
Noida News : केंद्रीय जांच ब्यूरों (CBI) के चंगुल में फंसी 1000 करोड़ रुपये से अधिक के घोटाले की मास्टर माइंड रजनी प्रिया की कहानी चौंकाने वाली है। बिहार के सृजन घोटाले की यह मास्टर माइंड पिछले 6 वर्षों से नोएडा, ग्रेटर नोएडा व दिल्ली राजधानी क्षेत्र NCR के कई शहरों में हुलिया बदल बदल कर छिपी हुई थी। सूत्रों की माने तो रजनी प्रिया डेढ़ साल से भी अधिक समय तक नोएडा शहर की एक सोसायटी में बड़ी ही शान से रहती थी।
आपको बता दें कि CBI की एक टीम ने रजनी प्रिया को गाजियाबाद के इंदिरापुरम से गिरफ्तार किया है। बिहार के बहुचर्चित सृजन घोटाले की मुख्य आरोपी रजनी पिछले 6 साल से फरार थी। CBI की टीम ने उसे गिरफ्तार करके गाजियाबाद में CBI कोर्ट में पेश किया। CBI कोर्ट ने रजनी प्रिया को ट्राजिट रिमांड पर बिहार ले जाने के लिए सीबीआई को सौंप दिया है। अब दो दिन बाद रजनी प्रिया को बिहार के पटना की सीबीआई कोर्ट में पेश किया जाएगा। सृजन घोटाले में कुल 27 आरोपी हैं। इनमें से 12 को गिरफ्तार करके जेल भेजा जा चुका है।
सीबीआई की जिस टीम ने रजनी प्रिया को गाजियाबाद के इंदिरापुरम से पकड़ा है उसके सामने इस शातिर महिला ने अनेक राज उगले हैं। सीबीआई के अंतरंग सूत्रों के अनुसार रजनी प्रिया पूरे डेढ़ साल तक नोएडा शहर के सेक्टर 93 में स्थित एक सोसायटी में डेढ़ साल तक रही। नोएडा की सोसायटी में वह किसी रईस की तरह बड़ी ही शान से रहती थी। सामने से देखने पर हीराईन जैसी लगती थी। वह इतनी बड़ी घोटालेबाज है पड़ोसिया ने गलती से भी ऐसा शक नहीं किया।
सृजन घोटाला बिहार प्रदेश का बहुचर्चित घोटाला है। इस घोटाले में 1000 करोड़ रुपये के सरकारी धन को हड़प लिया गया था। इस मामले की जांच सीबीआई का एक दल कर रहा था। सीबीआई के अनुसार घोटाला बिहार के भागलपुर स्थित एनजीओ सृजन महिला विकास सहयोग समिति की संस्थापक मनोरमा देवी की मौत के बाद सामने आया। समिति की सचिव रजनी प्रिया मनोरमा देवी की बहू हैं। सीबीआई इस मामले में आरोपी अमित कुमार व रजनी की 13 चल व अचल संपत्ति की कुर्की भी हो चुकी है।
Noida Newsसीबीआई के अनुसार भागलपुर में 2003 में डीएम रहते केपी रमैया ने सभी सरकारी व गैर सरकारी संस्थाओं को पत्र जारी कर सृजन के बैंक खाते में रुपये जमा कराने के लिए कहा था। इसके बाद इस एनजीओ के बैंक खाते में रुपये जमा कराए गए थे। सृजन के कई अधिकारी बैंक ऑफ बड़ौदा, इंडियन बैंक और बैंक ऑफ इंडिया सहित विभिन्न बैंकों के अधिकारियों के साथ मिलकर जाली दस्तावेज से सृजन के खाते में रकम डालते थे और बाद में मिलकर बंदरबांट कर लेते थे। Noida News