
Noida News : यदि आप नोएडा या ग्रेटर नोएडा में निवास करते हैं और चिकन बिरयानी, पनीर या मावे से बनी वस्तु खाने का शौक रखते हैं तो अब जरा सावधान हो जाएं, क्योंकि नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत पूरे जनपद गौतमबुद्धनगर में बिकने वाली चिकन बिरयानी में सिंथेटिक कलर का तड़का लगाया जा रहा है। मावा और पनीर में भी मिलावट की जा रही है, जो आपकी सेहत पर बुरा प्रभाव डाल सकते हैं।
आपको बता दें कि नोएडा के खाद्य सुरक्षा विभाग की ओर से पिछले दिनों नोएडा के सेक्टर-62 स्थित रेस्टोरेंट में परोसी जाने वाली चिकन बिरयानी का सैंपल लेकर जांच के लिए भेजा गया था। जांच में नमूना फेल आया है। जांच रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि बिरयानी को लजीज बनाने और दिखाने के लिए उसमें सिंथेटिक कलर का प्रयोग किया गया था। चिकन बिरयानी में पीले रंग के सिंथेटिक रंग का प्रयोग पाया गया।
इसके अलावा खाद्य विभाग ने ग्रेटर नोएडा के नॉलेज पार्क 3 स्थित टर्क मेरिडियन बैंकेट हॉल से बेसन का नमूना लिया गया था। जांच में बेसन के मिलावटी होने की बात सामने आई है। बेसन में आटा और मटर की मिलावट मिली है। नमूना मानकों पर खरा नहीं उतर सका।
इसके अलावा ग्रेटर नोएडा के सेक्टर बीटा 1 स्थित बिलिंक कॉमर्शियल की मलाई पनीर, सेक्टर-135 स्थित वीवीएस सिग्नेचर के मावा, रामपुर जांगीर स्थित अग्रवाल स्वीट्स से मावा, सेक्टर-51 स्थित स्टोर से पनीर, सेक्टर डेल्टा वन स्थित दिव्य आनंद डेयरी से पनीर और दादरी के डेयरीवाला से लिए गए मावा का नमूने भी जांच में फेल हो गए हैं। इनमें वसा की मात्रा 20 से 40 फीसदी पाई गई है। जो 50 फीसदी से ज्यादा होनी चाहिए। जल्द ही एडीएम कोर्ट के माध्यम से इन सभी पर जुर्माना लगाया जएगा। बिसाहड़ा की एक दुकान से आइसक्रीम के नमूने में वसा कम मिली है।
नोएडा के मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी अक्षय गोयल बताते हैं कि सिंथेटिक कलर सेहत पर बुरा प्रभाव डालते हैं। इसके सेवन से एलर्जी की समस्या, सांस फूलना, पेट में दर्द, ऐंठन, सूजन, इम्यूनिटी सिस्टम पर असर, लीवर पर असर पड़ सकता है। रेस्टोरेंट से लिया गया चिकन बिरयानी का नमूना जांच में फेल आया है। अब आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।