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नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में आकर रहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नोएडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मकान तथा फ्लैट खरीदे तथा बेचे जा रहे हैं। इस दौरान नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में घर खरीद कर उसे किराए पर उठाने तथा उस किराए से ईएमआई (EMI)चुकाने वाला फार्मूला सुपरहिट साबित हो रहा है

Noida News : नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में आकर रहने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में नोएडा क्षेत्र में बड़ी संख्या में मकान तथा फ्लैट खरीदे तथा बेचे जा रहे हैं। इस दौरान नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में घर खरीद कर उसे किराए परउठाने तथा उस किराए से ईएमआई (EMI)चुकाने वाला फार्मूला सुपरहिट साबित हो रहा है। प्रोपर्टी बाजार की जानकारी रखने वालों का दावा है कि इस सुपरहिट फार्मूले में सावधानी रखना बहुत ही जरूरी है। Noida News
नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में प्रोपर्टी बाजार के जानकारों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग बैंकों से लोन लेकर घर खरीदते हैं। उसी घर को किराए पर उठाकर बैंक की EMI भरते हैं। नोएडा में लम्बे अर्से से प्रोपर्टी का काम करने वाले सचिन कुमार बताते हैं कि यह फार्मूला कुछ लोगों के लिए सुपरहिट हो सकता है किन्तु हर किसी के लिए यह फार्मूला फायदेमंद नहीं है। सचिन कुमार का कहना है कि किराए से EMI चुकाने वाला फार्मूला देखने को जितना सरल लगता है वास्तव में उतना सरल है नहीं। उन्होंने बताया कि कई खरीदार यह मान लेते हैं कि किराया पूरी ईएमआई.... को आसानी से कवर कर देगा जबकि असल में ऐसा हर बार नहीं होता। कम रेंटल इनकम, कई महीनों तक घर खाली रहना, मेंटेनेंस खर्च, होम लोन का ब्याज, टैक्स और मार्केट में उतार-चढ़ाव जैसी चीजें आपके मुनाफे पर असर डाल सकती हैं। नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में हजारों फैक्ट्री, कॉर्पोरेट ऑफिस, कॉलेज और रोजगार के अन्य अवसर हैं, जिससे यहां बड़ी संख्या में लोग और छात्र आ रहे हैं। जाहिर है ऐसे में रेंटल डिमांड रेडी-टू-मूव घरों की डिमांड बढ़ती है। कई खरीदार अब प्रॉपर्टी को सिर्फ रहने की जगह नहीं बल्कि लंबे समय तक रेगुलर इनकम और फ्यूचर में अच्छे रिटर्न देने वाली एसेट के रूप में देख रहे हैं। उनके लिए यह फार्मूला सही साबित हो रहा है। Noida News
चलें इस प्रकार समझें कि यदि आपने नोएडा अथवा ग्रेटर नोएडा में 1 करोड़ रुपये का फ्लैट लिया, तो महीने का किराया करीब 25000 से 30000 रुपये मिल सकता है। वहीं, उसी घर पर अगर आपने करीब 80 लाख का लोन लिया है, तो EMI 65000 से 70000 रुपये तक हो सकती है। इस कंडीशन में साफ है कि किराया आपकी EMI का पूरा खर्च नहीं उठा पाता, बल्कि आधे से भी कम ही कवर करता है। इसलिए रेंट से EMI निकल जाएगी वाला फॉर्मूला यहां पूरी तरह फिट नहीं बैठता है। सचिन कुमार ने बताया कि खरीदार इस मॉडल में इसलिए भी इन्वेस्ट कर रहे हैं क्योंकि उन्हें उम्मीद होती है कि समय के साथ प्रॉपर्टी की कीमत बढ़ेगी। नोएडा और ग्रेटर नोएडा में पिछले कुछ सालों में प्रॉपर्टी के दाम 20 से 40 फीसदी तक बढ़े हैं। ऐसे में इन्वेस्टर्स सोचते हैं कि भले ही अभी किराया ईएमआई पूरी न करे लेकिन 5-7 साल बाद बेचने पर अच्छा मुनाफा मिल सकता है। सचिन कुमार ने बताया कि अगर आप ज्यादा डाउन पेमेंट करते हैं, तो ईएमआई 40-50 प्रतिशत कम हो जाती है और किराया उसका बड़ा हिस्सा कवर कर सकता है। हालांकि मिडिल-क्लास वर्ग के खरीदार जोकि 10-20 प्रतिशत डाउन पेमेंट करते हैं, उनके लिए यह सौदा अक्सर 'कैश-फ्लो नेगेटिव' बन जाता है, यानी हर महीने जेब से पैसा लगाना पड़ता है। Noida News
सचिन कुमार का कहना है कि नोएडा तथा ग्रेटर नोएडा में यह फार्मूला उन लोगों के लिए ज्यादा सही माना जाता है जिनकी इनकम फिक्स है और जो जरूरत पडऩे पर EMI खुद भर सकता है। यह तरीका खासकर उन खरीदारों के लिए बेहतर हो सकता है जो लंबे समय में प्रॉपर्टी बनाकर धन बढ़ाना चाहते हैं, रियल एस्टेट मार्केट के उतार-चढ़ाव को समझते हैं और उनके पास इमरजेंसी के लिए अलग से बचत भी मौजूद है। सचिन कुमार ने बताया कि यह मॉडल उन लोगों के लिए सही नहीं है, जो जल्दी मुनाफा चाहते हैं, जिनकी बचत सीमित है या जो ईएमआई चुकाने के लिए पूरी तरह किराये पर डिपेंड हैं। इसके अलावा जो लोग बार-बार शहर या नौकरी बदलते हैं या शॉर्ट टर्म में रिटर्न की उम्मीद रखते हैं, उनके लिए भी यह मॉडल जोखिम भरा साबित हो सकता है। Noida News
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