नोएडा प्राधिकरण ने जल क्षेत्र में फिर रचा कीर्तिमान, मिला बड़ा सम्मान
नोएडा ने जल संरक्षण और शोधित पानी के बेहतर उपयोग में एक बार फिर अपनी मिसाल कायम की है। शहरी जल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य के लिए नोएडा प्राधिकरण को ‘म्यूनिसिपल वाटर रीयूज इनिशिएटिव’ श्रेणी में ‘वॉटर वॉरियर्स’ सम्मान दिया गया है।

Noida News : नोएडा ने जल संरक्षण और शोधित पानी के बेहतर उपयोग में एक बार फिर अपनी मिसाल कायम की है। शहरी जल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य के लिए नोएडा प्राधिकरण को ‘म्यूनिसिपल वाटर रीयूज इनिशिएटिव’ श्रेणी में ‘वॉटर वॉरियर्स’ सम्मान दिया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी ने नोएडा प्राधिकरण को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। भारत सरकार और यूनेस्को के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में नोएडा की उपलब्धि ने साफ कर दिया कि शहर अब जल पुन: उपयोग और सतत विकास के मॉडल के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
सम्मान समारोह में प्राधिकरण की टीम ने लिया अवॉर्ड
नई दिल्ली के होटल ललित में आयोजित इस सम्मान समारोह में नोएडा प्राधिकरण की ओर से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल और जल एवं विद्युत यांत्रिकी विभाग के महाप्रबंधक आर.पी. सिंह ने अपनी टीम के साथ पुरस्कार ग्रहण किया। इस अवसर पर नोएडा को स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह पहला अवसर नहीं है जब नोएडा के जल प्रबंधन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली हो। इससे पहले भी नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग को अपने नवाचारों और प्रभावी कार्यशैली के लिए सम्मान मिल चुका है। खास बात यह है कि नोएडा ने केवल जल संरक्षण की बात नहीं की, बल्कि शोधित जल के व्यवस्थित और उपयोगी पुनर्प्रयोग का एक मजबूत मॉडल भी प्रस्तुत किया है। दरअसल, नोएडा के विभिन्न एसटीपी प्लांटों से इस समय करीब 260 एमएलडी शोधित जल उपलब्ध हो रहा है। इसमें से लगभग 90 एमएलडी पानी का इस्तेमाल हरित पट्टियों, पार्कों, गोल्फ कोर्स, वेटलैंड, निर्माण कार्यों, अग्निशमन, तालाबों और सड़कों पर छिड़काव जैसे कामों में किया जा रहा है। इस पहल ने नोएडा को जल पुनर्चक्रण के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।
नोएडा का मॉडल बना प्रेरक उदाहरण
नोएडा के सेक्टर-54 में एक पुराने अपशिष्ट स्थल को उपयोगी बनाते हुए लगभग 20 एमएलडी शोधित जल से सुंदर वेटलैंड विकसित किया गया है। यह वेटलैंड अब केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यहां अनेक प्रकार के जलीय जीव-जंतु भी प्राकृतिक रूप से निवास कर रहे हैं। यह प्रयास बताता है कि नोएडा किस तरह शहरी विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन साधने की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रहा है। शोधित जल के उपयोग को और अधिक बढ़ाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 125 एमएलडी जल उपयोग का लक्ष्य तय किया है। इस उपलब्धि से नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। जल संरक्षण और पुन: उपयोग के क्षेत्र में नोएडा की यह सफलता दूसरे शहरों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है। Noida News
Noida News : नोएडा ने जल संरक्षण और शोधित पानी के बेहतर उपयोग में एक बार फिर अपनी मिसाल कायम की है। शहरी जल प्रबंधन में उत्कृष्ट कार्य के लिए नोएडा प्राधिकरण को ‘म्यूनिसिपल वाटर रीयूज इनिशिएटिव’ श्रेणी में ‘वॉटर वॉरियर्स’ सम्मान दिया गया है। केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सी.आर. पाटिल और राज्यमंत्री राजभूषण चौधरी ने नोएडा प्राधिकरण को यह प्रतिष्ठित सम्मान प्रदान किया। भारत सरकार और यूनेस्को के संयुक्त सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में नोएडा की उपलब्धि ने साफ कर दिया कि शहर अब जल पुन: उपयोग और सतत विकास के मॉडल के रूप में अपनी अलग पहचान बना चुका है।
सम्मान समारोह में प्राधिकरण की टीम ने लिया अवॉर्ड
नई दिल्ली के होटल ललित में आयोजित इस सम्मान समारोह में नोएडा प्राधिकरण की ओर से अपर मुख्य कार्यपालक अधिकारी सतीश पाल और जल एवं विद्युत यांत्रिकी विभाग के महाप्रबंधक आर.पी. सिंह ने अपनी टीम के साथ पुरस्कार ग्रहण किया। इस अवसर पर नोएडा को स्मृति-चिह्न और प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया गया। यह पहला अवसर नहीं है जब नोएडा के जल प्रबंधन मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली हो। इससे पहले भी नोएडा प्राधिकरण के जल विभाग को अपने नवाचारों और प्रभावी कार्यशैली के लिए सम्मान मिल चुका है। खास बात यह है कि नोएडा ने केवल जल संरक्षण की बात नहीं की, बल्कि शोधित जल के व्यवस्थित और उपयोगी पुनर्प्रयोग का एक मजबूत मॉडल भी प्रस्तुत किया है। दरअसल, नोएडा के विभिन्न एसटीपी प्लांटों से इस समय करीब 260 एमएलडी शोधित जल उपलब्ध हो रहा है। इसमें से लगभग 90 एमएलडी पानी का इस्तेमाल हरित पट्टियों, पार्कों, गोल्फ कोर्स, वेटलैंड, निर्माण कार्यों, अग्निशमन, तालाबों और सड़कों पर छिड़काव जैसे कामों में किया जा रहा है। इस पहल ने नोएडा को जल पुनर्चक्रण के क्षेत्र में एक अलग पहचान दिलाई है।
नोएडा का मॉडल बना प्रेरक उदाहरण
नोएडा के सेक्टर-54 में एक पुराने अपशिष्ट स्थल को उपयोगी बनाते हुए लगभग 20 एमएलडी शोधित जल से सुंदर वेटलैंड विकसित किया गया है। यह वेटलैंड अब केवल पर्यावरणीय दृष्टि से महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि यहां अनेक प्रकार के जलीय जीव-जंतु भी प्राकृतिक रूप से निवास कर रहे हैं। यह प्रयास बताता है कि नोएडा किस तरह शहरी विकास के साथ पर्यावरणीय संतुलन साधने की दिशा में भी गंभीरता से काम कर रहा है। शोधित जल के उपयोग को और अधिक बढ़ाने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 तक 125 एमएलडी जल उपयोग का लक्ष्य तय किया है। इस उपलब्धि से नोएडा प्राधिकरण के अधिकारियों और कर्मचारियों में उत्साह का माहौल है। जल संरक्षण और पुन: उपयोग के क्षेत्र में नोएडा की यह सफलता दूसरे शहरों के लिए भी एक प्रेरक उदाहरण बनकर उभरी है। Noida News












