
Noida News : यदि आप नोएडा में निवास करते हैं और सुबह या शाम पैदल घुमने के लिए जाते हैं तो सड़क के आवारा कुत्तों से सावधान रहें, यदि आपको कुत्ता काट लेता है तो आपको ही स्वयं एंटी रैबीज वैक्सीन करना होगा। नोएडा के स्वास्थ्य विभाग के पास आपको कुत्ते के काटने से होने वाली रैबीज की बीमारी से बचाने के लिए कोई इंतजाम नहीं है। अगले एक सप्ताह तक नोएडा के सरकारी अस्पताल में एंटी रैबीज वैक्सीन आने की कोई उम्मीद नहीं है। नोएडा के जिला अस्पताल में भी केवल पंद्रह ही दिन का स्टॉक बचा है।
जानकारी के अनुसार, पिछले कुछ समय से नोएडा में कुत्ते के काटने की वारदात बढ़ रही है। एंटी रैबीज वैक्सीन लेने के लिए लोग सरकारी अस्पतालों की ओर रुख करते है, लेकिन नोएडा के केंद्रीय औषधि भंडार पर भी एंटी रैबीज वैक्सीन उपलब्ध नहीं है। एंटी रैबीज वैक्सीन का यह संकट तीन दिसंबर से शुरू हो गया था, लेकिन अधिकारियों ने एंटी रैबीज की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कोई इंतजाम नहीं किए हैं। अब बफर स्टॉक भी खत्म हो चुका है। शनिवार को स्टाॅक में इमरजेंसी के लिए करीब 60 शीशी एआरवी बची है।
इसके बाद भी नेशनल रैबीज कंट्रोल प्रोग्राम के अधिकारी इस संकट को छिपाने में लगे रहे। नोडल अधिकारी अमित कुमार शर्मा सभी मरीजों को वैक्सीन लगने का दावा कर रहे हैं। जिला संयुक्त अस्पताल में शनिवार को सीएचसी भंगेल, बिसरख, दादरी आदि से मरीज वैक्सीन लगवाने के लिए पहुंचे। सभी को वैक्सीन दी गई है। इससे जिला अस्पताल में वैक्सीन का खर्च करीब 30 फीसदी बढ़ गया है। अगर 15 दिन में आपूर्ति केंद्रीय भंडार में नहीं आई तो यहां भी अरावी का स्टॉक खत्म हो जाएगा।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट की पंचशील ग्रींस वन सोसाइटी में शनिवार की सुबह लावारिस कुत्तों ने 8 वर्ष के बच्चे के पैर में दो जगह काट लिया। बच्चे को दूसरी बार कुत्तों ने काटा है। परिजन उसे लेकर बिसरख सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचे, जहां एआरवी खत्म होने की जानकारी मिलने पर निजी अस्पताल में वैक्सीन लगवाई गई। निजी कंपनी में प्रबंधक सुनील श्रीवास्तव सोसाइटी के टावर ए-1 में 10वीं मंजिल के फ्लैट में सपरिवार रहते हैं। शनिवार सुबह वह दोनों बच्चे के संग क्रिकेट खेल रहे थे। क्रिकेट खेलते समय गेंद पार्किंग एरिया में चली गई। उनका 8 साल छोटा बेटा गेंद लेने पहुंचा। तभी लावारिस कुत्तों ने उसपर हमला कर पैर में दो जगह काट लिया। बेटे की चीख सुनकर मौके पर पहुंचे सुनील ने कुत्तों को भगाया। सुनील ने बताया कि बेटे को करीब सालभर पहले भी लावारिस कुत्ते ने काटा था।
यहां के नागरिकों का आरोप है कि सोसाइटी में लावारिस कुत्तों की संख्या बढ़ती जा रही है। रोजाना बाहर से लावारिस कुत्ते अंदर आ रहे हैं। सुरक्षाकर्मी और एओए इस दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं। आरोप लगाया है कि अगर यहीं हाल रहा तो फिर बच्चों का खेलना मुश्किल हो जाएगा। निवासियों के कहना है कि सोसाइटी के बाहर मैदान नहीं हैं और अंदर कुत्ते नहीं खेलने दे रहे हैं।