्क्रो एकाउंट खोलने के निर्देश दिए गए हैं। अभी तक केवल 15 बिल्डरों ने अपने खाते खोले हैं। जिन बिल्डरों ने एस्क्रो एकाउंट नहीं खोले हैं उनको अंतिम चेतावनी देते हुए कहा गया है कि यदि वे एस्क्रो एकाउंट नहीं खोलेंगे तो उनके खिलाफ आरसी यानि रिकवरी सर्टीफिकेट जारी कर दिया जाएगा।
आपको बता दें कि एस्क्रो एकाउंट एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें खाताधारक और बैंक के अलावा एक तीसरा पक्ष शामिल रहता है। उस तीसरे पक्ष के साथ बाकायदा एक एमओयू साइन किया जाता है उस एमओयू के जरिए यह व्यवस्था बनाई जाती है कि तीसरे पक्ष की अनुमति के बिना उस बैंक खाते से कोई भी लेन-देन नहीं होगा। नोएडा प्राधिकरण ने भी फ्लैट बॉयर्स के साथ ठगी रोकने के लिए इसी प्रकार के खाते की व्यवस्था की है। इस व्यवस्था के तहत बिल्डर और बैंक के अलावा खुद नोएडा प्राधिकरण खाते में एक पार्टी होगा। नोएडा प्राधिकरण की अनुमति के बिना संबंधित खाते से एक रूपया भी इधर से उधर नहीं किया जा सकता। ऐसा करने पर संबंधित बिल्डर के विरूद्ध रिकवरी सटीर्फिकेट यानि आरसी जारी कर दिया जाएगा।
यहां आपको यह भी जान लेना जरूरी है कि रिकवरी सर्टीफिकेट अथवा आरसी किसे कहते हैं। आपको बता दें कि सरकारी बकाये का भुगतान न करने पर संबंधित जिलाधिकारी अपने अधीनस्थ एसडीएम के माध्यम से बकाया राशि वसूल करता है। चाहे यह राशि किसी भी सरकारी विभाग की ना हो। इस पैसे को वसूल करने के बदले जिला प्रशासन वसूली जाने वाली राशि से कुछ खर्च अपने खाते में भी रखता है। आरसी पूरी तरह से एक कानूनी प्रक्रिया है जिसका कानूनी व्यवस्था में पूरा प्रावधान किया गया है। आरसी जारी होने पर भी जो देनदार सरकार का पैसा जमा नहीं करता है। जिला प्रशासन उसके खाते, संपत्ति, घर व मकान को सील कर देता है। इस पर भी वसूली न होने पर संबंधित बकायेदार को संबंधित तहसील में बंद कर दिया जाता है। यह एक जटिल प्रक्रिया है। कुछ बकायेदार प्रशासन के स्टाफ, पटवारी, तहसीलदार अथवा एसडीएम से मिलकर आरसी की कार्रवाही को दबवाते रहते हैं। Noida News
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