Noida News : स्वच्छ सर्वेक्षण-2024-2025 में कूड़ा मुक्त शहरों की श्रेणी में 7 स्टार सर्टिफिकेट से चूके नोएडा अब आगे की तैयारी में जुट गया है। शहर में कूड़े के डिजिटल निगरानी अपनाने की कवायद शुरू हो गई है। नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही सुधार के साथ व्यवस्था में बदलाव दिखेगा। नोएडा में अभी कूड़ा कलेक्शन की निगरानी जीपीएस आधारित है। वहीं कई शहर इसे डिजिटल कर चुके हैं। घरों से निकलने वाले खतरनाक कूड़े के निस्तारण के लिए भी प्राधिकरण को अब खुद का प्लांट लगवाना होगा। यह काम अभी प्राधिकरण निजी एजेंसी के जरिये करवा रहा है। कुछ और बदलाव व सुधार व्यवस्था में करने होंगे। इनसे सफाई व्यवस्था सुधरेगी, निवासियों को सहूलियत होगी और 7 स्टार सर्टिफिकेट की डगर भी आसान होगी।
अन्य जगह की जीआईएस टैगिंग करवाई
आरएफआईडी व्यवस्था में हर घर का तैयार होता है रिकॉर्ड, डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की व्यवस्था की डिजिटल निगरानी करने वाले इंदौर समेत अन्य शहरों में रेडियो फ्रिक्वेंसी आइडेंटिफिकेशन (आरएफआईडी) आधारित सुविधा मिलती है। इसमें हर एक पर अन्य जगह की जीआईएस टैगिंग करवाई है। इसके साथ ही एक स्कैन कोड घरों से लेकर कूड़ा न देने वाली दुकानों पर लगाया गया है। कमांड कंट्रोल रूम खुद का और बड़ा बनवाया जाए कलेक्शन और सफाई व्यवस्था व शिकायत निस्तारण की निगरानी के लिए इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल रूम नोएडा का अभी बाकी है। इससे निगरानी कर डेटा एक एजेंसी तैयार कर देती है। यह कंट्रोल रूम बड़ा होने और सीधे प्राधिकरण की निगरानी वाला होने की जरूरत है।
खतरनाक कूड़ा और ई-वेस्ट निस्तारण के लिए खुद का प्लांट नहीं
कलेक्शन को पहुंचने वाली गाड़ी के साथ मौजूद कर्मचारी को मोबाइल या अन्य स्कैन करने वाले उपकरण से वहां चस्पा टैग को स्कैन करना होता है। इसके साथ ही हर घर का मोबाइल नंबर भी मौजूद रहता है। कूड़ा लेने के लिए अगर गाड़ी नहीं पहुंच पाती है या देर हो जाती है तो यहां भी सुधार की जरूरत है। खतरनाक कूड़ा और ई-वेस्ट निस्तारण के लिए खुद का प्लांट नहीं है। कूड़ा छटनी के साथ कूड़ा नोएडा में घर व अन्य जगहों से खतरनाक कूड़ा अलग ले रहा है, लेकिन खतरनाक कूड़ा निस्तारण के लिए। नोएडा के पास खुद का प्लांट नहीं है। यह निस्तारण एक निजी एजेंसी के जरिये प्राधिकरण करवाता है। कूड़ा निस्तारण के छोटे प्लांट की संख्या कम होना शहर में सेक्टर के हिसाब से अलग-अलग गीला कूड़ा निस्तारण किया जाता है। कुड़ा का संदेश मोबाइल पर पहुंचाता है। गीला-सूखा कूड़ा छंटनी कर न दिए जाने पर भी मोबाइल पर संदेश आ जाता है। इस व्यवस्था में आॅटोमैटिक रिकॉर्ड तैयार होता है, जिसे झुठलाया नहीं जा सकता। शहर को साफ रखने के लिए रोज खर्च किए गए 95.89 लाख रुपये।
जीपीएस आधारित निगरानी में हैं खामियां
डोर-टू-डोर कूड़ा कलेक्शन की निगरानी की मौजूदा व्यवस्था जीपीएस आधारित है। इसमें प्राधिकरण कंट्रोल रूम में यह रिकॉर्ड तो तैयार होता है कि किस वाहन को किस गली में जाना था, गया है या नहीं लेकिन गली में जो घर या दुकानें हैं उनसे कूड़ा लिया है या नहीं इसका कोई रिकॉर्ड नहीं रहता है। कूड़ा गाड़ी देर से पहुंचने, छंटनी न होने जैसी समस्या पर कोई संदेश या सूचना भेजने की व्यवस्था भी नहीं है। ऐसे में कई बार कूड़ा न लेने या कूड़ा गाड़ी न पहुंचने की शिकायतें प्राधिकरण में पहुंचती रहती हैं।