नोएडा में 16 वर्षीय गर्भवती किशोरी की सुरक्षा और इलाज को लेकर गंभीर चिंता सामने आई है। किशोरी की मां ने पुलिस और अस्पताल से जुड़ी परेशानियों का आरोप लगाते हुए पुलिस कमिश्नर डॉ. लक्ष्मी सिंह से मदद की गुहार लगाई है।

Noida News : गौतमबुद्ध नगर में एक 16 वर्षीय गर्भवती किशोरी की सुरक्षा, समुचित चिकित्सा और कानूनी सहायता का मामला सामने आया है। किशोरी की मां की ओर से उठाई गई गंभीर चिंताओं को लेकर सामाजिक संस्था नोएडा लोकमंच ने पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह से तत्काल हस्तक्षेप करने की अपील की है। संस्था ने किशोरी और उसके गर्भस्थ शिशु की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए पुलिस तथा सरकारी अस्पताल के बीच तत्काल समन्वय स्थापित कराने की मांग की है। 17 अक्टूबर 2026 को पुलिस कमिश्नर को संबोधित पत्र में किशोरी की मां श्रीमती प्रमिला सोरेन ने अपनी बेटी की स्थिति का उल्लेख करते हुए आवश्यक पुलिस कार्रवाई, प्रसूति संबंधी चिकित्सा, जांच और बाल संरक्षण सहायता उपलब्ध कराने की गुहार लगाई है। पत्र में कहा गया है कि मामले में देरी होने से मां और गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा हो सकता है। Noida News
पत्र के अनुसार, श्रीमती प्रमिला सोरेन के पति का वर्ष 2021 में निधन हो गया था। वह पिछले लगभग 12 वर्षों से नोएडा में रहकर अपना जीवनयापन कर रही हैं। उनकी 16 वर्षीय बेटी रोज किस्कू झारखंड के पाकुड़ में अपनी दादी के साथ रह रही थी। मां की ओर से दिए गए विवरण के मुताबिक, किशोरी के एक अन्य नाबालिग लड़के के साथ संबंध के कारण वह गर्भवती हो गई। बेटी की सुरक्षा और स्वास्थ्य को लेकर गंभीर चिंता के बाद मां 10 अक्टूबर 2026 को उसे नोएडा लेकर आईं, ताकि उसे आवश्यक चिकित्सा और देखभाल मिल सके।
परिवार की आर्थिक स्थिति सीमित होने और मां के विधवा होने के कारण यह परिस्थिति उनके लिए और भी कठिन हो गई है। अब मां अपनी नाबालिग बेटी के स्वास्थ्य, सुरक्षा और आने वाले भविष्य को लेकर प्रशासन से मदद मांग रही हैं। Noida News
पुलिस कमिश्नर को दिए गए पत्र में मां ने बताया है कि उनकी बेटी लगभग 34 सप्ताह की गर्भवती है। उनके अनुसार, गर्भावस्था के दौरान किशोरी को पर्याप्त चिकित्सकीय देखभाल, पोषण और आवश्यक दवाएं नहीं मिल सकीं। नोएडा में कराई गई शुरुआती रक्त जांच के परिणामों को भी उन्होंने चिंताजनक बताया है। पत्र में यह भी उल्लेख है कि किशोरी को आवश्यक अल्ट्रासाउंड और समुचित उपचार नहीं मिल पाने से परिवार की चिंता बढ़ गई है। मां ने आशंका जताई है कि समय पर चिकित्सा सहायता नहीं मिलने से किशोरी और उसके गर्भस्थ शिशु के स्वास्थ्य पर गंभीर असर पड़ सकता है। ऐसे मामले में सबसे पहली प्राथमिकता किशोरी की चिकित्सकीय स्थिति का विशेषज्ञों से तत्काल आकलन कराना और चिकित्सकीय जरूरत के अनुसार सुरक्षित उपचार उपलब्ध कराना है। चिकित्सा सहायता के लिए जरूरी कानूनी प्रक्रिया भी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ पूरी की जानी चाहिए। Noida News
श्रीमती प्रमिला सोरेन के पत्र के मुताबिक, उन्होंने अपनी बेटी को ग्रेटर नोएडा स्थित GIMS में चिकित्सा सहायता दिलाने के लिए कई बार प्रयास किया। उनके अनुसार, अस्पताल की ओर से मेडिको-लीगल प्रक्रिया का हवाला देते हुए पुलिस से संपर्क करने के लिए कहा गया। मां ने पत्र में दावा किया है कि वह पहले कासना थाने पहुंचीं, जहां से उन्हें क्षेत्राधिकार के आधार पर थाना फेस-2 भेज दिया गया। उनका आरोप है कि थाना फेस-2 में थाना प्रभारी राघवेंद्र सिंह से मिलने के बाद भी उन्हें तत्काल शिकायत दर्ज कराने में अपेक्षित सहायता नहीं मिली और पुलिस कमिश्नर कार्यालय से संपर्क करने की सलाह दी गई। पत्र के अनुसार, इसके बाद GIMS में दोबारा जाने पर कुछ रक्त जांच की गईं, लेकिन आवश्यक अल्ट्रासाउंड और समुचित उपचार उपलब्ध नहीं हो सका। ये विवरण शिकायतकर्ता की ओर से लगाए गए आरोप हैं। इस संबंध में संबंधित पुलिस अधिकारियों, अस्पताल प्रशासन और अन्य जिम्मेदार पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है। यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अब तक शिकायत पर क्या कार्रवाई हुई है और किशोरी को किस स्तर की चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई गई है। Noida News
नोएडा लोकमंच की ओर से उठाए गए इस मामले में पुलिस कमिश्नर डॉ. लक्ष्मी सिंह से तत्काल हस्तक्षेप की अपील की गई है। मां के पत्र में मुख्य रूप से तीन मांगें रखी गई हैं।
1. शिकायत पर नियमानुसार कार्रवाई और प्राथमिकी पर निर्णय: संबंधित पुलिस अधिकारियों को शिकायत प्राप्त कर नियमानुसार आवश्यक प्राथमिकी दर्ज करने तथा उचित कानूनी कार्रवाई शुरू करने के निर्देश दिए जाएं, ताकि क्षेत्राधिकार के कारण आगे देरी न हो।
2. सरकारी अस्पताल और पुलिस के बीच तत्काल समन्वय: संबंधित सरकारी अस्पताल और पुलिस के बीच समन्वय स्थापित कराया जाए, जिससे किशोरी को बिना अनावश्यक देरी के प्रसूति संबंधी चिकित्सा, जरूरी जांच और उपचार मिल सके।
3. नाबालिग की सुरक्षा, गरिमा और गोपनीयता: किशोरी की पहचान, सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करते हुए आवश्यक बाल संरक्षण सहायता उपलब्ध कराई जाए।
मां ने पत्र में यह भी कहा है कि वह किसी कानूनी प्रक्रिया से बचना नहीं चाहतीं और पुलिस, बाल कल्याण समिति (CWC), चिकित्सा अधिकारियों तथा प्रशासन की ओर से निर्धारित वैधानिक प्रक्रियाओं में पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं। Noida News
यह मामला केवल एक परिवार की परेशानी तक सीमित नहीं है। इसमें एक नाबालिग की सुरक्षा, संभावित यौन अपराध की जांच, गर्भावस्था से जुड़ी चिकित्सा जरूरतें और सरकारी तंत्र के बीच समन्वय जैसे गंभीर पहलू शामिल हैं। यदि शिकायत में वर्णित परिस्थितियां सही पाई जाती हैं, तो यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पीड़ित परिवार को समय पर पुलिस सहायता और चिकित्सा सुविधा क्यों नहीं मिल सकी। साथ ही, जांच के दौरान किशोरी की निजता और मानसिक सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देना जरूरी है। किशोरी की उम्र और गर्भावस्था को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को मामले की संवेदनशीलता के अनुरूप तत्काल कदम उठाने चाहिए। पुलिस को शिकायत पर कानून के अनुसार कार्रवाई करनी चाहिए, जबकि चिकित्सा अधिकारियों को उसकी मौजूदा स्थिति का आकलन कर आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने पर ध्यान देना चाहिए। Noida News
विज्ञापन