
Noida News : देश के इतिहास में पहली बार भ्रष्टाचार के दम पर खड़ी की गई गगनचुंबी बहुमंजिला इमारत को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर आज ही के दिन धूल में मिलाया गया था। सुपरटेक बिल्डर के मालिकों द्वारा प्राधिकरण के अधिकारियों, सरकार में बैठे मंत्रियों से सांठगांठ कर सेक्टर 93 में खड़ा किया गया ट्विन टावर आज ही के दिन नेस्तानबूद हुआ था।
नोएडा के सेक्टर 93 में बनाए गए ट्विन टावर को आज के ही दिन यानी 28 अगस्त 2022 को सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर ध्वस्त कर दिया गया था। रविवार, 28 अगस्त 2022 की दोपहर 2:30 बजे महज 9 सेकेंड में RDX के जरिए इस बहु मंजिला इमारत को ध्वस्त कर दिया गया था। यहां पर अब विजयपथ बनाया गया है, लेकिन वहीं इस जमीन के मालिकाना हक को लेकर भी लड़ाई हो रही है।
आपको बता दें कि रविवार का दिन था और 28 अगस्त 2022 की तारीख थी, समय था दोपहर 2:30 बजे। जब नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों की भ्रष्टाचार वाले सुपरटेक ट्विन टावरों को जमींदोज कर दिया गया था। सिर्फ 9 सेकंड में मलबे में तब्दील हुई विशालकाय इमारत में विस्फोट से किसी नुकसान की खबर नहीं आई थी। 100 मीटर ऊंची इस बिल्डिंग को सुरक्षित रूप से जमींदोज करने के लिए, जलप्रपात विस्फोट तकनीक का उपयोग किया गया था।
सुपरटेक बिल्डर द्वारा तैयार किए गए ट्विन टावर को गिराने की मुख्य वजह इसे गैरकानूनी तरीके से बनाई गई बिल्डिंग बताया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों पर सख्त टिप्पणी भी की थी। इसे गिराने के लिए इलाहाबाद हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक लंबी लड़ाई लड़ी गई थी। सुपरटेक बिल्डर की तरफ से नामी वकील इस केस को लड़े लेकिन वह ध्वस्त होने से नहीं बचा सके थे। सुपरटेक बिल्डर के हर पैतरे को देश की सुप्रीम अदालत ने खारिज कर दिया था और इस इमारत को हर हालत में गिराने के निर्देश दिए थे।
Read Also - Chandrayaan 3 : चांद पर पहुंचने वाला भारत पहला नहीं चौथा देश, पहला देश कौन सा ?ट्विन टॉवर बिल्डिंग को गिराने के लिए लगभग 3700 किलो आरडीएक्स लगाया गया था। इसका काम एक विदेशी कंपनी को सौंपा गया था, जिसने बड़े ही सुरक्षित ढंग से बिल्डंग को ध्वस्त दिया था। बता दें कि नोएडा के सेक्टर-93 स्थित 40 मंजिला ट्विन टावरों का निर्माण 2009 में हुआ था।
भ्रष्टाचार के दम पर खड़े किए गए ट्विन टावर को ध्वस्त हुए आज पूरा एक साल हो गया है, लेकिन भ्रष्टाचार में डूबे प्राधिकरण के अधिकारियों को लेकर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी के बाद भी उनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं हुई है। सिर्फ जांच-जांच का खेल जारी है। इस मामले में 24 लोगों पर एफआईआर दर्ज कराई गई थी, जिसमें प्राधिकरण के पूर्व सीईओ व अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल थे। इस मामले की जांच ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के OSD सौम्य श्रीवास्तव कर रहे है। अभी तक केवल दो ही अधिकारियों के अधूरे जवाब दर्ज किए गए हैं। जांच की गति धीमी होने पर इस ट्विन टॉवर को गिराने के लिए लड़ाई लड़ने वाले अभी भी भ्रष्ट अधिकारियों के खिलाफ कार्यवाही की प्रतिक्षा कर रहे हैं। Noida News