बड़ी खबर : नोएडा में रोजाना हो रही है लाखों गैलन गंगाजल की बर्बादी!
Noida News
नोएडा
RP Raghuvanshi
01 Dec 2025 08:19 PM
Noida News: नोएडा (चेतना मंच)। नोएडा प्राधिकरण का रोजाना हजारों गैलन गंगाजल वाहनों खासकर कारों की धुलाई में बर्बाद हो रहा है। जबकि एसटीपी प्लांट से शोधित पानी का उपयोग वाहनों की धुलाई के लिए नहीं किया जा रहा है। इसके बावजूद भी नोएडा प्राधिकरण ने अभी तक इस समस्या का समाधान करने के लिए कोई वैकल्पिक इंतजाम नहीं किया है।
RTI के जवाब में नोएडा प्राधिकरण ने भी स्वीकारा यह सच
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नोएडा प्राधिकरण की पूर्व सीईओ रितु माहेश्वरी ने एसटीपी प्लांट पर चार गाड़ी धुलाई केंद्र स्थापित करने के निर्देश दिए थे। लेकिन अभी तक वह निर्देश फाइलों में ही धूल फांक रहे हैं। बता दे की नोएडा में सेक्टर-1, 2, 3, 4, 5, 8, 9 तथा 10 में कई प्रतिष्ठित वाहनों के शोरूम तथा सर्विस सेंटर है। इसके अलावा सैकड़ो की संख्या में जगह-जगह निजी सर्विस सेंटर बने हुए हैं। इन सभी स्थानों पर रोजाना हजारों वाहनों की धुलाई हो रही है। इनमें से अधिकांश सर्विस स्टेशनों में गंगाजल के पानी का उपयोग किया जा रहा है वहीं कुछ लोगों ने अपने डीप बोरिंग में लगा रखी है।
कारों की धुलाई में बर्बाद हो रहा गंगाजल
रोजाना लाखों गैलन गंगाजल वाहनों की धुलाई में बर्बाद किया जा रहा है। इस संबंध में स्वयं नोएडा प्राधिकरण ने भी स्वीकार किया है कि एसटीपी प्लांट से शोधित जल का उपयोग वाहनों को धुलाई तथा सर्विस केंद्र में नहीं हो रहा है। हरौला गांव के निवासी आरटीआई एक्टिविस्ट राहुल शर्मा ने इस बाबत नोएडा प्राधिकरण में एक आरटीआई डाली थी। उस आरटीआई के जवाब में जल एवं वाह्य वा-सं. विभाग के वरिष्ठ प्रबंधक देवेंद्र निगम ने 18 सितंबर को लिखित में जवाब भेजा है। जिसमें कहा गया है कि नोएडा में स्थापित एसटीपी प्लांट से संशोधित जल प्राधिकरण के उद्यान विभाग द्वारा निर्मित पार्क एवं ग्रीन बेल्टों में निशुल्क उपलब्ध कराया जा रहा है।
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बर्बादी को रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने अभी तक कोई वैकल्पिक उपाय नहीं किया
शोधित जल पांच रुपए प्रति किलो लीटर की दर से बिल्डर तथा अन्य निर्माण करने वाली संस्थाओं को बिक्री किया जा रहा है। गाड़ी धुलाई हेतु किसी एजेंसी द्वारा शोधित जल का क्रय नहीं किया जा रहा है। ताज्जुब इस बात का है कि रोजाना लाखों गैलन गंगाजल की बर्बादी को रोकने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने अभी तक इसका कोई वैकल्पिक उपाय नहीं निकाला है।
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