
Noida News/ ग्रेटर नोएडा। ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा पिछले दिनों एक अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित विज्ञापन को लेकर समाजसेवी कर्मवीर नागर प्रमुख ने सवाल उठाते हुए कहा है कि प्राधिकरण की इस हरकत ने पूर्व नियोजित भ्रष्टाचार की ओर ईशारा किया है।
दरअसल ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण द्वारा रोजा याकूबपुर के 74, चूहडपुर खादर गांव के 24, खानपुर गांव के 13, पतवाड़ी गांव के 12 और सैनी गांव के 19 किसानों की अर्जित भूमि के सापेक्ष 4/5/6/8/10 प्रतिशत आबादी भूखंड आबंटन के लिए प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर किसी भी प्रकार की आपत्ति प्राप्त करने के लिए बीते दिनों 23 अप्रैल को अंग्रेजी के ‘द टाइम्स ऑफ इंडिया’ अखबार में विज्ञापन प्रकाशित कराया गया है। इस पर सवाल उठाते हुए कर्मवीर नागर ने कहा है कि प्राधिकरण का यह कदम संदेहास्पद नजर आ रहा है। जिस अखबार को गांव देहात का आम किसान तो बहुत दूर की बात है अच्छे खासे पढ़े-लिखे लोग भी बहुत कम पढ़ते हैं। ऐसे अखबार में कम पढ़े लिखे किसानों से संबंधित विज्ञापन को प्रकाशित कराने से कहीं ना कहीं भ्रष्टाचार के पूर्व नियोजित षडयंत्र की बू आ रही है।
श्री नागर ने कहा कि स्थानीय स्तर पर पढ़े जाने वाले हिंदी अखबारों के बजाय अंग्रेजी अखबार में किसानों से संबंधित विज्ञापन प्रकाशित कराने के पीछे प्राधिकरण के अधिकारियों की खराब मंशा स्पष्ट नजर आ रही है। ऐसा प्रतीत होता है कि प्राधिकरण के अधिकारी आबादी भूखंड आबंटन की प्रक्रिया को छुपाकर आम लोगों को अनभिज्ञ रखना चाहते हैं ताकि प्रक्रिया की अनभिज्ञता का लाभ उठाकर भूखंड आबंटन के वक्त भ्रष्टाचारी सौदेबाजी करके किसानों का आर्थिक उत्पीडऩ किया जा सके।
उन्होंने कहा कि इस विज्ञापन में यह तक भी स्पष्ट नहीं किया है कि किस किसान ने कितने प्रतिशत भूखंड के लिए आवेदन किया है ? अगर किसी को इस बात का इल्म ही नहीं होगा तो आपत्ति लगाने का कोई सवाल ही नहीं उठता।
अखबार में प्रकाशित ऐसे किसानों के भी नाम प्रकाशित हैं जो जनपद गौतमबुद्धनगर से बाहर अन्य जनपद अथवा अन्य प्रदेशों के वाशिंदे हैं। लेकिन इस बात का विज्ञापन में कहीं उल्लेख नहीं है कि अन्य जनपद अथवा अन्य प्रदेशों के जिन काश्तकारों के नाम विज्ञापन में प्रकाशित हैं उनको किस आधार पर पुश्तैनी काश्तकार मानकर इस विज्ञापन में शामिल किया गया है। क्योंकि उनके पुश्तैनी काश्तकारों को आबादी भूखंड के लिए प्राधिकरण पात्र नहीं मानता है। इसके अतिरिक्त इस विज्ञापन में ऐसे काश्तकारों के भी नाम प्रकाशित न करना संदिग्ध नजर आ रहा है जो काश्तकार 28 जनवरी 1991 को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की स्थापना से पूर्व के भूस्वामी हैं और नियमानुसार काश्तकार की परिभाषा के दायरे में आते हैं।ऐसा प्रतीत होता है कि उनके नाम इसलिए सूची में प्रकाशित नहीं किए गए ताकि बाद में उनसे सौदेबाजी की जा सके। विज्ञापन में कहीं भी इस बात का भी जिक्र नहीं किया गया है कि आपत्ति के विषय क्या क्या होंगे।
श्री नागर ने कहा कि अंग्रेजी अखबार में प्रकाशित विज्ञापन से ऐसे ही कुछ अनसुलझे सवाल खड़े होना स्वाभाविक है। यह भी संभव है कि अंग्रेजी के इस अखबार में प्रकाशित विज्ञापन की दरें हिंदी के उन अन्य अखबारों के मुकाबले अधिक हों जिनको ग्रेटर नोएडा व एनसीआर क्षेत्र में आमजन द्वारा आमतौर पर पढ़ा जाता है। अगर ऐसा है तो यह भी ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के राजस्व को एक तरह से क्षति पहुंचाने का कारनामा है। Noida News