
Noida News: प्रख्यात शायर पवन दीक्षित दनकौरी अचानक हम सभी को छोड़कर गोलोक गमन कर गए । वह अपनी बेटी की शादी के बाद हैदराबाद में रिसेप्शन में शामिल होने के लिए गए थे, लेकिन कुदरत को शायद ऐसा मंजूर नहीं था कि वह बेटी की रिसेप्शन पार्टी में शामिल हो सकें। रिशेप्शन पार्टी से एक दिन पहले ही उन्हें हृदयघात हो गया। 5 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद उन्होंने 25 दिसंबर 2022 को इस दुनिया को अलविदा कह दिया। उनके बड़े भाई दीक्षित दनकौरी और परिजनों को लगातार शोक संदेश प्राप्त हो रहे हैं। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी पवन दीक्षित दनकौरी को श्रद्धांजलि अर्पित की जा रही है। देश के जाने-माने और बड़े शायरों, कवियों व अन्य रचनाकारों द्वारा पवन दीक्षित को याद कर श्रद्धांजलि दी जा रही है।
प्रख्यात शायर और पवन दीक्षित के बड़े भाई दीक्षित दनकौरी उर्फ भूवनेश्वर दीक्षित ने चेतना मंच को बताया कि 14 दिसंबर को पवन दीक्षित की बेटी की नोएडा में शादी थी। बारात हैदराबाद से आई थी। जिसके बाद बेटी के ससुरालियों ने 20 दिसंबर को हैदराबाद में रिसेप्शन पार्टी का आयोजन किया था। इस पार्टी में शामिल होने के लिए पवन दीक्षित अपने परिवार के साथ हैदराबाद चले गए थे। 20 दिसंबर को अचानक उनकी तबीयत खराब हुई तो उन्हें अस्पताल ले जाया गया। जहां पर चिकित्सकों ने बताया कि पवन दीक्षित को हृदयघात हुआ है। इसके बाद उन्हें हैदराबाद के अस्पताल में ही भर्ती करा दिया गया। इस वजह से पवन दीक्षित रिसेप्शन पार्टी में भी शामिल नहीं हो सके। 5 दिन तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद 25 दिसंबर को उन्होने अंतिम सांस ली और परिजनों को रोता बिलखता हुआ छोड़कर गोलोक गमन कर गए।
कल रात दस बजे, हवाई जहाज द्वारा उनका शरीर दनकौर लाया गया और आज प्रातः ( 27 दिसंबर) अंतिम संस्कार किया गया।
आपको बता दें कि पवन दीक्षित अपने चार भाइयों में सबसे छोटे थे। उनके सबसे बड़े भाई योगेश दीक्षित, उनसे छोटे भूवनेश्वर दीक्षित उर्फ दीक्षित दनकौरी तथा तीसरे नंबर नरेश दीक्षित हैं । उनकी दो बेटी और एक बेटा है। वह बिहारी लाल इंटर कालेज में सहायक लिपिक के पद पर तैनात थे और इसी साल 31 दिसंबर 2022 को सेवानिवृत्त होने वाले थे। लेकिन कुदरत का निजाम देखिए कि वह न तो बेटी की रिसेप्शन पार्टी में ही शिरकत कर सके और न ही अपने कालेज के सहकर्मियों द्वारा दी जाने वाली विदाई पार्टी में।
सोशल मीडिया पर शायर दीक्षित दनकौरी ने उनके निधन की सूचना देते हुए लिखा है कि, जीवन के फलसफे को समझाता हुआ पवन का यह शेर मुझे आईना दिखा रहा है ... "क्या-क्या सामां जोड़ लिया है ये तूने अनजाने में, नौ मन लकड़ी, दो मन उपले और सफर कू चाहिए क्या" तुमने लाइन तोड़ कर नंबर लिया है पवन ... अच्छा नहीं किया ... ईश्वर तुम्हें अपनी शरण में स्थान दें ...
प्रख्यात कवि कुमार विश्वास ने अपनी श्रद्धांजलि देते हुए लिखा कि ... “एक बात सिखाई हमें आँखों के नीर ने, इंसा को पीर कर दिया इंसा की पीर ने। चिड़ियों को चुगते देख रहा था कि अचानक, हँसकर कटोरा फेंक दिया एक फ़क़ीर ने॥” बैलौस और बेफ़िक्र मिज़ाज पवन दीक्षित अपने कहन और रहन में भी वैसा ही खुरदुरा और चौंका देने वाला था। उसके शेर, नज्में और दनकौरी-क़िस्से मेरी स्मृति-मंजूषा का स्थायी कोष रहे है। कल रात पता चला कि अपनी बेटी को विदा करने के दस दिन बाद ही वो ह्रदयाघात से चल बसा। साल-दो साल में कभी फ़ोन करता था लेकिन टोन वही ख़ालिस यारों वाली और अलमस्त रहती थी। विदा पप्पन तेरे शेर हमारी उम्रों के साथ ज़िंदा रहेंगें । याद आता रहेगा तू।
इसके अलावा देश के अन्य शायरो, कवियों, रचनाकारों और साहित्यकारों द्वारा भी सोशल मीडिया पर लगातार स्व. पवन दीक्षित को श्रद्धाजंलि दी रही है। इस शानदार कवि व शायर को चेतना मंच परिवार भी अपनी श्रद्धासुमन अर्पित करता है।