
आपको बता दें कि पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के निर्देश पर पुलिस उपायुक्त महिला एवं बाल सुरक्षा गौतमबुद्धनगर के नेतृत्व में 1 जून से 2023 से 30 जून 2023 तक बाल श्रम उन्मूलन व बालभिक्षावृत्ति की रोकथाम के लिए श्रम विभाग, जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, चाईल्ड लाईन नोएडा एवं एएचटीयू टीम द्वारा संयुक्त रूप से अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के तहत मंगलवार को श्रम विभाग, जिला प्रोबेशन अधिकारी कार्यालय, चाईल्ड लाईन नोएडा व एएचटीयू की टीम ने संयुक्त कार्यवाही करते हुए सेक्टर 76, सेक्टर-62, सेक्टर-63 के बाजार व चौक चौराहों पर भीख मांग रहे एवं बालश्रम कर रहे कुल 25 बच्चों को रेस्क्यू किया गया।
अगर व्यावसायिक उद्देश्य से किए जा रहे किसी कार्य के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त किया जाता है तो वह बाल श्रम कहलाता है। इसे भारत में गैर कानूनी करार दिया गया है। भारत के संविधान में मूल अधिकारों के अनुच्छेद 24 के तहत भारत में बाल श्रम पर पाबंदी लगाई गई है।
सन् 2016 में कानून लाकर बालश्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 में संशोधन किया गया और बालश्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 लागू किया गया। बाल श्रम पर इस नए कानून को तत्कालीन राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने मंजूरी दी। इसके तहत किसी भी काम के लिए 14 साल से कम उम्र के बच्चे को नियुक्त करना गैर कानूनी माना गया है।
यदि कोई नियोक्ता 14 साल से कम उम्र के बच्चों को किसी कार्य पर लगाता है तो ऐसा करने पर उसे दो साल तक की कैद की सजा या जुर्माना या सजा और अधिकतम 50 हजार रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। यह कानून 14 से 18 साल तक की उम्र के किशोरों को खान के साथ ही अन्य ज्वलनशील पदार्थ या विस्फोटकों जैसे जोखिम वाले कार्यों में रोजगार पर लगाने पर भी दिए जाने का प्रावधान किया गया है। हालांकि यह कानून फिल्मों, विज्ञापनों और टीवी उद्योग में बच्चों के काम करने पर लागू नहीं होता।
अगर 14 से 18 की उम्र वालों से काम लिया जाए, लेकिन इसके अगर काम की समय सीमा तय न हो और रजिस्टर मेंटेन न किया जाए, स्वास्थ्य और सुरक्षा संबंधी उल्लंघन किए जाएं तो एक माह तक की जेल और साथ ही 10 से लेकर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भुगतना पड़ सकता है। अगर आरोपी ने इस कानून के तहत पहली बार अपराध किया है तो उस पर केवल जुर्माना लगाया जा सकता है।
दूसरी बाद अपराध में संलिप्त पाए जाने पर नियोक्ता को एक साल से लेकर तीन साल तक की कैद का प्रावधान किया गया है। श्रम विभाग की टीम अक्सर दुकानों, प्रतिष्ठानों में छापे भी मारती हैं। अगर वहां बच्चे किसी भी तरह के काम में संलग्न पाए जाते हैं तो नियोक्ता के खिलाफ कानून, विधि सम्मत कार्रवाई की जाती है।
बाल श्रम से जुड़े कानून के दायरे कई स्थितियों को बाहर भी रखा गया है। मसलन स्कूल से बाद के समय में अगर कोई बच्चा अपने परिवार के व्यवसाय में परिजनों की मदद करता है तो उसे इस कानून के दायरे से बाहर रखा गया है।
जैसा कि हम आपको ऊपर बता चुके हैं कि14 साल से कम उम्र के बच्चों को काम पर रखना गैर कानूनी है। हालांकि कुछ मामले में अपवाद भी हैं। मसलन पारिवारिक व्यवसायों में काम करने वाले बच्चे स्कूल से आने के बाद या गर्मियों की छुट्टियों में यहां काम कर सकते हैं। लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि इससे बच्चों की पढ़ाई पर असर न पड़े। ऐसा न हो कि बच्चों को काम कराने की वजह से स्कूल ही न भेजा जाए या उन्हें पढ़ाई ही न करने दी जाए।
दूसरे, यह भी सुनिश्चित करना जरूरी है कि पारिवारिक व्यवसाय इस कानून के तहत परिभाषित किसी खतरनाक प्रक्रिया या पदार्थ से न जुड़ा हो। जैसे यह ऊर्जा, बिजली उत्पादन से जुड़े उद्योग, खान या विस्फोटक पदार्थ से जुड़े उद्योग न हों। इसी तरह फिल्मों में बाल कलाकार के रूप में वह काम कर सकते हैं या फिर खेल से जुड़ी गतिविधियों में भाग ले सकते हैं। यहां एक बात और साफ कर दें कि इस परिभाषा में ऐसे व्यापार जिनका संचालन कोई करीबी रिश्तेदार मसलन पिता की बहन और भाई या मां की बहन और भाई भी शामिल हैं।
बालश्रम (निषेध और विनियमन) संशोधन अधिनियम 2016 से पहले बालश्रम (निषेध और विनियमन) अधिनियम 1986 लागू था। इसके तहत 14 साल से कम उम्र के व्यक्ति को बच्चे के रूप में परिभाषित किया गया था। 2016 में संशोधन के जरिए जुर्माना राशि में इजाफा किया गया। फिल्म, सीरियल में काम करने वाले बाल कलाकारों को इससे छूट दी गई।
संविधान के अनुच्छेद 24 के तहत खतरनाक गतिविधियों में रोजगार के खिलाफ 14 से कम उम्र के बच्चों की सुरक्षा का प्रावधान किया गया है। वहीं, अनुच्छेद 23 में बाल तस्करी और मजबूर श्रम पर रोक लगाई गई है। अनुच्छेद 21 ए के तहत 6 से 14 साल की उम्र के बच्चों के लिए शिक्षा का अधिकार दिया गया है, जबकि अनुच्छेर 39 राज्य सरकारों को यह सुनिश्चित करने के निर्देश देता है कि बच्चों के साथ किसी भी तरह का कोई दुव्यर्वहार न हो। अनुच्छेद 15 के तहत सरकार को कानून और नीति बनाने की शक्ति प्रदान की गई है। इन कानूनों के जरिए राज्य बच्चों के अधिकारों की रक्षा करते हैं।
दुनिया भर में बाल अधिकार संरक्षण पर काम हो रहा है। कई निजी संस्थाएं इस दिशा में काम कर रही हैं। वह श्रम विभाग, पुलिस और प्रशासन के साथ मिलकर जगह जगह से बाल मजदूरों को मुक्त कराने का उपक्रम करती हैं। यहां तक कि बचपन आंदोलन चलाने भारत के कैलाश सत्यार्थी को पाकिस्तान की मलाला यूसुफजई के साथ संयुक्त रूप से नोबेल पुरस्कार भी मिल चुका है। इन तमाम बातों के बावजूद आज भी लाखों की तादाद में देश में बाल श्रमिक कार्य कर रहे हैं। उनकी सबसे ज्यादा संख्या असंगठित क्षेत्र और कृषि क्षेत्र में देखने को मिल रही है।
सरकार ने कानून बनाया है, लेकिन महज इससे काम चलने वाला नहीं। इसके लिए कानून को प्रभावी तरीके से लागू किया जाना बेहद आवश्यक है। दरअसल, बच्चों से काम लेने के पीछे नियोक्ताओं की मंशा कम पैसे में अधिक समय के लिए उनसे श्रम लेने की होती है। इसी को उनके शोषण की category में रखा गया है। नियोक्ता की इस सोच को खत्म किए जाना बेहद जरूरी है और इसके लिए बहुत जरूरी है कि नियोक्ताओं पर नकेल कसी जाए। बाल श्रम को बढ़ावा देने वाली हर स्थिति को देखते हुए कानून का इतना प्रभावी क्रियान्वयन किया जाए कि कोई बाल श्रम कराने से पहले दो बार सोचने के लिए मजबूर हो जाए। Noida News