पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे “WinBooz” नाम से एक ऑनलाइन गेमिंग एप चलाते हैं। इस एप पर क्रिकेट, कैसिनो, एविएटर, रूलेट और “हरालाल नंबरिंग गेम” जैसे गेम दिखाकर बैटिंग करवाई जाती थी।

नोएडा में एक फ्रॉड गैंग से जुड़ी बड़ी खबर सामने आ रही है। नोएडा को साइबर हब मानने वालों के लिए यह खबर चौंकाने वाली है। सेंट्रल नोएडा पुलिस ने बिसरख क्षेत्र की एक हाईराइज सोसायटी से ऐसे संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो “WinBooz” ऑनलाइन गेमिंग/बैटिंग ऐप के सहारे लोगों की जेब साफ कर रहा था। पुलिस ने फ्लैट में छापा मारकर गैंग के आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया, जिनमें एक महिला भी शामिल है। शुरुआती जांच में सामने आया कि यह गिरोह नोएडा से ऑपरेट होकर रोजाना 8–10 लाख रुपये तक की ऑनलाइन ठगी को अंजाम दे रहा था
बिसरख थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक फ्लैट में बैठकर कुछ लोग लैपटॉप और मोबाइल के ज़रिए ऑनलाइन गेमिंग के नाम पर लोगों से धोखाधड़ी कर रहे हैं। सूचना पुख्ता होने पर टीम ने सेंट्रल नोएडा की ला रेजिडेंसिया सोसायटी के टॉवर-1 के फ्लैट नंबर 2101 पर रेड डाली। अंदर टेबल पर लैपटॉप, मोबाइल फोन, दर्जनों सिम कार्ड, बैंक पासबुक और चेकबुक का ढेर मिला। कई आरोपी उसी वक्त लैपटॉप पर लाइव गेमिंग और बैटिंग की कमांड दे रहे थे, जबकि मोबाइल पर यूज़र उनसे हार-जीत की बाज़ी लगा रहे थे।
पूछताछ में आरोपियों ने बताया कि वे “WinBooz” नाम से एक ऑनलाइन गेमिंग एप चलाते हैं। इस एप पर क्रिकेट, कैसिनो, एविएटर, रूलेट और “हरालाल नंबरिंग गेम” जैसे गेम दिखाकर बैटिंग करवाई जाती थी।
गिरोह सबसे पहले इंस्टाग्राम, फेसबुक जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर गेमिंग और तेज कमाई के विज्ञापन चलवाता था। इनके नेटवर्क में शामिल “लियो” नाम का शख्स लोगों को एक लिंक भेजता था, जिसके ज़रिए यूज़र फर्जी वेबसाइट/एप पर पहुंच जाते थे। इसके बाद लोगों से गेम खेलने के लिए पैसे जमा कराने को कहा जाता। बदले में उनके अकाउंट में काल्पनिक पॉइंट्स और वर्चुअल करेंसी डाली जाती। शुरुआत में यूज़र को छोटे–छोटे अमाउंट जिता दिए जाते ताकि उनमें लालच बढ़े और वे दोबारा ज़्यादा रकम लगाएं। जैसे ही कोई यूज़र बड़ी रकम लगाने लगता, सिस्टम इस तरह से सेट कर दिया जाता कि वह लगातार हारता ही रहे। कुछ ही राउंड में उनकी पूरी जमा पूंजी डुबो दी जाती और वे पैसे निकाल ही नहीं पाते। इसी तरीके से आरोपी रोज 8–10 लाख रुपये तक की ठगी कर रहे थे।
तफ्तीश में यह भी सामने आया कि गिरोह बैंक खातों के लिए फर्जी पहचान का इस्तेमाल करता था। ये लोग दूसरे व्यक्तियों की आईडी लेकर उसी नाम पर प्री-एक्टिवेटेड फर्जी सिम कार्ड खरीदते थे और उन्हीं सिम पर बैंक खाते खुलवाते थे। इन खातों का इस्तेमाल सिर्फ ठगी की रकम मंगाने और आगे ट्रांसफर करने के लिए किया जाता था। पुलिस के अनुसार, एक आईडी पर करीब 3,000 तक क्लाइंट जोड़े जाते थे। जैसे ही किसी खाते में 50 हजार रुपये से अधिक की रकम जमा होती, उसे तुरंत इनएक्टिव कर दिया जाता ताकि ट्रांजैक्शन ट्रेल से पकड़ में न आ सकें। पैसे को कई अलग-अलग खातों में घुमाकर अंत में “लियो” द्वारा बताए गए मुख्य खाते में ट्रांसफर कर दिया जाता था और वहीं से एटीएम/डेबिट कार्ड के ज़रिए नकद निकासी की जाती थी। छापे के दौरान पुलिस को मौके से कूटरचित बैंक पासबुक, चेकबुक, फर्जी एटीएम कार्ड, बड़ी संख्या में प्री-एक्टिवेटेड सिम, 8 लैपटॉप, 56 मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण बरामद हुए हैं।
डीसीपी सेंट्रल नोएडा शक्ति मोहन अवस्थी ने बताया कि फ्लैट पर रेड के दौरान सभी आठों आरोपी मौके पर पकड़े गए। उनकी पहचान अंकित सिंह (24), हिमांशु (20), चिराग जैन (21), प्रथम मिश्रा (22), हर्षित वर्मा (23), अंश वर्मा (20), नितिन बाबू (22) और कीर्ति (23) के रूप में हुई है। सभी आरोपी मूल रूप से इटावा जिले के रहने वाले हैं और करीब तीन महीने से नोएडा के इस फ्लैट में बैठकर बड़े पैमाने पर ऑनलाइन ठगी का नेटवर्क चला रहे थे। आरोपियों ने पूछताछ में स्वीकार किया कि वे “लियो” नाम के व्यक्ति के साथ मिलकर फर्जी ऑनलाइन गेमिंग और बैटिंग एप के ज़रिए रोजाना लाखों रुपये की ठगी करते थे। पुलिस अब “लियो” समेत पूरे नेटवर्क के दूसरे सदस्यों और मनी ट्रेल की कड़ियों की जांच कर रही है। साइबर सेल की मदद से बैंक खातों, ई-वॉलेट्स और डिजिटल ट्रांजैक्शन की डिटेल खंगाली जा रही है, ताकि ठगी की कुल रकम और पीड़ितों की सही संख्या का पता लगाया जा सके।