
Noida News : उत्तर प्रदेश और हरियाणा की सीमा को लेकर दशकों से चले आ रहे सीमा विवाद पर चंडीगढ़ हाईकोर्ट का एक बड़ा फैसला आया है। इस फैसले पर अमल करते हुए सर्वे ऑफ इंडिया द्वारा नोएडा (गौतमबुद्धनगर जनपद) से लेकर अलीगढ़ और सहारनपुर जनपद तक पिलर लगाए जाएंगे। नोएडा में दिसंबर तक इस काम को पूरा कर लिया जाएगा। सोमवार को नोएडा के चक बसंतपुर गांव के डूब क्षेत्र में पिलर लगाने के बिंदुओं को चिह्नित किया गया। यह पिलर सेटेलाइट से जोड़े जाएंगे, ताकि भविष्य में यूपी और हरियाणा के लोगों के बीच किसी तरह के विवाद की स्थिति ना बन पाए।
आपको बता दें कि कई दशकों से उत्तर प्रदेश और हरियाणा के किसानों के बीच सीमा को लेकर विवाद होता रहा है। यूपी के सहारनपुर, शामली और बागपत जनपदों में हरियाणा यूपी के किसानों के बीच भीषण संघर्ष भी हो चुका है। इन संघर्षों में कई लोगों की जान भी जा चुकी है। दरअसल, हम आपको बता दें कि हरियाणा और यूपी की सीमा पर यमुना नदी का प्रवाह है। यूपी और हरियाणा के किसान यमुना नदी के किनारे वाली जमीन पर अपना अपना दावा करते हैं। इस सीमा विवाद को लेकर यूपी के कई किसानों ने चंडीगढ़ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। इन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए चंडीगढ़ हाईकोर्ट ने सर्वे ऑफ इंडिया को सीमांकन कर पिलर लगाने का आदेश दिया।
गौतमबुद्धनगर समेत सहारनपुर से अलीगढ़ तक दोनों राज्यों की सीमा का सीमांकन होना है। चंडीगढ़ हाईकोर्ट के आदेश पर गौतमबुद्ध नगर में सीमांकन का काम शुरू हो गया है। सोमवार को ग्रेटर नोएडा के चक बसंतपुर गांव में पिलर लगाने का काम शुरू हुआ। कुल 65 किलोमीटर की दूरी में पिलर लगाए जाएंगे। यमुना नदी के अंदर पिलर लगाने के लिए गोताखोर और नाव का इंतजाम किया जा रहा है। साथ ही एनडीआरएफ टीम की भी मदद ली जाएगी।
गौतमबुद्धनगर जनपद के 32 गांवों की जमीन हरियाणा की सीमा से सटी है। इन गांवों में फलेदा खादर, झुप्पा, अमरपुर, सिरसा, पलाका, मकनपुर खादर, बेलाकला, गुलावली, चक बंसतपुर समेत अन्य गांव है। दोनों राज्यों की सीमा पर पिलर लगाने का काम पूर्व में भी हो चुका है, लेकिन ज्यादातर पिलर अपनी जगह से गायब हैं। कुछ पिलर बाढ़ में बह गए हैं। जबकि कुछ को भूमाफिया ने उखाड़ दिया है।
डिप्टी कलेक्टर भैरपाल सिंह का कहना है कि पूर्व में भी पिलर लगाए गए थे, लेकिन सर्वे ऑफ इंडिया की टीम उनको दस्तावेजों में दर्ज नहीं कर सकी। अब सभी पिलर सेटेलाइट से जुड़े होंगे। अगर पिलर को उखाड़ दिया जाता है तो सेटेलाइट की मदद से पिलर की निशानदेही पता कर ली जाएगी। दिसंबर तक पिलर लगाने का काम पूरा कर लिया जाएगा।