नोएडा की पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह की पहल से गौतमबुद्धनगर में पारिवारिक विवादों के समाधान के लिए FDRC मॉडल को बढ़ावा मिल रहा है। 1 जनवरी 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच तीन FDRC में 1,014 पारिवारिक विवाद पहुंचे, जिनमें 906 मामलों का निस्तारण किया गया।

Noida News : घर के भीतर होने वाला विवाद जब पुलिस थाने की चौखट तक पहुंचता है तो वह केवल कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह जाता। उसके साथ पति-पत्नी का रिश्ता, बच्चों का भविष्य, माता-पिता की चिंता और पूरे परिवार का सामाजिक जीवन जुड़ा होता है। ऐसे मामलों में हर विवाद का पहला और एकमात्र रास्ता मुकदमा ही हो, ऐसा जरूरी नहीं है। इसी सोच के साथ गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में फैमिली डिस्प्यूट रिजॉल्यूशन क्लीनिक यानी FDRC के जरिए पारिवारिक और वैवाहिक विवादों को काउंसलिंग, संवाद और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने की कोशिश की जा रही है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर संचालित इस व्यवस्था के आंकड़े बताते हैं कि 1 जनवरी 2025 से 31 अगस्त 2026 के बीच तीन FDRC में 1,014 प्रार्थना पत्र पहुंचे। इनमें 906 मामलों का निस्तारण हो चुका है, जबकि 108 मामले अभी मध्यस्थता की प्रक्रिया में हैं। निस्तारित मामलों में 57 में अभियोग दर्ज हुआ। पुलिस के आंकड़ों के अनुसार, निस्तारित मामलों में लगभग 94.38 प्रतिशत मामलों में काउंसलिंग और मध्यस्थता के जरिए समाधान किया गया। Noida News
नोएडा और ग्रेटर नोएडा की पहचान देश के बड़े आधुनिक और तेजी से विकसित होते शहरी क्षेत्रों में होती है। यहां देश के अलग-अलग हिस्सों से आकर लोग नौकरी, कारोबार और शिक्षा के लिए बसे हैं। बड़ी-बड़ी सोसायटियां, फ्लैट, बेहतर आय और आधुनिक जीवनशैली अपने साथ कई सुविधाएं लेकर आई हैं, लेकिन पारिवारिक रिश्तों के सामने तनाव, समय की कमी, आर्थिक दबाव, शराब की लत, दहेज विवाद और पति-पत्नी के बीच संवादहीनता जैसी चुनौतियां भी हैं। ऐसे वातावरण में पुलिस की भूमिका केवल अपराध होने के बाद कार्रवाई करने तक सीमित नहीं रहती। पारिवारिक विवादों में समय रहते संवाद स्थापित करना कई बार आगे होने वाली गंभीर स्थिति को रोकने का माध्यम बन सकता है। गौतमबुद्धनगर का FDRC मॉडल इसी दिशा में काम कर रहा है। Noida News
पुलिस कमिश्नरेट के अनुसार गौतमबुद्धनगर में वर्तमान में तीन FDRC संचालित हैं।
सेक्टर-108 स्थित महिला सहायता प्रकोष्ठ/FDRC में 450 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए।
इनमें:
हुआ है।
नॉलेज पार्क स्थित FDRC में 296 प्रार्थना पत्र पहुंचे।
इनमें:
हुआ है।
चैरी काउंटी FDRC में 268 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए।
इनमें:
हुआ है।
इस तरह तीनों केंद्रों का कुल आंकड़ा 1,014 प्रार्थना पत्र, 906 निस्तारित मामले, 108 लंबित/मध्यस्थता में मामले और 57 अभियोग का है। Noida News
पुलिस द्वारा जारी आंकड़ों में निस्तारित 906 मामलों में 57 में अभियोग दर्ज होने की बात कही गई है। पुलिस ने इसी आधार पर बताया है कि करीब 94.38 प्रतिशत मामलों में पुलिस कार्रवाई के बजाय काउंसलिंग एवं मध्यस्थता के जरिए समाधान हुआ। हालांकि यहां यह समझना जरूरी है कि इसका अर्थ यह नहीं है कि हर मामले में परिवार पहले जैसा ही हो गया। इसका सीधा अर्थ पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार यह है कि निस्तारित मामलों में अधिकांश में FIR दर्ज करने के बजाय विवाद को परामर्श और मध्यस्थता के माध्यम से सुलझाने का प्रयास किया गया। यही इस मॉडल की सबसे महत्वपूर्ण विशेषता है। Noida News
FDRC नॉलेज पार्क से पुलिस ने एक ऐसा मामला भी साझा किया है जिसमें पति-पत्नी के बीच विवाद काफी गंभीर स्थिति तक पहुंच गया था। पुलिस के अनुसार, पूजा और अरुण काल्पनिक नाम हैं। दोनों का विवाह वर्ष 2013 में हुआ था और उनके दो बेटे हैं। विवाद में शराब का सेवन, पत्नी के साथ मारपीट और अतिरिक्त दहेज की मांग जैसे आरोप सामने आए। मामला महिला सुरक्षा से जुड़े स्तर पर पहुंचने के बाद FDRC नॉलेज पार्क को संदर्भित किया गया।
FDRC की टीम ने एक ही बैठक में समाधान खोजने के बजाय चरणबद्ध तरीके से काम किया। पहले दोनों पक्षों की बात सुनी गई। फिर वैवाहिक तनाव और विवाद की जड़ को समझने का प्रयास किया गया। इसके बाद दोनों को आपसी संवाद और रिश्ते को सुधारने के लिए समय देने की सलाह दी गई। काउंसलिंग के दौरान पति ने शराब छोड़ने के लिए उपचार लेने का निर्णय किया। अंतिम सत्र में दोनों पक्ष आपसी सहमति से फिर साथ रहने को तैयार हुए। बाद में FDRC की ओर से फीडबैक लिया गया तो पुलिस के अनुसार दोनों साथ रह रहे थे। इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात केवल यह नहीं कि एक FIR नहीं हुई, बल्कि यह है कि दो बच्चों वाले परिवार को टूटने से पहले संवाद का एक अवसर मिला। Noida News
FDRC की भूमिका को लेकर 18 सितंबर 2026 को भी महत्वपूर्ण गतिविधि हुई। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने थाना नॉलेज पार्क परिसर में FDRC के नवीनीकृत कक्ष का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष बबीता सिंह चौहान की मौजूदगी भी रही। इसके बाद शारदा यूनिवर्सिटी में FDRC के वार्षिक कार्यक्रम में पारिवारिक विवादों के समाधान, महिला सुरक्षा और काउंसलिंग की भूमिका पर चर्चा हुई। रिपोर्टों के अनुसार इस व्यवस्था को पुलिस, विधि विशेषज्ञों, काउंसलर्स और शिक्षण संस्थान के समन्वय से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने इस अवसर पर पारिवारिक विवादों को पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण क्षेत्र बताते हुए संवाद और विशेषज्ञ सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया। Noida News
भारत के ग्रामीण समाज में लंबे समय से पंचायत या समाज के जिम्मेदार लोगों के माध्यम से पारिवारिक विवादों को बातचीत से सुलझाने की परंपरा रही है। इसका उद्देश्य कई बार मुकदमे से पहले दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाकर समाधान तलाशना रहा है। आज का शहरी समाज उस पारंपरिक सामाजिक ढांचे से काफी अलग है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में परिवार अलग-अलग राज्यों और सामाजिक पृष्ठभूमियों से आकर बसे हैं। पड़ोसी अक्सर एक-दूसरे को जानते तक नहीं। ऐसे में पारंपरिक सामाजिक मध्यस्थता की जगह कई मामलों में संस्थागत काउंसलिंग की जरूरत पड़ती है। FDRC इसी खाली जगह को भरने का प्रयास करता दिखाई देता है। यहां पुलिस के साथ प्रोफेशनल काउंसलर, विधि विशेषज्ञ और मनोविज्ञान से जुड़े विशेषज्ञ विवाद को समझने और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कराने में भूमिका निभाते हैं। Noida News
पारिवारिक विवादों में समझौता हमेशा समाधान नहीं होता। जहां घरेलू हिंसा, गंभीर अपराध, दहेज उत्पीड़न या किसी व्यक्ति की सुरक्षा का वास्तविक खतरा हो, वहां कानून के तहत कार्रवाई का महत्व बना रहता है। काउंसलिंग का उद्देश्य किसी पीड़ित को उसकी इच्छा के विरुद्ध समझौते के लिए बाध्य करना नहीं हो सकता। इसलिए FDRC की वास्तविक सफलता केवल इस बात से नहीं मापी जानी चाहिए कि कितने मामलों में FIR नहीं हुई, बल्कि इस बात से भी कि कितने मामलों में सुरक्षित, स्वैच्छिक और टिकाऊ समाधान निकला। यही कारण है कि काउंसलिंग और कानूनी कार्रवाई दोनों को परिस्थितियों के अनुसार साथ लेकर चलना महत्वपूर्ण है। Noida News
पति-पत्नी के बीच लंबे समय तक चलने वाला विवाद सबसे ज्यादा प्रभावित कई बार बच्चों को करता है। घरेलू तनाव का असर उनकी पढ़ाई, व्यवहार, मानसिक सुरक्षा और सामाजिक विकास पर पड़ सकता है। FDRC से जुड़ी साझा की गई कहानी में भी दो बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए दंपती के रिश्ते को संभालने की कोशिश की गई। यानी यहां विवाद केवल दो वयस्कों के बीच नहीं था। उसके साथ अगली पीढ़ी का भविष्य भी जुड़ा था। Noida News
FDRC की सबसे बड़ी चुनौती भी यही है। एक तरफ ऐसे परिवार हैं जहां गलतफहमी, गुस्सा, संवादहीनता या तनाव को काउंसलिंग से दूर किया जा सकता है। दूसरी तरफ ऐसे मामले भी हो सकते हैं जहां महिला या किसी अन्य सदस्य की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए कानूनी कार्रवाई जरूरी हो। इसलिए एक संवेदनशील व्यवस्था में 'परिवार बचाना' और 'पीड़ित की सुरक्षा' दोनों को साथ लेकर चलना आवश्यक है। गौतमबुद्धनगर पुलिस द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़े बताते हैं कि वर्तमान व्यवस्था में अधिकांश निस्तारित मामलों में काउंसलिंग और मध्यस्थता का इस्तेमाल किया गया, जबकि 57 मामलों में अभियोग दर्ज हुआ। Noida News
पुलिस की आम छवि अक्सर अपराध, गिरफ्तारी, मुकदमे और कानून-व्यवस्था से जुड़ी होती है। लेकिन परिवार के विवाद में पुलिस के सामने चुनौती अलग होती है। यहां सामने वाला व्यक्ति अपराधी नहीं, कई बार वही पति, पत्नी, पिता, मां या भाई होता है जिसके साथ परिवार का दूसरा सदस्य वर्षों से जीवन साझा कर रहा होता है। ऐसे मामलों में कानून के साथ-साथ संवाद की जरूरत पड़ती है। FDRC की व्यवस्था इसी बदलती जरूरत की ओर संकेत करती है। नोएडा और ग्रेटर नोएडा जैसे शहरों में अगर परिवारों के छोटे विवाद समय रहते बातचीत की मेज पर आ जाएं, तो कई बड़े विवादों को आगे बढ़ने से रोका जा सकता है। गौतमबुद्धनगर में 1,014 प्रार्थना पत्रों का आंकड़ा यह भी बताता है कि पारिवारिक विवाद कोई छोटी सामाजिक समस्या नहीं है। इसके लिए संस्थागत व्यवस्था की आवश्यकता है। और 906 मामलों का निस्तारण यह दिखाता है कि इस व्यवस्था का इस्तेमाल बड़ी संख्या में परिवार कर रहे हैं। Noida News
FDRC के आंकड़े निश्चित रूप से ध्यान खींचते हैं, लेकिन इसकी दीर्घकालीन सफलता का सबसे महत्वपूर्ण पैमाना होगा—कितने परिवारों में समझौता लंबे समय तक कायम रहा। क्या दोबारा विवाद नहीं हुआ? क्या महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित रही? क्या शराब, हिंसा और दहेज जैसी विवाद की मूल वजहों पर काम हुआ? और क्या समझौता दोनों पक्षों की स्वतंत्र सहमति से हुआ? इन सवालों के जवाब आने वाले समय में इस मॉडल की वास्तविक तस्वीर को और स्पष्ट करेंगे।फिलहाल इतना जरूर कहा जा सकता है कि गौतमबुद्धनगर पुलिस ने पारिवारिक विवादों के मामले में केवल 'कार्रवाई' की जगह 'संवाद' को भी पुलिसिंग का हिस्सा बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। जहां एक तरफ अपराध के खिलाफ सख्ती जरूरी है, वहीं दूसरी तरफ टूटते रिश्तों के बीच बातचीत की जगह बनाना भी सामाजिक शांति की दिशा में महत्वपूर्ण काम हो सकता है। नोएडा में पुलिस की यह पहल इसी सवाल के साथ सामने है हर पारिवारिक विवाद का अंत थाने और अदालत में हो, या कुछ विवादों को समय रहते बातचीत की मेज पर बैठाकर भी बचाया जा सकता है? FDRC का प्रयोग फिलहाल इसी दूसरे रास्ते को संस्थागत रूप देने की कोशिश है। Noida News
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