नोएडा के सेक्टर-61 स्थित रामा अस्पताल में पुष्पा देवी की उपचार के दौरान हुई मौत का मामला गंभीर सवालों के घेरे में है। परिवार ने अस्पताल के चिकित्सकों और प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही के आरोप लगाए हैं।

Noida News : पूरी दुनिया में डॉक्टरों को भगवान माना जाता है। भगवान माने जाने वाले डॉक्टर ही किसी मरीज की जान ले ले तो उन्हें डॉक्टर नहीं हत्यारा ही कहा जाएगा। ऐसा ही एक सनसनीखेज मामला नोएडा शहर में प्रकाश में आया है। नोएडा शहर के सेक्टर-61 में स्थापित रामा अस्पताल के डॉक्टरों के ऊपर एक बेटे ने अपनी माँ की जान ले लेने का बड़ा आरोप लगाया है।
आपको बता दें कि सेक्टर-63 के छजारसी गांव की रहने वाली 52 वर्षीय पुष्पा देवी की रामा अस्पताल, सेक्टर-61 नोएडा में उपचार के दौरान हुई मौत का मामला अब गंभीर सवालों के घेरे में है। पुष्पा देवी के बेटे मोहित शर्मा ने अस्पताल के चिकित्सकों और प्रबंधन पर उपचार में लापरवाही बरतने तथा उनकी मां की स्थिति बिगड़ने के बावजूद समय पर उचित उपचार नहीं देने के गंभीर आरोप लगाए हैं। मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि गौतमबुद्धनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी की ओर से गठित जांच समिति की जांच आख्या में भी मरीज के CECT कराए जाने, दस्तावेजी रिकॉर्ड और उपचार के दौरान कुछ प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर कमियां दर्ज की गई हैं। मोहित शर्मा अब अपनी मां की मौत की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच, जिम्मेदार चिकित्सकों एवं अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ कार्रवाई तथा अस्पताल के रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज को सुरक्षित कराए जाने की मांग कर रहे हैं।
परिजनों के अनुसार पुष्पा देवी को 14 अप्रैल 2026 को हल्के बुखार और उल्टी की शिकायत के बाद रामा अस्पताल, सेक्टर-61, नोएडा में भर्ती कराया गया था। परिवार का कहना है कि भर्ती किए जाने के बाद उनका उपचार शुरू हुआ और उनकी स्थिति में सुधार दिखाई दे रहा था। मोहित शर्मा के अनुसार मेडिसिन विभाग की चिकित्सक डॉ. श्रुति श्री उनकी मां का उपचार कर रही थीं। परिवार को बताया गया था कि उनकी तबीयत में सुधार हो रहा है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है। यहीं से परिवार के आरोपों के अनुसार पूरा मामला अचानक बदल गया। मोहित शर्मा का आरोप है कि उनकी मां की हालत में सुधार होने के बावजूद उनकी जानकारी और कथित तौर पर उपचार कर रही चिकित्सक की सहमति के बिना CECT (Contrast Enhanced CT) कराया गया। परिजनों ने आरोप लगाया कि 15 अप्रैल को CECT कराने के बाद पुष्पा देवी की हालत अचानक बिगड़ने लगी। परिवार का कहना है कि इसके बाद उन्होंने अस्पताल में मौजूद चिकित्सकों एवं स्टाफ से मदद मांगी, लेकिन उन्हें अपेक्षित समय पर उपचार नहीं मिला। हालांकि, इस पूरे घटनाक्रम में सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज 29 मई 2026 को तैयार की गई CMO जांच समिति की आख्या है।
नोएडा के CMO ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि मरीज का CECT Abdomen primary physician डॉ. श्रुति श्री की सहमति के बिना कराया गया। मरीज को वार्ड से रेडियोलॉजी ले जाने से संबंधित referred slip रिकॉर्ड में नहीं मिली। CECT के दौरान दिए जाने वाले testing dose के प्रमाण दस्तावेजों में नहीं मिले। CECT के बाद मरीज के वार्ड में पहुंचने पर हालत बिगड़ने के बाद दिए गए उपचार में विलंब प्रतीत होने की बात जांच समिति ने दर्ज की। नर्सिंग नोट्स में sedation का उल्लेख मिला, लेकिन उसके लिए किसी डॉक्टर के आदेश का रिकॉर्ड नहीं मिला। जांच समिति ने यह भी दर्ज किया कि अस्पताल प्रशासन और treating physician की ओर से जांच सहयोग नहीं मिला और मांगे गए दस्तावेज अपूर्ण रूप से उपलब्ध कराए गए।
परिवार के मुताबिक CECT के बाद पुष्पा देवी की तबीयत तेजी से बिगड़ने लगी। हालत गंभीर होने पर परिजन उन्हें रामा अस्पताल से गाजियाबाद स्थित यशोदा मेडिसिटी अस्पताल लेकर गए। मोहित शर्मा के अनुसार 16 अप्रैल 2026 को यशोदा मेडिसिटी में उनकी मां की मौत हो गई। मां की मौत के बाद से परिवार लगातार यह सवाल उठा रहा है कि जब अस्पताल में उपचार के दौरान मरीज की हालत में सुधार बताया जा रहा था, तो अचानक CECT क्यों कराया गया और उसके बाद मरीज की स्थिति बिगड़ने पर तत्काल और प्रभावी उपचार क्यों नहीं दिया गया?
मोहित शर्मा ने अधिकारियों को दिए अपने शिकायती पत्र में बेहद भावुक शब्दों में अपनी मां की मौत का दर्द व्यक्त किया है। उनका कहना है कि उनकी मां परिवार की सबसे बड़ी ताकत थीं और उनकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है। उनका आरोप है कि यदि समय पर सही उपचार और चिकित्सकीय निर्णय लिया जाता तो शायद उनकी मां की जान बचाई जा सकती थी। हालांकि, यह तय करना कि पुष्पा देवी की मौत का प्रत्यक्ष कारण क्या था और क्या किसी चिकित्सकीय प्रक्रिया या उपचार में हुई कथित कमी का उनकी मौत से सीधा संबंध था, विशेषज्ञ चिकित्सकीय जांच और कानूनी प्रक्रिया का विषय है।
मोहित शर्मा ने अधिकारियों से मांग की है कि मामले से संबंधित अस्पताल के सभी रिकॉर्ड सुरक्षित कराए जाएं। उनका कहना है कि अस्पताल में लगे CCTV कैमरों की फुटेज भी महत्वपूर्ण साक्ष्य हो सकती है। परिवार की मांग है कि अस्पताल के CCTV फुटेज, मेडिकल रिकॉर्ड, नर्सिंग नोट्स, दवाओं का रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट, CECT से संबंधित दस्तावेज और मरीज को रेडियोलॉजी ले जाने से संबंधित सभी रिकॉर्ड तत्काल सुरक्षित कराए जाएं। परिवार को आशंका है कि महत्वपूर्ण रिकॉर्ड में बदलाव या उनके नष्ट होने की स्थिति में मामले की निष्पक्ष जांच प्रभावित हो सकती है। इस मामले को गंभीर बनाने वाली सबसे महत्वपूर्ण बात यही है कि शिकायत के बाद गौतमबुद्धनगर के मुख्य चिकित्सा अधिकारी के स्तर से जांच समिति गठित की गई और समिति ने अपनी रिपोर्ट में कई प्रक्रियात्मक एवं दस्तावेजी कमियां दर्ज कीं। लेकिन जांच आख्या ने खुद यह कहते हुए अंतिम निष्कर्ष देने से इनकार किया है कि अस्पताल की ओर से मांगे गए दस्तावेज पूरे उपलब्ध नहीं कराए गए। यही वजह है कि अब परिवार उच्चस्तरीय और स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है। मोहित शर्मा का कहना है कि उन्हें केवल यह जानना है कि उनकी मां के साथ अस्पताल में उस दिन आखिर हुआ क्या था और उनकी हालत बिगड़ने के पीछे वास्तविक चिकित्सकीय कारण क्या था।
मोहित शर्मा ने मामले में पुलिस से भी शिकायत की है। उन्होंने आरोप लगाया है कि उपचार में हुई कथित लापरवाही के लिए जिम्मेदार चिकित्सकों, अस्पताल प्रशासन और अन्य संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत मुकदमा दर्ज किया जाए। उन्होंने अस्पताल के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की है और दोष सिद्ध होने की स्थिति में जिम्मेदार चिकित्सकों के लाइसेंस तथा अस्पताल के लाइसेंस पर भी नियमानुसार कार्रवाई किए जाने की मांग की है। परिवार का कहना है कि यह लड़ाई केवल पुष्पा देवी के लिए नहीं है, बल्कि उन तमाम मरीजों और परिवारों के लिए भी है जो अस्पतालों में इलाज के लिए पहुंचते हैं और चिकित्सकीय फैसलों तथा अस्पताल की व्यवस्था पर भरोसा करते हैं।
पुष्पा देवी की मौत के मामले में फिलहाल कई सवालों के जवाब सामने आना बाकी हैं।
जब मरीज की हालत में सुधार बताया जा रहा था तो CECT कराने का चिकित्सकीय आधार क्या था?
क्या CECT कराने से पहले मरीज के परिजनों की उचित सहमति ली गई थी?
मरीज को रेडियोलॉजी ले जाने की प्रक्रिया का रिकॉर्ड कहां है?
CECT से पहले testing dose दिए जाने का रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला?
नर्सिंग रिकॉर्ड में sedation दर्ज होने के बावजूद डॉक्टर के आदेश का रिकॉर्ड क्यों नहीं मिला?
CECT के बाद मरीज की हालत बिगड़ने पर उपचार में कथित देरी क्यों हुई?
और सबसे महत्वपूर्ण सवाल— क्या अस्पताल में हुई कथित प्रक्रियात्मक एवं उपचार संबंधी कमियों का पुष्पा देवी की मौत से कोई चिकित्सकीय संबंध था? इन सवालों का जवाब केवल निष्पक्ष विशेषज्ञ जांच से ही सामने आ सकता है।
चेतना मंच का स्पष्ट मत है कि किसी भी अस्पताल अथवा चिकित्सक को केवल आरोपों के आधार पर दोषी नहीं ठहराया जा सकता। लेकिन जब किसी मरीज की उपचार के दौरान मृत्यु हो और सरकारी जांच समिति अपनी रिपोर्ट में महत्वपूर्ण प्रक्रियात्मक एवं दस्तावेजी कमियां दर्ज करे, तो पूरे मामले की निष्पक्ष, स्वतंत्र और उच्चस्तरीय जांच बेहद जरूरी हो जाती है। मोहित शर्मा की मांग है कि उन्हें उनकी मां की मौत का सच बताया जाए। अब देखना यह है कि संबंधित स्वास्थ्य विभाग और पुलिस इस मामले में आगे क्या कार्रवाई करते हैं और क्या पुष्पा देवी की मौत से जुड़े अनुत्तरित सवालों का जवाब परिवार को मिल पाता है। Noida News :
विज्ञापन