
Noida News Today : राष्ट्रीय हरित प्राधिकरण (NGT) की ओर से प्रदूषण की रोकथाम को लेकर जारी किए गए किसी भी दिशा निर्देश का नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कोई अनुपालन नहीं हो रहा है। उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने भी प्रदूषण रोकने के लिए कुछ ही दिन अभियान चलाया, इसके बाद यह भी बंद हो गया। हालात सभी के सामने हैं। ग्रेटर नोएडा फिर से देश का सबसे प्रदूषित शहर बन गया है। नोएडा भी रेड जोन में पहुंच गया है। इन दोनों शहरों की वायु गुणवत्ता लगातार खराब हो रही है।
बढ़ते प्रदूषण के कारण रविवार को नोएडा का एक्यूआई 304 और ग्रेटर नोएडा का 354 अंक रेड जोन में दर्ज हुआ। दोनों ही शहरों में सुबह से ही धुंध छाई रही। पिछले 24 घंटों में नोएडा के एक्यूआई में 55 और ग्रेटर नोएडा में 65 अंक की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। ग्रैप-2 में पिछले साल ग्रेटर नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा वेस्ट देश सबसे अधिक प्रदूषित शहर की कैटिगरी में थे।
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में प्रदूषण नियंत्रित करने के लिए किए जा रहे सभी प्रयास असफल साबित हो रहे हैं। सड़कों पर उड़ती धूल को नियंत्रित नहीं किया जा सका है। सड़कों पर निर्माण सामग्री पड़ी हुई। ग्रेटर नोएडा की हवा दूसरी और नोएडा की पहली बार रेड जोन में दर्ज हुई है। हवा की गति धीमी होने के बाद शहर का एक्यूआई तेजी से बढ़ रहा है। लोगों को अब खुल हवा में सांस लेने में मुश्किल होती जा रही है। लगातार हवा रेड जोन में दर्ज होने पर लोगों को मुश्किल हो सकती है। दोनों ही शहरों में पीएम 10 का स्तर बढ़ा हुआ है।
ग्रेटर नोएडा के यूपीसीडा एरिया में ग्रैप के बावजूद नियमों की अनदेखी हो रही है। ग्रेटर नोएडा से दादरी और नोएडा एक्सटेंशन को जोड़ने वाली सड़क का बुरा हाल है। पूरे दिन सड़क पर धूल ही धूल उड़ती रहती है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में कंस्ट्रक्शन साइट पर ग्रैप के नियमों का पालन नहीं हो रहा है। धूल उड़ती रहती है। खुले में कंस्ट्रक्शन मटीरियल पड़े हैं। उनको कवर नहीं किया जा रहा है। सख्ती के साथ कार्रवाई नहीं हो रही है।
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में पब्लिक ट्रांसपोर्ट का कोई विकल्प नहीं है। मजबूरी में लोग निजी वाहन लेकर निकल रहे हैं। ऐसे में स्थिति खराब हो रही है। सड़कों पर वाहनों का दबाव अधिक होने से भी प्रदूषण बढ़ रहा है।