नोएडा प्राधिकरण बनाम टोल कंपनी, संपत्तियों को लेकर शुरू हुआ नया विवाद
भारत
चेतना मंच
21 Jun 2025 05:35 PM
Noida News : दिल्ली-नोएडा डायरेक्ट फ्लाईवे (DND) को लेकर नोएडा अथॉरिटी और नोएडा टोल ब्रिज कंपनी लिमिटेड (NTBCL) एक बार फिर आमने-सामने आ गए हैं। अब मुद्दा टोल नहीं, बल्कि पूरे DND प्रोजेक्ट की संपत्तियों का है। नोएडा अथॉरिटी ने 13 जून 2025 को NTBCL को एक पत्र भेजकर सुप्रीम कोर्ट के आदेश और 1997 के रियायती समझौते का हवाला देते हुए मांग की कि फ्लाईवे, उससे जुड़ी जमीन और अन्य संपत्तियां अथॉरिटी को लौटाई जाएं। जवाब में NTBCL ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया और कहा कि वह कानूनी कार्रवाई की तैयारी में है।
क्या कहती है नोएडा प्राधिकरण?
नोएडा अथॉरिटी का कहना है कि, सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट रूप से टोल वसूली पर रोक लगाई है। 330 एकड़ जमीन, फ्लाईवे ढांचा और प्रोजेक्ट से जुड़ी अन्य संपत्तियां अब अथॉरिटी की होनी चाहिए। कंपनी ने अपनी लागत और मुनाफा पहले ही वसूल लिया है इसलिए अब फ्लाईवे पर कोई अधिकार नहीं बचता।
NTBCL का पक्ष क्या है?
कंपनी ने कहा है कि समझौता साल 2031 तक वैध है, इसलिए उसे रखरखाव का अधिकार बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने केवल टोल पर रोक लगाई, पूरी परियोजना को वापस देने जैसा कोई आदेश नहीं दिया। इसके अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखा, लेकिन समझौते को रद्द नहीं किया।
कहां से शुरू हुआ पूरा विवाद
साल 2012 में नोएडा की रेजिडेंट्स वेलफेयर एसोसिएशन ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर DND टोल को अनुचित बताया था। 2016 में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने टोल वसूली पर रोक लगा दी। इसके खिलाफ NTBCL सुप्रीम कोर्ट पहुंची, लेकिन 2024 और फिर 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट के फैसले को सही ठहराया। अब विवाद DND से जुड़ी संपत्तियों की 'मालिकियत' को लेकर है।
आम जनता को क्या फायदा हुआ?
अब DND फ्लाईवे टोल-मुक्त है, जिससे लाखों यात्रियों को रोज़ राहत मिल रही है। पहले DND इस्तेमाल करने पर 8 से 28 रुपये तक चुकाने पड़ते थे। अब यात्रा मुफ़्त है और यह सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सीधा असर है। इस विवाद का असर NTBCL के शेयरों पर भी साफ नजर आया। शुक्रवार को कंपनी का शेयर 2.05% गिरकर 3.82 रुपये पर बंद हुआ। 52 हफ्ते में यह 23.97 रुपये तक गया था लेकिन अब गिरावट के दौर में है।
फिलहाल, यह कानूनी लड़ाई एक बार फिर से DND फ्लाईवे को सुर्खियों में ला चुकी है। देखना होगा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश की व्याख्या किस तरह से की जाती है—और क्या नोएडा अथॉरिटी को संपत्तियां मिलती हैं या मामला एक और लंबी कानूनी लड़ाई में बदलता है।