नोएडा में गैस की किल्लत से हाहाकार, एजेंसियों पर लगी लंबी कतारें
घरेलू और कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने से दोनों शहरों में आम उपभोक्ता से लेकर छोटे कारोबारी तक परेशान हैं। सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ रही है, जो छोटे सिलेंडरों के सहारे रोजमर्रा की रसोई चलाते हैं।

Noida News : नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एलपीजी गैस की किल्लत अब गंभीर रूप लेती दिखाई दे रही है। घरेलू और कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने से दोनों शहरों में आम उपभोक्ता से लेकर छोटे कारोबारी तक परेशान हैं। सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ रही है, जो छोटे सिलेंडरों के सहारे रोजमर्रा की रसोई चलाते हैं। गैस की कमी का फायदा उठाते हुए बाजार में 5 किलो वाले सिलेंडरों की रीफिलिंग के नाम पर खुलेआम मनमानी वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं।
नोएडा में 5 किलो सिलेंडर बना मजबूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की रीफिलिंग अपेक्षाकृत कम खर्च में हो जाती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। गैस की उपलब्धता कम होने से कुछ बिचौलिए और अनधिकृत सप्लायर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। आरोप है कि कई जगहों पर प्रति किलो 300 से 400 रुपये तक की वसूली की जा रही है। ग्रेटर नोएडा के बीटा-1 इलाके में रहने वाले मजदूर परिवारों का कहना है कि बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों के लिए इतनी महंगी गैस खरीदना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा के छोटे कारोबारी भी संकट में
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कमर्शियल गैस की आपूर्ति बाधित होने का असर छोटे होटल, ढाबों, चाय स्टॉल और फास्ट फूड कारोबार पर भी साफ दिख रहा है। कई दुकानदारों का कहना है कि एजेंसियों से समय पर कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन्हें या तो काम सीमित करना पड़ रहा है या फिर घरेलू सिलेंडर ऊंचे दाम पर खरीदकर किसी तरह कारोबार चलाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर नोएडा में जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में छोटे फूड स्टॉल और सड़क किनारे चलने वाले खाने-पीने के कारोबार बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
नोएडा की गैस एजेंसियों पर लगी लंबी लाइनें
गैस संकट का सबसे ज्यादा असर एजेंसियों के बाहर दिखाई दे रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सेक्टर-54 स्थित एजेंसी पर हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा। इसी तरह सेक्टर-20 और सेक्टर-73 की एजेंसियों पर भी भारी भीड़ देखने को मिली। कई जगहों पर जैसे ही डिलीवरी वाहन पहुंचे, उपभोक्ता सिलेंडर लेने के लिए उमड़ पड़े। इससे अव्यवस्था की स्थिति बन गई। नोएडा और Greater Noida में गैस की यह कमी सबसे ज्यादा निम्न आय वर्ग और किराये पर रहने वाले मजदूर परिवारों को प्रभावित कर रही है। छोटे सिलेंडरों पर निर्भर ये परिवार पहले ही महंगाई की मार झेल रहे थे, ऊपर से अब गैस की कालाबाजारी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई घरों में खाना बनाने तक का संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
नोएडा के लोगों और स्थानीय कारोबारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस की सप्लाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। साथ ही कमर्शियल सिलेंडरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उपभोक्ताओं का कहना है कि एक ओर शहर गैस संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसी संकट को मुनाफे का जरिया बना रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की सख्ती ही राहत दिला सकती है। Noida News
Noida News : नोएडा और ग्रेटर नोएडा में एलपीजी गैस की किल्लत अब गंभीर रूप लेती दिखाई दे रही है। घरेलू और कमर्शियल गैस की सप्लाई प्रभावित होने से दोनों शहरों में आम उपभोक्ता से लेकर छोटे कारोबारी तक परेशान हैं। सबसे ज्यादा मार उन परिवारों पर पड़ रही है, जो छोटे सिलेंडरों के सहारे रोजमर्रा की रसोई चलाते हैं। गैस की कमी का फायदा उठाते हुए बाजार में 5 किलो वाले सिलेंडरों की रीफिलिंग के नाम पर खुलेआम मनमानी वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं।
नोएडा में 5 किलो सिलेंडर बना मजबूरी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पहले 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर की रीफिलिंग अपेक्षाकृत कम खर्च में हो जाती थी, लेकिन अब हालात पूरी तरह बदल चुके हैं। गैस की उपलब्धता कम होने से कुछ बिचौलिए और अनधिकृत सप्लायर ऊंचे दाम वसूल रहे हैं। आरोप है कि कई जगहों पर प्रति किलो 300 से 400 रुपये तक की वसूली की जा रही है। ग्रेटर नोएडा के बीटा-1 इलाके में रहने वाले मजदूर परिवारों का कहना है कि बढ़ती कीमतों ने रसोई का बजट बिगाड़ दिया है। दिहाड़ी पर काम करने वाले लोगों के लिए इतनी महंगी गैस खरीदना लगभग नामुमकिन होता जा रहा है।
ग्रेटर नोएडा के छोटे कारोबारी भी संकट में
नोएडा और ग्रेटर नोएडा में कमर्शियल गैस की आपूर्ति बाधित होने का असर छोटे होटल, ढाबों, चाय स्टॉल और फास्ट फूड कारोबार पर भी साफ दिख रहा है। कई दुकानदारों का कहना है कि एजेंसियों से समय पर कमर्शियल सिलेंडर नहीं मिल रहे हैं। ऐसे में उन्हें या तो काम सीमित करना पड़ रहा है या फिर घरेलू सिलेंडर ऊंचे दाम पर खरीदकर किसी तरह कारोबार चलाना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि अगर नोएडा में जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो बड़ी संख्या में छोटे फूड स्टॉल और सड़क किनारे चलने वाले खाने-पीने के कारोबार बंद होने की स्थिति में पहुंच सकते हैं।
नोएडा की गैस एजेंसियों पर लगी लंबी लाइनें
गैस संकट का सबसे ज्यादा असर एजेंसियों के बाहर दिखाई दे रहा है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा की कई गैस एजेंसियों पर सुबह से ही उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं। सेक्टर-54 स्थित एजेंसी पर हालात इतने तनावपूर्ण हो गए कि व्यवस्था संभालने के लिए पुलिस को मौके पर तैनात करना पड़ा। इसी तरह सेक्टर-20 और सेक्टर-73 की एजेंसियों पर भी भारी भीड़ देखने को मिली। कई जगहों पर जैसे ही डिलीवरी वाहन पहुंचे, उपभोक्ता सिलेंडर लेने के लिए उमड़ पड़े। इससे अव्यवस्था की स्थिति बन गई। नोएडा और Greater Noida में गैस की यह कमी सबसे ज्यादा निम्न आय वर्ग और किराये पर रहने वाले मजदूर परिवारों को प्रभावित कर रही है। छोटे सिलेंडरों पर निर्भर ये परिवार पहले ही महंगाई की मार झेल रहे थे, ऊपर से अब गैस की कालाबाजारी ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। कई घरों में खाना बनाने तक का संकट खड़ा हो गया है।
प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग
नोएडा के लोगों और स्थानीय कारोबारियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गैस की सप्लाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त किया जाए। साथ ही कमर्शियल सिलेंडरों की नियमित उपलब्धता सुनिश्चित करने और कालाबाजारी में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उपभोक्ताओं का कहना है कि एक ओर शहर गैस संकट से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर कुछ लोग इसी संकट को मुनाफे का जरिया बना रहे हैं। ऐसे में प्रशासन की सख्ती ही राहत दिला सकती है। Noida News












