नोएडा के पांच वर्षीय मासूम रूद्र प्रताप सिंह तोमर ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को चिट्ठी लिखकर साफ हवा की मांग की। प्रदूषण, कूड़ा जलाने, वाहनों के धुएं और हरियाली को लेकर रूद्र की भावुक अपील ने नोएडा प्राधिकरण की जवाबदेही पर बड़ा सवाल खड़ा किया है।

Noida News : उत्तर प्रदेश की शो-विंडो कहे जाने वाले नोएडा शहर में प्रदूषण और बिगड़ते पर्यावरण को लेकर नोएडा के एक पांच साल के मासूम बच्चे ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से साफ हवा की मांग की है। नोएडा के ग्राम रोहिल्लापुर, सेक्टर-132 निवासी मास्टर रूद्र प्रताप सिंह तोमर की यह अपील जितनी मासूम है, उतनी ही गंभीर भी। नन्हें रूद्र ने अपने पत्र के माध्यम से नोएडा में बढ़ते प्रदूषण पर चिंता जताते हुए कहा है कि वह कोई खिलौना या सुविधा नहीं मांग रहा, उसे सिर्फ सांस लेने के लिए साफ हवा चाहिए। नोएडा के इस मासूम बच्चे रूद्र की इस अपील ने नोएडा के पर्यावरण और प्रदूषण की स्थिति को लेकर एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। जिस उम्र में बच्चे खिलौने और खेलने की चीजों की मांग करते हैं, उस उम्र में रूद्र अपने भविष्य के लिए स्वच्छ हवा और स्वस्थ वातावरण की मांग कर रहा है। Noida News
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को लिखे पत्र में मासूम बच्चे रूद्र ने कहा है कि ‘मैं पाँच साल का हूँ। मैं कोई खिलौना या सुविधा नहीं मांग रहा। मैं सिर्फ चाहता हूँ कि जब मैं बड़ा होऊँ तो मुझे सांस लेने के लिए साफ हवा मिले।’ रूद्र ने सर्दी का मौसम शुरू होने से पहले ही नोएडा में प्रदूषण के खिलाफ प्रभावी कदम उठाने की मांग की है। उसका कहना है कि जहरीली हवा का सबसे ज्यादा असर बच्चों पर पड़ता है। वह नहीं चाहता कि उसे और उसके जैसे नोएडा शहर में रहने वाले हजारों बच्चों को प्रदूषण के कारण सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़े। Noida News
पांच वर्षीय रूद्र ने प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए हैं। उसने नोएडा प्रशासन से मांग की है कि सिंगल यूज प्लास्टिक और पॉलिथीन पर सख्ती से रोक लगाई जाए। इसके साथ ही प्रदूषण फैलाने वाली फैक्ट्रियों और कंपनियों की नियमित जांच कर नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। प्रदूषण नियंत्रण से जुड़े कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने, अत्यधिक धुआं छोडऩे वाले वाहनों की जांच और पुराने व प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की मांग नन्हें रूद्र ने सीएम योगी को लिखे पत्र में की है। रूद्र ने नोएडा में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण के लिए नए स्थान चिन्हित करने और लगाए गए पेड़ों की देखभाल सुनिश्चित करने की मांग भी पत्र में की है। ग्रामीण क्षेत्रों में जगह-जगह लगे कूड़े के ढेर और गंदगी को हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने तथा खुले में कूड़ा जलाने पर रोक लगाने की मांग भी रूद्र ने की है। उसने गांवों में बेहतर कूड़ा प्रबंधन व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई है। Noida News
रूद्र के पिता डॉ. रंजन तोमर ने बच्चे का पत्र लेकर नोएडा के विधायक पंकज सिंह से मुलाकात की। उन्होंने विधायक को रूद्र की पर्यावरण संबंधी चिंताओं और उसकी मांगों से अवगत कराया। बताया गया है कि विधायक पंकज सिंह ने पांच वर्षीय बच्चे की चिंता को गंभीरता से लेते हुए त्वरित कार्रवाई का आश्वासन दिया। उन्होंने कहा कि वह स्वयं नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी CEO कृष्णा करुणेश से बात करेंगे और रूद्र द्वारा उठाए गए मुद्दों पर आवश्यक कार्रवाई के लिए उन्हें निर्देशित करेंगे। विधायक ने रूद्र का पत्र CEO तक पहुंचाने का भी आश्वासन दिया। Noida News
रूद्र के पिता डॉ. रंजन तोमर ने कहा कि यह केवल पांच वर्षीय रूद्र का सवाल नहीं है, बल्कि नोएडा में रहने वाले हजारों बच्चों के भविष्य का सवाल है। उनका कहना है कि वर्तमान पीढ़ी की जिम्मेदारी है कि आने वाली पीढ़ी को प्रदूषण नहीं, बल्कि साफ हवा, स्वच्छ पानी और हरियाली से भरा वातावरण मिले। उन्होंने कहा कि आज रूद्र छोटा है, लेकिन आने वाले समय में उसकी पीढ़ी को ही देश और समाज की जिम्मेदारी संभालनी है। इसलिए पर्यावरण संरक्षण के लिए कदम आज ही उठाए जाने जरूरी हैं। Noida News
रूद्र का यह सवाल बेहद छोटा है, लेकिन इसका दायरा बहुत बड़ा है— ‘जब मैं बड़ा होऊंगा, क्या मुझे साफ हवा मिलेगी?’ यह सवाल अब नोएडा प्राधिकरण, प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के सामने है। खास बात यह है कि प्रदूषण को लेकर चिंता अब केवल पर्यावरण विशेषज्ञों, सामाजिक संगठनों या बड़ों तक सीमित नहीं रह गई है। नोएडा का एक पांच वर्षीय बच्चा भी अपने भविष्य की हवा को लेकर चिंतित है। रूद्र की आवाज को महज एक बच्चे की भावुक अपील मानकर नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यह नोएडा में रहने वाले उन हजारों बच्चों की चिंता है, जिन्हें आने वाले वर्षों में इसी शहर की हवा में सांस लेनी है। अब जरूरत इस बात की है कि रूद्र के सवाल का जवाब केवल आश्वासन से नहीं, बल्कि नोएडा की सडक़ों, गांवों, औद्योगिक क्षेत्रों और हरित क्षेत्रों में दिखाई देने वाली ठोस कार्रवाई से दिया जाए। Noida News
पांच साल के बच्चे की गुहार के बाद भी अगर नोएडा प्राधिकरण नहीं जागा तो किसके लिए है नोएडा का विकास? नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी कृष्णा करुणेश के सामने अब महज एक शिकायत नहीं, बल्कि पांच साल के मासूम रूद्र का भविष्य खड़ा है। जिस उम्र में एक बच्चा खिलौनों के लिए जिद करता है, उसी उम्र में रूद्र को अपने शहर की हवा की चिंता करनी पड़ रही है। सवाल बेहद सीधा है आखिर नोएडा प्राधिकरण की प्राथमिकता क्या है? क्या शहर में चौड़ी सडक़ें, ऊंची इमारतें और बड़े-बड़े विकास कार्य ही विकास की पहचान हैं, या यहां रहने वाले बच्चों को सांस लेने के लिए साफ हवा उपलब्ध कराना भी प्राधिकरण की जिम्मेदारी है? नोएडा प्राधिकरण के CEO कृष्णा करुणेश के सामने अब यह मामला किसी फाइल को आगे बढ़ाने या औपचारिक निर्देश जारी करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। अगर पांच साल का बच्चा प्रदूषण के खिलाफ प्रशासन को जगाने के लिए पत्र लिखने को मजबूर है, तो यह पूरे सिस्टम के लिए गंभीर आत्ममंथन का विषय है। नोएडा की सडक़ों पर उड़ती धूल, खुले में जलता कूड़ा, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोत और हरियाली को लेकर उठते सवालों पर यदि समय रहते कठोर कार्रवाई नहीं हुई, तो आने वाली पीढ़ी के साथ यह गंभीर अन्याय होगा। अब नोएडा के लोगों को आश्वासन नहीं, जमीन पर कार्रवाई चाहिए। रूद्र का पत्र ष्टश्वह्र कृष्णा करुणेश के लिए एक ऐसा आईना है, जिसमें नोएडा के विकास के साथ-साथ उसकी पर्यावरणीय चुनौतियां भी साफ दिखाई दे रही हैं। देखना होगा कि प्राधिकरण इस मासूम की आवाज को महज एक पत्र मानकर रख देता है या इसे नोएडा की हवा सुधारने के लिए निर्णायक कार्रवाई का दस्तावेज बनाता है। Noida News
नोएडा प्राधिकरण के CEO कृष्णा करुणेश के सामने अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर नोएडा के बच्चों को साफ हवा कब मिलेगी? जिस उम्र में रूद्र को खेलना और पढऩा चाहिए, उस उम्र में उसे अपने शहर के प्रदूषण की चिंता करनी पड़ रही है। यह स्थिति केवल भावुक करने वाली नहीं, बल्कि नोएडा के पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए चेतावनी है। शहर में विकास के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च किए जा रहे हैं, लेकिन यदि उसी शहर का पांच साल का बच्चा सांस लेने के लिए साफ हवा की मांग करने लगे तो विकास की प्राथमिकताओं पर सवाल उठना स्वाभाविक है। नोएडा प्राधिकरण के CEO कृष्णा करुणेश को अब यह तय करना होगा कि रूद्र की चि_ी भी सामान्य शिकायतों की तरह किसी फाइल में दबकर रह जाएगी या इसका असर जमीन पर दिखाई देगा। धूल, खुले में कूड़ा जलाने, प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों, वाहनों से निकलने वाले धुएं और हरियाली से जुड़े मामलों में यदि सख्त और निरंतर कार्रवाई नहीं होती है तो केवल बैठकों और निर्देशों से प्रदूषण कम नहीं होगा। रूद्र ने कोई विशेष सुविधा, सडक़ या मकान नहीं मांगा है। उसने केवल सांस लेने लायक हवा मांगी है। इसलिए अब नोएडा प्राधिकरण की जिम्मेदारी और जवाबदेही दोनों बढ़ गई हैं। पांच साल के इस मासूम की आवाज को नजरअंदाज करना केवल एक बच्चे की मांग को नजरअंदाज करना नहीं होगा, बल्कि उन हजारों बच्चों के भविष्य के सवाल को टालना होगा जो नोएडा को अपना घर मानकर यहां रह रहे हैं। अब जनता को आश्वासन नहीं, कार्रवाई चाहिए और कार्रवाई ऐसी, जिसका असर नोएडा की हवा में दिखाई दे। Noida News
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