Noida Child PGI के डाक्टर और नर्सों ने "सिवन" को दी नई जिंदगी, बुरी हालत में मिला था नवजात,कुतर रहे थे चूहे
Noida News Live
भारत
चेतना मंच
25 Nov 2025 06:51 AM
Noida News Live : नोएडा। अवैध नवजात बच्चों को फेंकने की घटनाएं एक बार फिर दिखाई देने लगी है। अभी हाल ही में 15 सितंबर को नोएडा में एक नाले के किनारे 5 या 6 दिन का नवजात बच्चा पाया गया जिसे चूहों ने जगह-जगह से कुतर दिया था। बच्चे के रोने की आवाज सुनकर लोगों ने पुलिस को इसकी सूचना दी। पुलिस ने बच्चे को पहले नोएडा के ही कैलाश अस्पताल में भर्ती करवाया, जिसकी सूचना चाइल्ड लाइन की टीम को मिली और टीम ने नोएडा के चाइल्ड पीजीआई में उसे भर्ती करवा दिया जहां उसका इलाज चल रहा है। इलाज के बाद अब बच्चा स्वस्थ हो रहा है और इलाज कर रही नर्सों की गोद में खेल रहा है। अस्पताल के डाक्टर और नर्सों ने इस बच्चे का नाम सिवन रखा है। एनआईसीयू के स्टाफ डाक्टर अरूण का कहना है कि इस बच्चे का कोई नहीं है, जिसके कारण हम इमोशनल अटैचमेंट महसूस कर रहे हैं। इस बच्चे का नाम भी इलाज के दौरान डाक्टर और नर्सों ने ही सिवन रखा है।
अवैध बच्चों को फेंकने की घटनाएं बढ़ी
इन दिनों अवैध नवजात बच्चों को लावारिस हालत में छोड़ने की घटनाएं तेजी से बढ रही हैं। इसी क्रम में नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो के मुताबिक 2021 में सिवन की तरह 1577 नवजात लावारिस छोड़े गए थे। इनमें सबसे ज्यादा 222 बच्चे मध्यप्रदेश में थे। शहरों के लिहाज से देखें तो दिल्ली टॉप पर है। यहां 94 लावारिस मिले थे। इसके बाद पुणेए अहमदाबादए बेंगलुरु और सूरत आते हैं। समग्र रूप से देखने पर वर्ष 2015 से 2020 तक 6459 नवजात लावारिस मिले थे। इनमें सबसे ज्यादा महाराष्ट्र में 1184 मध्यप्रदेश में 1168 और राजस्थान में 814 थे।
इसरो के चीफ के नाम पर रखा गया "सिवन" नाम
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जब यह बच्चा लावारिस हालत में पाया गया और इसे अस्पताल लाया गया उस समय चंद्रयान 3 लांच हुआ था। बच्चे का नाम इलाज कर रहे डाक्टर सुधीर ने इसरो चीफ की याद में सिवन रख दिया। वैसे इस बच्चे का प्रारम्भ में चाइल्ड पीजीआई के स्टाफ ने तीन अलग अलग नाम सिवन, साहिल और लड्डू गोपाल रखा था। बच्चे की साफ सफाई करने वाली कृष्णा को बच्चे में लड्डू गोपाल की छवि दिखाई दी तो उन्होंने यह नाम रख दिया।
बच्चों को फेंकने की घटनाएं बढ़ रहीं
अवैध बच्चों को लावारिस हालत में फेंकने की घटनाएं काफी देखने को मिल रही हैं। सिवन का इलाज कर रही चाइल्ड पीजीआई की डाक्टर रूचि राय का कहना है कि मैं पिछले 7 साल में ऐसे करीब 14..15 बच्चों का इलाज कर चुकी हूं, जिन्हें मरने के लिए लावारिस छोड़ दिया गया था। हालांकि सभी बच्चे इलाज के बाद स्वस्थ होकर ही यहां से गये हैं। उम्मीद है कि सिवन भी जल्द ही स्वस्थ हो जाएगा। डाक्टर राय का कहना है कि सिवन को तो जन्म के एक सप्ताह के अंदर छोड़ा गया था, कुछ बच्चों को तो जन्म के एक घंटे के अंदर ही लावारिस छोड़ दिया गया था, और उनकी हालत भी काफी चिंताजनक थी।
लावारिस बच्चों को लिया जाता है गोद
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सिवन भी जब आया तो उसकी हालत काफी चिंताजनक थी, चूहों ने जगह जगह कुतर दिया था। सिवन गौतमबुद्ध नगर जिले में पिछले दो साल में मिला 19वां बच्चा है। 16 बच्चों को स्वस्थ होने के बाद गोद दिया जा चुका है। दो बच्चों का प्रोसेस चल रहा है। सिवन का वीडियो सोशल मीडिया पर आते ही उसे गोद लेने वाले कई लोग आने लगे हैं। मैंने उन सभी को बता दिया है कि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास जाकर वहीं से बच्चों का एडॉप्नश हो सकता है। चाइल्ड वेलफेयर कमेटी गौतमबुद्ध नगर के चेयरमैन डॉक्टर केसी विरमानी बताते हैं कि गोद लेने वालों को सबसे पहले एडॉप्नश सिसोर्स अथॉरिटी की वेबसाइट पर फार्म भरना होगा। मेरे पास प्रतिदिन 10 से 12 लोगों का फोन आता है, कुछ लोग मिलने भी आते हैं। हालांकि चाइल्ड वेलफेयर कमेटी के पास आने वाले सारे बच्चे नवजात ही नहीं होते हैं, कुछ बच्चे मां बाप से बिछड़ने के बाद भी आते हैं। कुछ रेप पीड़िताओं के भी बच्चे होते हैं जिन्हें हमें दिया जाता है। डाक्टर विरमानी का कहना है कि जहां तक सिवन को गोद लेने का सवाल है तो सिवन को तीन साल बाद ही गोद लिया जा सकता है। अभी इलाज चल रहा है। अस्पताल हमें लिखित में बच्चे के सेहतमंद होने का डॉक्यूमेंट दे देगा, उसके बाद उसे शिशु गृह में लाया जाएगा, उसके बाद ही एडॉप्नश की प्रोसेस शुरू होती है। बच्चा कानूनी प्रक्रिया के द्वारा ही गोद दिया जाता है। पहले यह जूवेनाइल कोर्ट से दिया जाता था अब कानून बदलने के बाद डीएम प्रोसेस के बाद इच्छुक दम्पति को बच्चा गोद देने की प्रक्रिया के बाद उसे सौंप देता है।
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