
Noida News (अंजना भागी) : 26 अगस्त, (शनिवार) की दोपहर बी. एस. फाउंडेशन की चेयरपर्सन डॉक्टर बबीता शर्मा ने सेक्टर 26 क्लब में धूमधाम से हरियाली तीज का त्योहार मनाया। नोएडा, दिल्ली से आई उनकी बहुत सी संगीत की साथियों ने भाग लिया। कार्यक्रम की विशेषता थी सब ही महिलाएं बहुत ही सुन्दर परिधानों में सजधज कर आईं थीं। एक तरफ मेहंदी लग रही थी, दूसरी तरफ खूबसूरत गीतों का सिलसिला। कोई किसी को गाने को नहीं कह रहा था। सब ही स्वयं बढ़ चढ़ कर हिस्सा ले रहीं थीं। मधुर संगीत पर महिलाएँ नृत्य के साथ संगत करती।
महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विमला बाथम यहाँ पर मुख्य अतिथि थीं। डा. बबीता का मानना है कि एक अच्छा गायक होना आश्चर्यजनक है लेकिन यह निश्चित रूप से अपनी ही बहुत सी चुनौतियों के साथ आता है। उन्हें गायन की कला, विज्ञान और शिक्षण से जुड़ी हर चीज़ से प्यार है। वे अपनी सभी साथी गायिकाओं से कहती हैं कि यदि आप एक प्रभावी और स्वस्थ गायक बनना चाहते हैं तो तो हर दिन आप को अभ्यास के लिए स्वयं को तैयार रखना होगा। यदि आपकी आवाज़ अच्छी है तभी आप अच्छे गायक होंगे, यह जरूरी नहीं है लेकिन यदि आप अच्छी आवाज के साथ नित्य अभ्यास करेंगे तब आपके अच्छे गायक होने पर कोई शक भी नहीं है। उन्होंने सभी मित्र गायिकाओं को ये ही समझाती हैं कि अच्छा गायक बनना है तो फिर पेशेवर गायक की तरह नियम सीखें, वो ही आपको ताकि आप एक कलाकार की तरह स्वरों को उठाना तोड़ना सिखाएगा।
आपको बता दें कि पारिवारिक जिम्मेदारी निभाने के साथ साथ डा. बबीता समाज सेवा के लिए भी समर्पित हैं। गौशाला जाकर गायों को भोजन करवाना इन्हें बहुत पसंद है। उनका मानना है कि सोशल वर्कर होना कोई आसान काम नहीं है। कभी-कभी तो वह सुबह जल्दी उठ जाती हैं और पूरा दिन इन्हें खाने पीने का भी होश नहीं रहता। उनका कहना है कि इतना थक भी जाते हैं कि फिर बोलना भी नहीं चाहती हैं लेकिन क्योंकि उनके दिल को समाजसेवा से ही तसल्ली मिलती है इसलिए यह इनका पैशन बन गया है। इनकी जिंदगी महिलाओं के साथ ही जुड़ती है इसलिए उन्हें संगीत ही नहीं उनको और भी हर तरह से समाज में ऊंचे दर्जे पर लाने की कोशिश करती हैं। कभी-कभी जो उनके छात्र या दोस्त जिसकी आवाज अच्छी वे इनसे म्यूजिक सीखना चाहते हैं और इनके घर के लोग इस बात का विरोध करते हैं कि घर के सभी काम छोड़ दिया तो म्यूजिक में ही व्यस्त रहेगा, तब यह उनके परिवारों को भी समझाकर संगीत के इच्छुक व्यक्ति को संगीत पूरी तरह से सीखने का मौका देती हैं। आज ऐसी बहुत सी महिलाएं तथा पुरुष है जो गाना या क्लासिकल म्यूजिक सीख कर अपनी जीविका गायन से ही चला रहे हैं। उनका मानना है कि संगीत एक ऐसी विधा है जिसका शौक रखने से इंसान बहुत सारे स्ट्रेस या जिंदगी के दुख दर्दों को भूल जाता है। यह बहुत कठिन है कि आज के समय में इस कठिन जिंदगी में भी संगीत का शौक बनाए रखा जा सके।
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उनका मानना है कि यदि आप समाजसेवा को अपना शौक बना लेंगे तो आप कभी भी बोर नहीं होंगे। न ही आपको जिंदगी में फ्रस्ट्रेशन होगी। क्योंकि आपके चारों तरफ इतने चैलेंज होंगे कि इन सबके लिए आपके पास समय ही नहीं बचेगा। समाजसेवा का मतलब लोगों की जिंदगी में दस्तक देना ही तो है। अब ऐसे में जिसका फायदा होगा वह तो आशीर्वाद देगा। यदि किसी एक आदमी के सुधर जाने से दूसरे का मकसद पूरा नहीं होगा तो वह तो आपको गाली भी देगा समाज सेवा में कभी-कभी इंसान हंसता भी है लेकिन कभी-कभी दुखी होकर रोता भी है यदि आप इन सभी चैलेंज के लिए तैयार हैं तभी आप एक अच्छे समाज सेवक बन सकते हैं। बबीता जी सभी सीखने वालों को एक ही बात कहती हैं। आप स्ट्रांग हैं । आप कठिन मेहनत कर सकते हैं यदि हर रोज रियाज करें तो स्टेज आपसे अधिक उर नहीं । उनकी तरफ ना देखें जो मेहनत ना करने के कारण सीखना छोड़ देते हैं क्योंकि यदि आपके अंदर जिज्ञासा है और म्यूजिक सिखने के लिए म्यूजिक से प्रेम तो आप सीख ही जाएंगे यही कारण है जो उनसे जुड़ता है फिर अलग नहीं हो पाता।
भजन गायिकी में तो आपका जवाब ही नहीं विशेषकर रामायण। हनुमान जी की ये अनन्य भगत हैं। इन्होंने बहुत से लोगों को संगीत सीखा उन्हें जीवन जीने का जरिया भी दिया है इनके साथ इनसे सीख उससे अपना जीवन यापन लायक पैसा भी कमाने लगते हैं । इस प्रकार के समाज सेवी दुनिया में कम ही मिलते हैं। यही कारण है जब भी बबीता जी कोई भी कार्यक्रम रखती हैं तो इनके मिलने वाले या जो इनके सानिध्य में संगीत सीख कर चले गए वह कितनी भी दूर क्यों ना हो चुंबक की तरह उनके व्यक्तित्व के कारण खींचे चले आते हैं उन्हें कोई नहीं कहता कि आप यह गीत गाएँ या आप इस गाने पर डांस कीजिए इनके सीखे हुए जो अब इनके दोस्त हैं। क्योंकि ये सभी अपने सहयोगियों को मित्र कहती हैं एक दूसरे के लिए खुद ही गाना चुनते हैं एक गाता है तो दुसरे उस पर डांस करते हैं यही कारण है कि बी एस फाउंडेशन जो कि एक घर की तरह शुरु हुआ था आज एक बहुत बड़ा संगीत प्रेमियों का समाज ही बन गया है।
Noida Newsयदि इनसे सिखाने वाले कभी फीस की बात करते हैं तो ये कहती हैं कि संगीत सिखाने वाले और समाज सेवा करने वाले एक सिपाही की तरह होते हैं जो हर रोज जिंदगी की जंग में लोगों को उभारने के लिए आते हैं इसलिए संगीत सेवा ही इनके फीस है। वें कहती हैं कि समाज सेवा से जो आंतरिक सुख मिलता है उसका भी कोई मूल्य होता है क्या ? Noida News