एक अन्य मामला 36 वर्षीय मरीज का था जो हार्ट अटैक के बाद तथा दो ब्लॉक धमनियों के साथ अस्पताल में भर्ती हुए थे। उनके मामले में धूम्रपान जैसे रिस्क फैक्टर भी दोषी नहीं थे लेकिन उनके परिवार में हृदय रोगों की हिस्ट्री थी। उनका स्टेंट तथा ड्रग कोटेड बैलून की मदद से इलाज किया गया।
चौथा मामला 39 वर्षीय एक पुरुष मरीज का था जिन्हें सीने में दर्द और परिश्रम करने पर सांस फूलने की शिकायत के साथ अस्पताल लाया गया था। उनकी कोरोनरी एंजियोग्राफी से पता चला कि वह ट्रिपल वैसल रोग से पीडि़त थे। उनकी कोरोनरी एंतियोग्राफी करने पर पता चला कि वह कोरोनरी आर्टरी रोग से पीड़ित थे।
पांचवां मामला 34 वर्षीय मरीज का था जो सीने में दर्द और थोड़ा भी परिश्रम करने पर सांस फूलने की शिकायत के बाद अस्पताल आए थे। उनकी यह शिकायत हर दिन धीरे-धीरे बढ़ती जा रही थी। इससे पहले भी उन्हें हृदय संबंधी तकलीफ हो चुकी थी और 2019 में उनकी एंजियोग्राफी भी हो चुकी थी। उन्हें कोरोनरी आर्टरी बायपास ग्राफ्ट सर्जरी (सीएबीजी) करवाने की सलाह दी गई, जिसके बाद वे धीरे-धीरे रिकवर हो चुके हैं। Noida News