
Noida News : यूपी के सबसे अमीर प्राधिकरण में से एक नोएडा प्राधिकरण सरकार का पैसा बचाने में भी टॉप पर है। आपको यह जानकार हैरानी होगी कि सरकार का पैसा बचाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने पिछले आठ सालों में नोएडा प्राधिकरण में कोई नई भर्ती नहीं निकाली है। प्राधिकरण के इस फैसले ने बड़ी संख्या में क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं के अरमानों पर पानी फेर रखा रखा है।
आपको बता दें कि नोएडा के जाने माने आरटीआई एक्टिविस्ट व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता रंजन तोमर की एक आरटीआई के जवाब में खुद प्राधिकरण ने अपनी इस बड़ी नाकामी का खुलासा कर दिया है। अधिवक्ता रंजन तोमर ने नोएडा प्राधिकरण में एक आरटीआई दाखिल कर यह पूछा था कि नोएडा प्राधिकरण द्वारा खुलेतौर पर चयन कर नौकरियां कितनी निकाली गई हैं और कितने लोगों का चयन हुआ है। इसके जवाब में प्राधिकरण ने अपनी बड़ी विफलता का खुलासा खुद ही कर दिया।
आरटीआई के जवाब में खुलासा हुआ है कि वर्ष 2015 में नोएडा में नोएडा प्राधिकरण में समूह ख, ग, घ के लिए 254 खाली पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन निकाला गया था, लेकिन प्राधिकरण में संविदाकार के माध्यम से कार्यरत श्रमिकों द्वारा इन खाली पदों पर उनकी सेवा को नियमित करने तथा चयन प्रक्रिया को निरस्त करने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट में वाद दाखिल किया गया था। हाईकोर्ट ने इस मामले में स्थगन आदेश दिया, जिसके बाद भर्ती प्रक्रिया को नोएडा प्राधिकरण की 194वीं बोर्ड बैठक में 26.4.2018 में भर्ती प्रक्रिया को निरस्त कर दिया गया है। 2015 के बाद से प्राधिकरण में चयन प्रक्रिया के आधार पर कोई नियुक्ति नहीं की गई है।
आरटीआई दाखिल करने वाले अधिवक्ता रंजन तोमर ने नोएडा प्राधिकरण के इस जवाब पर हैरानी जताई है। उन्होंने कहा कि बड़ी संख्या में क्षेत्र के किसानों ने अपनी जमीन नोएडा के विकास के लिए नोएडा प्राधिकरण को दी है। जिसके कारण ग्रामीणों के होनहार बच्चे आज भी बेरोजगार हैं, लेकिन नोएडा प्राधिकरण खुनी चयन प्रक्रिया के जरिए नौकरियां नहीं निकाल रहा है। उन्होंने कहा कि प्राधिकरण किसी योजना के तहत इस पर काम कर रहा है और वह नहीं चाहता कि नई चयन प्रक्रिया आए। उन्होंने अपने संगठन नोवरा के माध्यम से मांग की है कि प्राधिकरण की लिखित नीतियों के अनुसार कुछ प्रतिशत नौकरी नोएडा के उन किसान पुत्रों को दी जाए जिन्होंने नोएडा प्राधिकरण को अपनी जमीन कौडियों के दाम दी है।
सामाजिक संगठन नोवरा के उपाध्यक्ष अजय चौहान ने बताया कि प्राधिकरण की इस बड़ी लापरवाही की शिकायत वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ तक पहुंचाएंगे तथा स्थानीय सांसद व विधायकों के सामने भी इस मुद्दे को रखकर नोएडा प्राधिकरण में खुली चयन प्रक्रिया फिर से शुरू करने की मांग की जाएगी।