नोएडा के प्रसिद्ध पुरोहित को जौनपुर बुलाकर बंधक बनाने और एक लाख रुपये की फिरौती मांगने का मामला सामने आया है। सेक्टर-113 पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। सोशल मीडिया पर वायरल पुरोहित की आपबीती के बाद मामले ने तूल पकड़ा।

Noida News : पूजा-पाठ और धार्मिक अनुष्ठान के बाद मनोकामना पूरी न होने पर किसी पुरोहित को ही अगवा कर लिया जाए और उससे एक लाख रुपये की फिरौती मांगी जाए, नोएडा से सामने आई यह घटना जितनी हैरान करने वाली है, उतनी ही कई गंभीर सवाल भी खड़े करती है। नोएडा शहर के थाना सेक्टर-113 पुलिस ने पुरोहित के अपहरण और उसे बंधक बनाकर फिरौती मांगने के मामले में दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। नोएडा के इस मामले की मामले की खास बात यह है कि यह घटना पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बनी हुई थी। सोशल मीडिया पर सामने आई जानकारी और पीड़ित पुरोहित अनिल तिवारी की व्यथा ने लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा था। अब पुलिस द्वारा दो आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले की परतें खुलने लगी हैं।
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प्राप्त जानकारी के अनुसार नोएडा निवासी पुरोहित से आरोपियों ने धार्मिक पूजा-अनुष्ठान कराया था। आरोप है कि पूजा-अनुष्ठान कराने के बावजूद उनकी मुराद पूरी नहीं हुई। इसके बाद आरोपियों ने कथित तौर पर पुरोहित को दोबारा जौनपुर बुलाया। पुरोहित को शायद अंदाजा भी नहीं रहा होगा कि धार्मिक अनुष्ठान के नाम पर बुलाया जाना उसके लिए एक भयावह अनुभव में बदल जाएगा। आरोप है कि जौनपुर पहुंचने के बाद पुरोहित को बंधक बना लिया गया। इसके बाद उसे छोड़ने के बदले एक लाख रुपये की मांग की गई। बताया जा रहा है कि आरोपियों का तर्क था कि पूजा-अनुष्ठान में जो रकम खर्च हुई थी, उसे वापस लिया जाना चाहिए। यानी जिस व्यक्ति को धार्मिक अनुष्ठान कराने के लिए बुलाया गया था, वही व्यक्ति बाद में अपहरण और रंगदारी की मांग का शिकार बन गया। Noida News
इस पूरे मामले ने उस समय ज्यादा तूल पकड़ा जब सोशल मीडिया पर पीड़ित पुरोहित से जुड़ी जानकारी सामने आई। पुरोहित की आपबीती ने लोगों को झकझोर दिया। एक धार्मिक कर्मकांड कराने वाले व्यक्ति के साथ इस तरह का व्यवहार किए जाने को लेकर सोशल मीडिया पर भी तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आईं। मामले की गंभीरता इसलिए भी बढ़ गई क्योंकि यह केवल पैसे के विवाद का मामला नहीं था, बल्कि इसमें एक व्यक्ति को कथित तौर पर उसकी इच्छा के विरुद्ध बंधक बनाए जाने और उसके परिजनों से रकम की मांग किए जाने का आरोप सामने आया। Noida News
मामले में थाना सेक्टर-113 पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस की कार्रवाई के बाद अब इस बात की जांच की जा रही है कि घटना में कौन-कौन लोग शामिल थे और अपहरण की पूरी योजना किस तरह बनाई गई। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच आगे बढ़ रही है। Noida News
इस घटना ने पुलिस की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। पीड़ित पक्ष की ओर से यह दावा किया गया कि पुरोहित घटना के बाद अपनी शिकायत लेकर थाना सेक्टर-113 के चक्कर काटता रहा। यदि शिकायत मिलने के बावजूद पीड़ित को तत्काल राहत नहीं मिली, तो यह गंभीर जांच का विषय होना चाहिए कि उसकी शिकायत पर पुलिस ने क्या कार्रवाई की, कब कार्रवाई की और मामले को गंभीरता से लेने में कितना समय लगा। हालांकि, थाना प्रभारी पर अवैध धंधों से वसूली या उगाही में व्यस्त रहने जैसे आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी सामने नहीं आई है। इसलिए इन आरोपों की भी निष्पक्ष जांच आवश्यक है। Noida News
किसी भी नागरिक के लिए पुलिस थाना न्याय की पहली उम्मीद होता है। यदि कोई व्यक्ति अपहरण, बंधक बनाए जाने अथवा रंगदारी मांगने जैसी गंभीर घटना के बाद थाने पहुंचता है तो उसकी शिकायत पर तत्काल कार्रवाई होना पुलिस की प्राथमिक जिम्मेदारी है। ऐसे में इस मामले में यह सवाल स्वाभाविक रूप से उठता है कि पीड़ित पुरोहित ने पुलिस से कब संपर्क किया? उसकी शिकायत पर तत्काल क्या कार्रवाई की गई? आरोपियों तक पुलिस कब पहुंची? और यदि सोशल मीडिया पर मामला पहले से चर्चा में था तो पुलिस ने इसका संज्ञान कब लिया? इन सवालों का स्पष्ट जवाब सामने आना जरूरी है। Noida News
इस घटना का एक दूसरा पहलू भी है। धार्मिक पूजा-अनुष्ठान आस्था का विषय हैं। किसी अनुष्ठान के बाद अपेक्षित परिणाम न मिलने पर पुरोहित को जिम्मेदार ठहराकर उसका अपहरण कर लेना कानून और सामाजिक व्यवस्था दोनों के लिए गंभीर चेतावनी है। यदि किसी व्यक्ति को पूजा-अनुष्ठान से संबंधित कोई शिकायत है तो उसके लिए कानूनी और सामाजिक रास्ते खुले हैं। लेकिन किसी व्यक्ति को बंधक बनाना और पैसे की मांग करना किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकता। Noida News
फिलहाल सेक्टर-113 पुलिस ने दो आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। अब पुलिस की जांच से यह स्पष्ट होगा कि घटना के पीछे वास्तविक विवाद क्या था, आरोपियों की भूमिका क्या थी और क्या इस वारदात में अन्य लोग भी शामिल थे। साथ ही यह भी महत्वपूर्ण होगा कि पुलिस पीड़ित पुरोहित की शिकायत और सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों की भी निष्पक्ष जांच करे, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना से पहले और बाद में पुलिस की भूमिका क्या रही। नोएडा में सामने आया यह मामला केवल एक पुरोहित के अपहरण का मामला नहीं है। यह पुलिस व्यवस्था, नागरिक सुरक्षा और धार्मिक आस्था के नाम पर होने वाले विवादों से जुड़े कई सवाल एक साथ खड़े करता है। अब निगाह इस बात पर है कि पुलिस जांच में इस पूरे मामले का सच कब और कितना सामने आता है। Noida News
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