पंजाबी समाज ने बिखेरा पंजाब की संस्कृति का रंग, खूब रही उमंग
Noida News
भारत
चेतना मंच
01 Dec 2025 11:51 AM
Noida News : नोएडा में बैसाखी का महा पर्व पूरी धूमधाम से मनाया गया। ऐसा लग रहा था कि मानो पंजाब की पूरी संस्कृति नोएडा की धरती पर उतर आई हो। नोएडा शहर में रहने वाले पंजाबी समाज के लोग बैसाखी के रंग में रंग कर पूरी उमंग में नजर आए। नोएडा शहर के सेक्टर-12 में आयोजित इस आयोजन से नोएडा में पंजाबी संस्कृति का अनूठा नजारा देखने को मिला।
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नोएडा में रही बैसाखी की धूम
आपको बता दें कि नोएडा के सेक्टर-12 में गुरूद्वारा साहिब के नाम से गुरूद्वारा स्थापित है। नोएडा के इस गुरूद्वारे में शुक्रवार को बैसाखी पर्व का आयोजन किया गया। नोएडा के अलग-अलग सेक्टरों में रहने वाले पंजाबी समाज के अधिकतर गणमान्य नागरिक बैसाखी मनाने के इस जश्न में शमिल हुए। यह आयोजन नोएडा में सक्रिय प्रमुख सामाजिक संगठन पंजाबी विकास मंच ने आयोजित किया था। ऐसा लग रहा था कि मानो पूरा नोएडा शहर पंजाबी संस्कृति के रंग में रंग हो गयो।
नोएडा के सेक्टर-12 में यूं हुआ आयोजन
सेक्टर-12 के गुरूद्वारे में आयोजित बैसाखी उत्सव समारोह में पंजाबी विकासा मंच के चेयरमैन दीपक विग सभी का स्वागत करते हुए नजर आए। पंजाबी रत्न के सम्मान से सम्मानित दीपक विग ने इस अवसर पर बताया कि हमारा देश विभिन्न त्यौहारों का एक खूबसूरत गुलदस्ता है। इस गुलदस्ते का एक सुंदर फूल है ‘बैसाखी’। वैसाखी पंजाब के कैलेंडर में सबसे महत्वपूर्ण तिथियों में से एक है। वैसाखी एक वसंत उत्सव है जो हर साल 13 या 14 अप्रैल को होता है।इस दिन को सूर्य मेष राशि में प्रवेश करता है।
इसी दिन सिखों के दसवें गुरु श्री गुरु गोबिंद सिंह जी ने 1699 ईस्वी को आनंदपुर साहिब में ‘पांच प्यारों’ को अमृत छकाकर ‘खालसा पंथ’ की सृजना की थी। पांच प्यारों को अमृत छकाने का मूल उद्देश्य गुलाम मानसिकता की जिंदगी व्यतीत कर रही जनता में ‘चढ़दी कला’ अर्थात जोश और शक्ति की भावना भर कर आत्मबल और शक्ति पैदा करना था ताकि हर प्रकार के जुल्म का डट कर सामना कर सके। इस पंथ के द्वारा गुरु श्री गोबिन्द सिंह जी ने लोगों को धर्म और जाति के आधार पर भेदभाव छोडक़र इसके स्थान पर मानवीय भावनाओं को आपसी संबंधों में महत्व देने की भी दृष्टि दी।इस दिन सिख गुरुद्वारों में विशेष उत्सव मनाए जाते हैं। बैसाखी के दिन हिंदु समाज की मान्यता है कि देवी गंगा नदी स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरी थीं। इस लिए देश में सबसे बड़े वैशाखी मेलों में से एक हरिद्वार में आयोजित किया जाता है, जो एक महत्वपूर्ण तीर्थ है। वैशाखी पर गंगा नदी में डुबकी लगाने के लिए लगभग 50 लाख तीर्थयात्री हरिद्वार में ब्रह्म कुंड में आते हैं।
पूरे भारत में मनता है बैसाखी पर्व
नोएडा में सक्रिय पंजाबी विकास मंच के अध्यक्ष जे.के. बंसल ने इस मौके पर बताया कि भारत भर में बैसाखी का पर्व सभी जगह मनाया जाता है और इसे दूसरे नाम से खेती का पर्व भी कहा जाता है। किसान इसे बडे आनंद और उत्साह के साथ मनाते हुए खुशियों का इजहार करते हैं। बैसाखी मुख्यत: कृषि पर्व है। पंजाब की भूमि से जब रबी की फसल पककर तैयार हो जाती है तब यह पर्व मनाया जाता है। इस कृषि पर्व की आध्यात्मिक पर्व के रूप में भी काफी मान्यता है। किसान इस दिन अपनी अच्छी फसल के लिए भगवान को धन्यवाद देते है।
इस दिन पवित्र नदियो मे स्नान का अपना अलग महत्व है सुबह के समय से ही स्नान आदि के बाद सिक्ख लोग श्री गुरुद्वारा साहेब जाते है। इस दिन श्री गुरुद्वारा साहेब मे *श्री गुरु ग्रंथ साहेब* का पाठ किया जाता है, कीर्तन आदि करवाए जाते है. नदियो किनारे मेलो का आयोजन किया जाता है और इन मेलो मे काफी भीड़ भी उमड़ती है। पंजाबी लोग इस दिन अपनी खुशी को अपने विशेष नृत्य भांगड़ा के द्वारा भी व्यक्त करते है. बच्चे बुढ़े महिलाए सभी ढोल की आवाज मे मदमस्त हो जाते है और हर्षो उल्लास से नाचते गाते है। उन्होंने कहा कि पंजाबी विकास मंच का प्रयास सदैव अपने पर्वों व गुरुओं की शिक्षा को आज की जेनरेशन तक पहुँचाना व उन्हें अपनी संस्कृति से अवगत कराना है। कीर्तन के उपरांत गुरु घर की लंगर की सेवा, नवरात्रि को ध्यान में रख कर, बिना प्याज व लहसुन के प्रयोग किए की गई। सभी पंजाबी परिवार व अन्य उपस्थित गुरु संगत जिनकी संख्या तकऱीबन 600 से अधिक थी लंगर प्रसाद लेकर अति आनंदित हुए और उसकी सराहना की।
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इस मौके पर मौजूद नोएडा के सामाजिक कार्यकर्ता तथा पंजाबी विकास मंच के डिप्टी चेयरमैन संजीव पुरी ने कहा कि हर वर्ष बैसाखी 13 या 14 अप्रैल को मनाई जाती है इस दिन से ही हिंदू नव वर्ष की शुरुआत होती है। क्योंकि सूर्य स्वयं की राशि मेष में आता है सूर्य 12 राशियों का भ्रमण करने के बाद स्वयं की राशि मेष में उच्च का होता है सूर्य सभी ग्रहों का राजा है सूर्य के उच्च में आने के कारण इस दिन किसी भी नए कार्य की शुरुआत शुभ मानी जाती है सूर्य के उच्च में आने से जो अलौकिक किरणें सूर्य के द्वारा जो पृथ्वी में आती है वह नदियों में समा जाती है वह वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दृष्टि से बहुत महत्वपूर्ण होती है बैसाखी के दिन नदियों में स्नान करने से आभामंडल में तीव्रता आती है और कई रोगो का नाश भी होता है ।
ये रहे मौजूद
नोएडा शहर में आयोजित बैसाखी उत्सव में नोएडा में सक्रिय पीवीएम के सरांक्षक विनोद ग्रोवर, जे एम सेठ, पंजाबी समाज के चेयरमैन दीपक बिग, अध्यक्ष जीके बंसल, डिप्टी चेयरमैन संजीव पुरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सुनील वाधवा,व एस पी कालरा, उपाध्यक्ष हरीश सभरवाल व प्रदीप वोहरा, कोषाध्यक्ष संजीव बांधा, सचिव सरोज भाटिया ,अलका सुद व एस एस सचदेवा, सह सचिव अमरदीप शाह,रितु दुग्गल व प्रभा जयरथ, ऑडिटर प्रेम अरोड़ा, राजकुमार भट, संजय खत्री,अलका सूद, राज कुमार नारंग,सुनील वर्मा,सुषमा नेब,विद्यासागर विरमानी, सरोज भटिया,पिंकी गुप्ता,पी एस गुलाटी,जितेन सभरवाल, नरेंद्र दुग्गल,रमन वासन जी,गौरव जग्गी,विजया शर्मा,नरेंद्र थरेजा, अमरजीत कौर, दिव्या महाजन समेत पंजाबी समाज के लोगों का स्वागत करने के लिए वहाँ उपस्थित थे। इस आयोजन की पूरे नोएडा शहर में चर्चा हो रही है। नोएडा के नागरिकों का कहना है कि इस तरह के आयोजनों से ही अनेकता में एकता का स्वरूप साकार होता है। Noida News
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