
Noida News : दुनिया में प्रेम, शांति व एकता के महत्व को आध्यात्मिकता के द्वारा किस प्रकार लाया जाए इस पर मारवाह स्टूडियो में एक सेमिनार का आयोजन किया गया जिसमें सभी धर्मों के धर्म गुरूओं ने अपने विचार रखे। सेमिनार की अध्यक्षता मारवाह स्टूडियो के निदेशक प्रो. संदीप मारवाह ने की।
सेमिनार में अपने विचार रखते हुए प्रो. संदीप मारवाह ने कहा कि हर धर्म हमें मानवता सिखाता है हम इंसान तो क्या पेड़ पोधे जानवरों में से भी यदि भाव को अलग कर देते है तो वह निर्जीव हो जाते है इसलिए योग ध्यान और प्रेम को जीवन का आधार बनाये।
आचार्य लोकेश मुनि ने कहा कि इस जीवन में शारीरिक, बौद्धिक, मानसिक, भावनात्मक विकास होना जरूरी है जो केवल अध्यात्म से आता है। आचार्य दिलीप महाराज ने कि कहा कि खुद से खुद की मुलाकात होना यानि खुदा से मुलाकात होने जैसा है। शंकराचार्य ओंकार आनंद सरस्वती ने कहा कि हम हर समय अपने धर्म का अनुसरण करते है चाहे वो भोजन करना हो या फिर सांस लेना भी धर्म है। सेमिनार में डॉ गोपाला ने कहा कि सत्य असत्य, शांति, हिंसा के भेद को नही जान पाएंगे तो हम आध्यत्म को नही समझ पायेंगे।
इस्कॉन मंदिर से जुड़े विजेंद्र नंदन दास ने कहा कि हमने देशभर की जेलों में गीता के उपदेशों को भौतिक जीवन से जोडक़र अपराधियों को सुधारने की कोशिश की है व हम लाखों गीता वितरित भी कर चुके है। बहाई धर्म प्रचारक एम त्रिपाठी ने कहा ईश्वर हमसे प्रेम करता है इसलिए उसने हमारी रचना की है। इसलिये हमें ईश्वर का और एक-दूसरे का सम्मान और प्रेम करना चाहिये।
यहूदी धर्म के प्रचारक ने कहा कि जिस माँ ने आपको जन्म दिया है और जिस देश में आप पैदा हुए हैं, उसका सम्मान करना आपका दायित्व होना चाहिए, जिस्म का श्रृंगार बहुत हो चुका अब आत्मा का श्रृंगार होना चाहिए।