नोएडा के सेक्टर-118 में कथित अवैध गतिविधियों और नशे के कारोबार को लेकर पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। स्थानीय स्तर पर ‘घोटा पहलवान’ के नाम से चर्चित व्यक्ति और उससे जुड़ी बताई जा रही गतिविधियां जांच के दायरे में हैं।

Noida News: नोएडा में नशे और कथित अवैध गतिविधियों के खिलाफ पुलिस ने बड़ी कार्रवाई की है। सेक्टर-118 के उस कथित ‘‘बदनाम कोने’’ पर पुलिस का शिकंजा कस गया है, जिसे लेकर चेतना मंच पिछले कई दिनों से लगातार सवाल उठा रहा था। अब पुलिस की कार्रवाई के बाद चर्चित नाम ‘‘घोटा पहलवान’’ और उसके आसपास सक्रिय बताए जा रहे लोगों की गतिविधियां पुलिस की जांच के दायरे में आ गई हैं। सेक्टर-118 में संचालित बताए जा रहे ‘‘फुरसत के पल’’ सहित कुछ कैफे को लेकर चेतना मंच ने अपनी पड़ताल में गंभीर सवाल उठाए थे। रिपोर्ट में देर रात तक कैफे खुले रहने, वहां युवाओं की मौजूदगी और कथित नशे के कारोबार को लेकर सवाल खड़े किए गए थे। चेतना मंच की पिछली रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि पुलिस की कार्रवाई के बाद कैफे दोबारा खुलने को लेकर लगातार सवाल उठ रहे थे।
चेतना मंच ने 4 सितंबर को ‘‘नोएडा वाले सावधान, नोएडा शहर में मौजूद है अपराध का एक कोना’’ शीर्षक से खबर प्रकाशित कर इस पूरे मामले को प्रमुखता से उठाया था। इसके बाद 8 सितंबर को प्रकाशित विस्तृत पड़ताल में सेक्टर-118 के कथित बदनाम कोने, ‘‘फुरसत के पल’’ कैफे और देर रात चलने वाली गतिविधियों पर सवाल उठाए गए थे। चेतना मंच की रिपोर्ट का मूल सवाल यही था कि यदि पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है तो कार्रवाई के बाद वही गतिविधियां दोबारा कैसे शुरू हो जाती हैं? पिछली रिपोर्ट में पुलिस के मौके पर पहुंचने, कैफे बंद कराने और उसके बाद दोबारा खुलने की घटनाओं का भी उल्लेख किया गया था। अब पुलिस की कार्रवाई ने इस पूरे प्रकरण को एक नए मोड़ पर ला खड़ा किया है।
चेतना मंच की पिछली पड़ताल में स्थानीय स्तर पर ‘‘घोटा पहलवान’’ नाम से चर्चित एक व्यक्ति का नाम इस पूरे मामले से जोड़ा गया था। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से उस पर अवैध कब्जे तथा कथित अवैध गतिविधियों से जुड़े गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि इन आरोपों की पुष्टि संबंधित जांच एजेंसियों द्वारा किया जाना अभी जरूरी है।
अब पुलिस कार्रवाई के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि सेक्टर-118 में चल रही कथित गतिविधियों के पीछे वास्तव में कौन-कौन लोग हैं और इन गतिविधियों का पूरा नेटवर्क कितना बड़ा है।
नोएडा जैसे हाईटेक शहर में सेक्टर-118 का यह मामला इसलिए भी गंभीर माना गया क्योंकि चेतना मंच की पड़ताल में देर रात तक कैफे संचालित होने और वहां युवाओं के बड़ी संख्या में पहुंचने का मुद्दा सामने आया था। पिछली रिपोर्ट के अनुसार, ‘‘फुरसत के पल’’ के आसपास कई अन्य छोटे-बड़े कैफे भी संचालित होने की बात सामने आई थी। चेतना मंच की टीम ने मौके की पड़ताल करते हुए यह सवाल उठाया था कि देर रात तक इन प्रतिष्ठानों के संचालन की अनुमति किस स्तर से थी और पुलिस कार्रवाई के बावजूद ये दोबारा कैसे खुल रहे थे।
अब पुलिस की कार्रवाई के बाद यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि मामला केवल कुछ कैफे बंद कराने तक सीमित रहता है या कथित नशे के नेटवर्क की जड़ तक पहुंचने के लिए भी जांच आगे बढ़ती है। यदि पुलिस को नशे की तस्करी अथवा अवैध गतिविधियों से जुड़े ठोस सबूत मिलते हैं तो यह कार्रवाई सेक्टर-118 तक सीमित नहीं रहेगी। इससे उन लोगों तक पहुंचने का रास्ता भी खुल सकता है जो कथित तौर पर इस नेटवर्क को आर्थिक या अन्य प्रकार की मदद उपलब्ध करा रहे हों।
सेक्टर-118 की कार्रवाई के बाद पुलिस के सामने कई महत्वपूर्ण सवाल खड़े हैं। क्या यहां वास्तव में नशीले पदार्थों की तस्करी का नेटवर्क सक्रिय था? यदि था तो इसका संचालन कौन कर रहा था? कैफे संचालकों और कथित नशा तस्करों के बीच क्या संबंध था? देर रात तक कैफे कैसे संचालित होते रहे? पुलिस कार्रवाई के बाद भी दोबारा गतिविधियां कैसे शुरू हो जाती थीं? और सबसे बड़ा सवाल—इस पूरे नेटवर्क के पीछे और कौन-कौन लोग हैं? इन सभी सवालों का जवाब पुलिस की विस्तृत जांच से ही सामने आएगा।
चेतना मंच ने इस पूरे मामले को केवल एक कैफे की समस्या के रूप में नहीं देखा था। सवाल नोएडा की युवा पीढ़ी, शहर की कानून-व्यवस्था और अवैध गतिविधियों के संभावित नेटवर्क का था। अब पुलिस की कार्रवाई के बाद यह कहना गलत नहीं होगा कि जिस ‘‘बदनाम कोने’’ को लेकर चेतना मंच लगातार आवाज उठा रहा था, उस पर आखिरकार पुलिस की सख्ती दिखाई दी है। लेकिन असली परीक्षा अब शुरू होती है। क्या पुलिस केवल अड्डे पर कार्रवाई करके रुक जाएगी या फिर इस कथित नेटवर्क की पूरी जड़ तक पहुंचेगी?
नोएडा की जनता की निगाहें अब पुलिस की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं। Noida News :
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