
Noida News (चेतना मंच)। वृक्ष कबहुुं न फल भखैं । नदी न संचय नीर, परमारथ के कारणे, साधु धरा शरीर।। प्रख्यात सूफी संत कबीरदास के यह दोहे ऐसे मनुष्यों पर सटीक बैठते हैं जिन्हें देखकर लगता है कि भगवान ने उनको इस पृथ्वी पर बेजुबानों तथा बेसहारा को सहारा देने के लिए भेजा है। मोह, माया तथा भौतिक सुखों के पीछे इस भागती-दौड़ती दुनिया में भला जिसके पास वक्त व चाह है जो दूसरों के लिए यानी परमार्थ के कार्य करें। लेकिन अभी भी चंद ऐसे लोग हैं जो परमार्थ का कार्य कर रहे हैं।
नोएडा के चौड़ा रघुनाथपुर सेक्टर-22 गांव के निवासी समाजसेवी पंडित कालीदास शर्मा ऐसे ही चंद लोगों में से एक हैं जो काफी समय से नि:स्वार्थ भाव से पशु, पक्षियों, कुत्तों जैसे बेजुबानों तथा बेसहारों की सेवा कर रहे हैं।
सर्दी, गर्मी या बरसात हो वे रोजाना सड़कों पर घूमते आवारा पशुओं को चारा तथा हरी सब्जी व अन्य खाद्य सामग्री खिलाते हैं। वहीं रोजाना पार्कों पर जाकर कबूतरों तथा अन्य पक्षियों को दाना डालते हैं तथा उनके पीने के पानी की व्यवस्था करते हैं। उन्होंने सेक्टर-12 के एन ब्लॉक मार्केट में मवेशी के पीने के लिए एक टैंक भी बनवा दिया जिसे वे सुबह शाम स्वयं साफ करते हैं तथा ताजा पानी भरते हैं।
इसी तरह वे आवारा कुत्तों को खाना खिलाने, उनकी देखरेख तथा उनके इलाज के लिए हमेशा लगे रहते हैं। अपने पैसे से वे बीमार व घायल कुत्तों के लिए दवाईयां खरीदकर उन्हें लगाते हैं। उनका जानवरों के प्रति प्रेम का यह सिलसिला पिछले कई वर्षों से चल रहा है।उनका कहना है कि अपने लिये तो दुनिया जीती है, लेकिन दूसरों की सेवा करो तो इससे न दूसरों खासकर बेजुबानों व बेसहारों का कल्याण होता है बल्कि आत्मिक तृप्ति भी सुख भी मिलता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हम सभी को कालीदास शर्मा से प्रेरणा लेनी चाहिए।