
Noida News : नोएडा विकास प्राधिकरण के सरकारी खजाने में सेंधमारी की घटना की जहां नोएडा कमिश्नरेट पुलिस द्वारा जांच पड़ताल की जा रही है, वहीं इस मामले की जांच CBI से कराए जाने की भी मांग की जाने लगी है। विश्लेषकों का कहना है कि जब तक मामले की CBI जांच नहीं हो जाती, तब न तो यह पता चल सकेगा कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे किसका हाथ है और न ही यह सामने आ सकेगा कि आखिर किस मास्टर माइंड के इशारे पर इतनी बड़ी साजिश रची गई ?
आपको बता दें कि सरकारी विभागों में होने वाले 100 करोड़ रुपये से ऊपर के वित्तीय घोटालों में आमतौर पर सीबीआई द्वारा ही जांच की जाती है। नोएडा प्राधिकरण के 200 करोड़ रुपये को हड़पने की पूरी साजिश रची गई थी, वह तो गनीमत रही कि बैंक अधिकारियों को शक हो गया और उन्होंने बाकि पैसा निकलने से पहले ही रोक दिया। आपको बता दें कि किसी भी सरकारी विभाग का जब बैंक से लेनदेन किया जाता है तो लेनदेन के लिए अधिकृत अफसर के सिग्नेचर को विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ही वैरीफाई करके बैंक को भेजते हैं। साथ ही सरकारी विभाग के वरिष्ठ अधिकारी ही इस आशय का एक पत्र भी बैंक को भेजते हैं। जिसके बाद लेनदेन के लिए अधिकृत अफसर तमाम दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करता है।
एक बड़ा सवाल यह भी है कि नोएडा विकास प्राधिकरण के किस अधिकारी ने फर्जी एकाउंट अफसर के सिग्नेचर वैरीफाई करके बैंक को भेजे थे क्योंकि बिना सिग्नेचर वैरीफाई हुए फर्जी एकाउंट अफसर बैंक से रकम निकालना तो दूर, बैंक में जाने की हिम्मत भी नहीं जुटा सकता।
इस पूरे मामले में वित्तीय जानकार और विश्लेषकों का कहना है कि सरकारी खजाने में हेराफेरी और सेंधमारी की CBI जांच होना बेहद जरुरी है। क्योंकि निचले स्तर पर होने वाली जांच को प्रभावित भी किया जा सकता है। वित्तीय जानकारों का यह भी कहना है कि यूपी या अन्य स्टेट के सरकारी विभागों में हुए 100 करोड़ की हेराफेरी के मामलों की जांच सीबीआई द्वारा ही की गई है। सीबीआई द्वारा जांच किए जाने के बाद ही सेंधमारी और हेराफेरी करने वाले 'असली विलेन' पकड़ में आ सकता हैं। वित्तीय जानकार यह भी कहते हैं कि जब तक इस मामले की जांच सीबीआई से नहीं कराई जाएगी, तब तक मास्टर माइंड तक पहुंचना बेहद मुश्किल काम हो सकता है।
नोएडा प्राधिकरण के सरकारी खजाने में सेंधमारी मामले में अब तक आए अपडेट के बाद यह भी कहा जा रहा है कि इस मामले में जहां बैंक अधिकारी भी संलिप्त हो सकते हैं, वहीं प्राधिकरण के किसी न किसी अधिकारी का हाथ भी हो सकता है। क्योंकि जब तक बैंक अधिकारी और प्राधिकरण अफसर की आपस में 'बातचीत' नहीं होगी, तब तक सरकारी एकाउंट से रकम को इधर से उधर किया जाना संभव प्रतीत नहीं होता है।
यह पूरा प्रकरण बेहद सनसनीखेज है। आपको धैर्य से समझना पड़ेगा। दरअसल, नोएडा प्राधिकरण विभिन्न माध्यमों से आने वाली धनराशि में से एक बड़ी राशि को अलग अलग बैंकों में फिक्स डिपोजिट (FD) में रखता है। यह प्रक्रिया नोएडा प्राधिकरण की स्थापना के समय से ही चल रही है। आज तक ऐसा कभी नहीं हुआ था जो इस बार हो गया।
आपको बता दें कि नोएडा प्राधिकरण ने 23 जून को बैंक आफ इंडिया की सेक्टर 62 शाखा में FD कराने के मकसद से 200 करोड़ रुपये जमा कराए थे। FD कराने के लिए प्राधिकरण ने सभी कागज भी बैंक को भेज दिए थे। इस धन को FD में न लगाकर बैंक एक खाते में जमा किए हुए था। इसी बीच एक व्यक्ति नोएडा प्राधिकरण का एकाउंट अफसर बनकर बैंक में पहुंचा और उसने 200 करोड़ रुपये में से 3.90 करोड़ रुपये तीन अलग अलग खातों में ट्रांसफर करा दिए। बैंक ने बड़ी आसानी से यह धन अलग अलग खातों में ट्रांसफर कर दिया।
3.90 करोड़ तीन खातों में जमा कराने वाला नोएडा प्राधिकरण एकाउंट अफसर एक बार फिर बैंक में पहुंचा और उसने 9 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की प्रक्रिया शुरू की। इस पर बैंक अधिकारियों को शक हुआ। बैंक के अधिकारियों ने नोएडा प्राधिकरण से जानकारी की तो बैंक से लेकर प्राधिकरण तक में हड़कंप मच गया। पता चला कि अब्दुल खादर नाम का जो व्यक्ति बैंक को नोएडा प्राधिकरण का एकाउंट अफसर बता रहा है उस नाम का कोई अधिकारी पूरे नोएडा प्राधिकरण में है ही नहीं। इस बीच वह फर्जी एकाउंट अधिकारी धीरे से खिसक लिया। इस प्रकार नोएडा प्राधिकरण के 200 करोड़ पूरे के पूरे तो डूबने से बच गए किंतु चार करोड़ की ठगी हो गई। Noida News
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