
Noida News : यूपी के नोएडा शहर में साल पहले शुरू की गई नोएडा प्राधिकरण की वेंडिंग जोन योजना तुगलकी फरमान बनकर रह गई है। इस योजना को नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ रितु माहेश्वरी ने बड़े प्रचार प्रचार के साथ शुरू किया था। इस योजना के तहत नोएडा शहर में 120 वेंडिंग जोन बनाए गए हैं।
आपको बता दें कि नोएडा शहर के सेक्टर में सड़कों के किनारे बड़ी संख्या में धोखे पटरी पर छोटी-छोटी दुकान लगाई जाती है। कुछ सेक्टर में तो गरीब तबके के लोग सड़क पर सामान फैला कर ही बेचते हैं। कहा जाता है कि सड़कों के किनारे लगने वाली ठेली पटरी से यातायात जाम की समस्या पैदा होती है। यह अलग बात है कि नोएडा शहर में यातायात जाम के दूसरे भी ढेर सारे कारण हैं। नोएडा शहर को जाम से मुक्त करने तथा शहर को सुंदर बनाकर रखने के मकसद से नोएडा प्राधिकरण की तत्कालीन सीईओ श्रीमती रितु माहेश्वरी ने वर्ष 2020 में वेंडिंग जोन की योजना घोषित की थी। इस योजना के तहत शहर में इधर उधर खोखा पटरी, रेहडी लगाने वालों को नोएडा प्राधिकरण द्वारा लाइसेंस देकर निर्धारित स्थान पर बैठना था। इस काम के लिए नोएडा में 120 स्थान को वेंडिंग जोन के रूप में विकसित किया गया था।
नोएडा प्राधिकरण द्वारा घोषित वेंडिंग जोन की योजना में 8154 आवेदन नोएडा प्राधिकरण के पास आए थे। इन आवेदनों के सापेक्ष नोएडा प्राधिकरण ने 4339 वेंडर्स के लाइसेंस बनाए थे, साथ ही 2229 वेंडर्स को अलग-अलग स्थान पर बनाए गए वेंडिंग जोन में जगह आवंटित की गई थी। इन वेंडर्स को 1800 रुपये से लेकर 3 हजार रूपये प्रति माह तक के किराये पर लाइसेंस जारी किए गए थे।
नोएडा प्राधिकरण की यह योजना कामयाब नहीं हो पाई है, यानी वेंडिंग जोन योजना तुगलकी फरमान बनकर रह गई है। पहले तो वेंडर्स वेंडिंग जोन में जाने को तैयार ही नहीं हुए, जिन्हें जबरन उठाकर वेंडिंग जोन में भेजा गया वह फिर से वापस अपने पुराने स्थान पर ही आ गए है। यह अलग बात है कि वेंडिंग जोन में दिखावे के लिए वेंडर अपना कब्जा बनाए हुए हैं। नोएडा के नागरिकों का कहना है कि वेंडर्स के कारण उन्हें अपने घरों दुकानों व फैक्ट्री तथा डफरान के पास छोटे-मोटे सामान मिल जाते हैं। लिहाजा वेंडिंग जोन की योजना की शहर में कोई सार्थकता नहीं है। वेंडिंग जोन बनाना तभी सार्थक हो सकते हैं जब इसका पूरा व्यावहारिक पक्ष देखकर इन्हें विकसित किया जाए।