नोएडा प्राधिकरण ने जल क्षेत्र में फिर रचा कीर्तिमान, मिला बड़ा सम्मान

नोएडा ने जल संरक्षण और शोधित पानी के बेहतर उपयोग में एक बार फिर अपनी मिसाल कायम की है। शहरी जल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य के लिए नोएडा प्राधिकरण को ‘म्यूनिसिपल वाटर रीयूज इनिशिएटिव’ श्रेणी में ‘वॉटर वॉरियर्स’ सम्मान दिया गया है।

जल संरक्षण में नोएडा अव्वल
जल संरक्षण में नोएडा अव्वल
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 02:34 PM
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Noida News : नोएडा ने जल संरक्षण और शोधित पानी के बेहतर उपयोग में एक बार फिर अपनी मिसाल कायम की है। शहरी जल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य के लिए नोएडा प्राधिकरण को ‘म्यूनिसिपल वाटर रीयूज इनिशिएटिव’ श्रेणी में ‘वॉटर वॉरियर्स’ सम्मान दिया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी ने नोएडा प्राधिकरण को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। भारत सरकार और यूनेस्को के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में नोएडा की उपलब्धि ने साफ कर दिया कि शहर अब जल पुन: उपयोग और सतत विकास के मॉडल के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।

सम्मान समारोह में प्राधिकरण की टीम ने लिया अवॉर्ड

नई दिल्ली के होटल ललित में आयोजित इस सम्मान समारोह में नोएडा प्राधिकरण की ओर से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल और जल एवं विद्युत यांत्रिकी विभाग के महाप्रबंधक आर.पी. सिंह ने अपनी टीम के साथ पुरस्कार ग्रहण किया। इस अवसर पर नोएडा को स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह पहला अवसर नहीं है जब नोएडा के जल प्रबंधन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली हो। इससे पहले भी नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग को अपने नवाचारों और प्रभावी कार्यशैली के लिए सम्मान मिल चुका है। खास बात यह है कि नोएडा ने केवल जल संरक्षण की बात नहीं की, बल्कि शोधित जल के व्यवस्थित और उपयोगी पुनर्प्रयोग का एक मजबूत मॉडल भी प्रस्तुत किया है। दरअसल, नोएडा के विभिन्न एसटीपी प्लांटों से इस समय करीब 260 एमएलडी शोधित जल उपलब्ध हो रहा है। इसमें से लगभग 90 एमएलडी पानी का इस्तेमाल हरित पट्टियों, पार्कों, गोल्फ कोर्स, वेटलैंड, निर्माण कार्यों, अग्निशमन, तालाबों और सड़कों पर छिड़काव जैसे कामों में किया जा रहा है। इस पहल ने नोएडा को जल पुनर्चक्रण के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।

नोएडा का मॉडल बना प्रेरक उदाहरण

नोएडा के सेक्टर-54 में एक पुराने अपशिष्ट स्थल को उपयोगी बनाते हुए लगभग 20 एमएलडी शोधित जल से सुंदर वेटलैंड विकसित किया गया है। यह वेटलैंड अब केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यहां अनेक प्रकार के जलीय जीव-जंतु भी प्राकृतिक रूप से निवास कर रहे हैं। यह प्रयास बताता है कि नोएडा किस तरह शहरी विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन साधने की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रहा है। शोधित जल के उपयोग को और अधिक बढ़ाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 125 एमएलडी जल उपयोग का लक्ष्य तय किया है। इस उपलब्धि से नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। जल संरक्षण और पुन: उपयोग के क्षेत्र में नोएडा की यह सफलता दूसरे शहरों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है। Noida News

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नोएडा के इस व्यस्त रूट पर एलिवेटेड रोड को मिली रफ्तार, बनेगी नई DPR

नोएडा में लंबे समय से अटकी रजनीगंधा चौक से सेक्टर-57 चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान रोड-1 पर बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए नए सिरे से सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है।

नोएडा रजनीगंधा रोड प्रोजेक्ट
नोएडा रजनीगंधा रोड प्रोजेक्ट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 09:42 AM
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Noida News : नोएडा में लंबे समय से अटकी रजनीगंधा चौक से सेक्टर-57 चौराहे तक प्रस्तावित एलिवेटेड रोड परियोजना को लेकर एक बार फिर हलचल तेज हो गई है। नोएडा प्राधिकरण ने मास्टर प्लान रोड-1 पर बनने वाली इस महत्वपूर्ण परियोजना के लिए नए सिरे से सर्वे कराने की तैयारी शुरू कर दी है। इसके लिए आईआईटी को पत्र भेजकर मौजूदा परिस्थितियों के आधार पर ताजा सर्वेक्षण करने को कहा गया है। सर्वे रिपोर्ट मिलने के बाद इस परियोजना की नई डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) तैयार की जाएगी। अधिकारियों के मुताबिक, नोएडा में पिछले कुछ वर्षों के दौरान जमीनी हालात काफी बदल चुके हैं, इसलिए पुरानी डिजाइन और डीपीआर अब व्यावहारिक नहीं मानी जा रही। इसी वजह से एलिवेटेड रोड की पूरी योजना को फिर से तकनीकी नजरिए से परखा जाएगा। खास तौर पर नोएडा के रजनीगंधा चौराहे को इस परियोजना का सबसे जटिल हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि यहां पहले से नीचे अंडरपास और ऊपर मेट्रो कॉरिडोर मौजूद है।

रजनीगंधा चौराहे पर सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती

नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि नई डीपीआर तैयार करते समय सबसे ज्यादा ध्यान रजनीगंधा चौक के डिजाइन पर दिया जाएगा। अब यह देखा जाएगा कि एलिवेटेड रोड को मेट्रो लाइन के ऊपर से निकाला जा सकता है या फिर इसे दो हिस्सों में विकसित करना ज्यादा व्यवहारिक होगा। इसी तकनीकी व्यवहार्यता के आधार पर अंतिम खाका तैयार किया जाएगा। अधिकारियों ने बताया कि पहले भी इस परियोजना के लिए DPR बनाई जा चुकी थी, लेकिन मौजूदा ट्रैफिक, संरचनात्मक बदलाव और नोएडा के बढ़ते शहरी दबाव को देखते हुए अब नए सिरे से योजना तैयार करना जरूरी हो गया है।

दिल्ली-नोएडा ट्रैफिक को मिल सकती है बड़ी राहत

यदि यह एलिवेटेड रोड बनती है तो नोएडा आने-जाने वाले हजारों वाहन चालकों को सीधा फायदा मिलेगा। डीएनडी के पास से सेक्टर-57 चौराहे तक निर्बाध कनेक्टिविटी बनने से नोएडा के सेक्टर-57, 58, 59, 65, मामूरा और आसपास के इलाकों तक पहुंचना आसान हो जाएगा। यही नहीं, इस रूट का इस्तेमाल करने वाले लोग खोड़ा कॉलोनी के रास्ते गाजियाबाद की ओर भी सुगमता से आ-जा सकेंगे। इस परियोजना के पूरा होने पर ट्रैफिक सिग्नलों, बार-बार रुकने और जाम की समस्या से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। शुरुआती अनुमान के मुताबिक, नोएडा की इस महत्वाकांक्षी एलिवेटेड रोड परियोजना पर करीब 600 करोड़ रुपये खर्च हो सकते हैं।

पीक ऑवर में नोएडा की इस सड़क पर लगते हैं लंबे जाम

रजनीगंधा चौक से सेक्टर-12/22/56 तिराहे तक का मार्ग नोएडा के सबसे व्यस्त हिस्सों में गिना जाता है। सुबह दफ्तर जाने और शाम को लौटने के समय यहां ट्रैफिक का दबाव काफी बढ़ जाता है। सबसे ज्यादा परेशानी सेक्टर-22 चौड़ा मोड़ से सेक्टर-57 चौराहे तक दोनों दिशाओं में देखने को मिलती है। स्थानीय स्तर पर ऑटो की अव्यवस्थित आवाजाही, सड़क किनारे खड़े वाहन और कुछ हिस्सों में अनियोजित पार्किंग जाम की बड़ी वजह बनते हैं। सेक्टर-10 के सामने भी सड़क पर वाहनों के खड़े रहने से यातायात प्रभावित होता है। ऐसे में नोएडा के इस कॉरिडोर पर एलिवेटेड रोड को ट्रैफिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।

2015 में हुआ था शिलान्यास

इस परियोजना की सबसे अहम बात यह है कि इसका शिलान्यास करीब 11 साल पहले, वर्ष 2015 में किया गया था। उस समय उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने इस योजना की आधारशिला रखी थी। शुरुआती प्रस्ताव के मुताबिक, एलिवेटेड रोड को सेक्टर-10 से सेक्टर-12/22 तिराहे तक विकसित किया जाना था। आज भी सेक्टर-22 चौड़ा मोड़ के पास इस परियोजना से जुड़ा बोर्ड लगा हुआ है।

हालांकि, शिलान्यास के इतने वर्षों बाद भी नोएडा की यह महत्वाकांक्षी परियोजना जमीन पर नहीं उतर सकी। अब नए सर्वे और नई DPR के जरिए एक बार फिर उम्मीद जगी है कि शायद इस बार नोएडा को उसका बहुप्रतीक्षित एलिवेटेड कॉरिडोर मिल सके। Noida News

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नोएडा में मकान खरीदना पड़ सकता है महंगा, जल्द हो सकता है बड़ा फैसला

नोएडा में मकान, भूखंड, दुकान या व्यावसायिक संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आने वाले दिनों में खर्च बढ़ सकता है। नोएडा प्राधिकरण शहर में विभिन्न श्रेणियों की संपत्तियों की आवंटन दरों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रहा है।

नोएडा में बढ़ेंगे रेट
नोएडा में बढ़ेंगे रेट
locationभारत
userअभिजीत यादव
calendar24 Mar 2026 09:24 AM
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Noida News : नोएडा में मकान, भूखंड, दुकान या व्यावसायिक संपत्ति खरीदने की योजना बना रहे लोगों के लिए आने वाले दिनों में खर्च बढ़ सकता है। नोएडा प्राधिकरण शहर में विभिन्न श्रेणियों की संपत्तियों की आवंटन दरों में बढ़ोतरी की तैयारी कर रहा है। प्रस्ताव है कि नोएडा में आवासीय, औद्योगिक और संस्थागत संपत्तियों के रेट पांच से 10 प्रतिशत तक बढ़ाए जाएं, जबकि व्यावसायिक संपत्ति के दाम भी इस बार बढ़ सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, यह प्रस्ताव अप्रैल के पहले सप्ताह में होने वाली बोर्ड बैठक में रखा जाएगा। अगर इसे मंजूरी मिलती है, तो नोएडा में संपत्ति खरीदना ही नहीं, बल्कि ट्रांसफर और लीज से जुड़े शुल्क भी महंगे हो जाएंगे।

नोएडा में बाजार भाव और प्राधिकरण दरों के बीच बढ़ा अंतर

नोएडा प्राधिकरण ने पिछले साल की तरह इस बार भी आवंटन दरों की समीक्षा कराई है। इसके लिए बीते वर्ष के आवंटन रेट, सर्किल रेट और बाजार दरों का तुलनात्मक सर्वे कराया गया। जांच में पाया गया कि नोएडा के कई इलाकों में प्राधिकरण की दरें बाजार मूल्य से काफी कम हैं। इसी अंतर को कम करने के लिए नई दरों का प्रस्ताव तैयार किया गया है। प्राधिकरण का मानना है कि नोएडा में तेजी से बढ़ती मांग, इंफ्रास्ट्रक्चर विस्तार और निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी को देखते हुए संपत्ति दरों का पुनर्निर्धारण जरूरी हो गया है। सबसे अहम बात यह है कि इस बार नोएडा में व्यावसायिक संपत्ति के रेट में भी इजाफा करने की तैयारी है। पिछले चार-पांच वर्षों से इस श्रेणी की दरों में खास बदलाव नहीं किया गया था, लेकिन अब करीब पांच प्रतिशत तक बढ़ोतरी की संभावना जताई जा रही है। फिलहाल नोएडा में संपत्तियों को ए प्लस, ए, बी, सी, डी और ई श्रेणी में बांटा गया है। आवासीय भूखंडों की ए प्लस कैटेगरी में मौजूदा आवंटन दर लगभग 1.75 लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है, जबकि सबसे निचली श्रेणी में यह करीब 51 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है।

नोएडा में प्रॉपर्टी ट्रांसफर भी होगा महंगा

दरें बढ़ने का सीधा असर सिर्फ नई संपत्ति खरीदने वालों पर ही नहीं पड़ेगा, बल्कि नोएडा में संपत्ति के हस्तांतरण से जुड़े शुल्क भी बढ़ जाएंगे। यानी जो लोग प्राधिकरण की संपत्ति खरीदेंगे, बेचेंगे या ट्रांसफर कराएंगे, उन्हें पहले की तुलना में अधिक भुगतान करना पड़ सकता है। अधिकारियों का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव लागू होने के बाद नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में लागत का नया दबाव देखने को मिल सकता है। अधिकारियों के मुताबिक, जेवर में बन रहे नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के उद्घाटन के बाद एक या दो अप्रैल को बोर्ड बैठक बुलाने की तैयारी है। माना जा रहा है कि एयरपोर्ट परियोजना के आगे बढ़ने से नोएडा और आसपास के इलाकों में रियल एस्टेट की मांग और तेज होगी। यही वजह है कि प्राधिकरण अब नई दरों को लागू करने के लिए सही समय मान रहा है। यह बैठक नोएडा-ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण के चेयरमैन और अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार की अध्यक्षता में होने की संभावना है।

नोएडा की स्पोर्ट्स सिटी में बची जमीन पर भी हलचल

इस बीच नोएडा की स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं के आसपास बची जमीन को लेकर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं। शहर के पांच सेक्टरों में फैली स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं के बीच अब भी करीब दो लाख वर्ग मीटर जमीन खाली पड़ी बताई जा रही है। प्राधिकरण अब इस जमीन के आवंटन की प्रक्रिया आगे बढ़ाने के पक्ष में है। स्पष्ट संकेत दिए गए हैं कि नोएडा में यह जमीन पुराने नहीं, बल्कि मौजूदा रेट पर ही दी जाएगी। खासतौर पर सेक्टर-150 और सेक्टर-152 की स्पोर्ट्स सिटी परियोजनाओं में सबसे अधिक जमीन बची हुई है। बिल्डरों की ओर से मांग की जा रही है कि उन्हें यह अतिरिक्त जमीन वर्ष 2014 की दरों पर उपलब्ध कराई जाए, लेकिन नोएडा प्राधिकरण ने इस पर साफ रुख अपना लिया है। प्राधिकरण का कहना है कि अब जो भी नई जमीन दी जाएगी, वह केवल वर्तमान आवंटन दरों पर ही दी जाएगी। बताया जा रहा है कि सेक्टर-150 में मौजूदा आवंटन रेट करीब 47,200 रुपये प्रति वर्ग मीटर है। ऐसे में बिल्डरों को पुरानी दरों पर जमीन मिलने की उम्मीद लगभग खत्म मानी जा रही है।

उपविभाजन के बाद बची जमीन पर बनेगा नया प्लान

अधिकारियों के अनुसार, नोएडा के सेक्टर-150 स्थित एससी-2 भूखंड का बड़ा हिस्सा पहले ही आवंटित किया जा चुका है। बाद में इस जमीन को कई छोटे हिस्सों में बांटकर आगे बेचा गया। कुछ भूखंडों पर ग्रुप हाउसिंग परियोजनाओं के नक्शे पास हैं, लेकिन इनके बीच कई छोटे-छोटे हिस्से अब भी खाली पड़े हैं। इन टुकड़ों का आकार इतना बड़ा नहीं है कि उन्हें अलग स्वतंत्र भूखंड घोषित किया जा सके। ऐसे में प्राधिकरण अब इन्हें परियोजना से जुड़ी अतिरिक्त जमीन के रूप में देखने की तैयारी में है। यदि बिल्डर मौजूदा रेट पर सहमत होते हैं, तो नोएडा में इन जमीनों का आवंटन आगे बढ़ सकता है। कुछ जमीन ऐसी भी है, जहां अधिग्रहण की प्रक्रिया अब तक पूरी नहीं हो सकी है। कहीं किसानों और प्राधिकरण के बीच सहमति नहीं बन पा रही, तो कहीं मामला अदालत में लंबित है। ऐसे मामलों में अगर बिल्डर किसानों से समझौता कराकर जमीन प्राधिकरण को उपलब्ध कराते हैं, तो भी आवंटन तय मानकों और मौजूदा दरों के आधार पर ही किया जाएगा। Noida News


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