नोएडा स्पोर्ट्स सिटी में बिना ओसी फ्लैट सौंपने पर प्राधिकरण सख्त, नोटिस जारी
नोएडा के सेक्टर-150 स्थित Sports City SC-2 प्रोजेक्ट से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां करीब 8 हजार फ्लैट खरीदारों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी होने से पहले ही पजेशन दे दिया गया।

Noida News : नोएडा के सेक्टर-150 स्थित Sports City SC-2 प्रोजेक्ट से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां करीब 8 हजार फ्लैट खरीदारों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी होने से पहले ही पजेशन दे दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन फ्लैटों में बड़ी संख्या में लोग पिछले कई वर्षों से रह भी रहे हैं, जबकि संबंधित परियोजनाओं को आधिकारिक रूप से अभी तक रहने की अनुमति नहीं मिली थी। अब इस पूरे मामले पर नोएडा प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर बिना OC के फ्लैटों का पजेशन किस आधार पर दिया गया। नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डरों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है और साफ किया है कि जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नोएडा में बिना OC पजेशन से बढ़े सवाल
नोएडा में किसी भी आवासीय परियोजना में फ्लैट खरीदारों को पजेशन देने से पहले ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। यह प्रमाणपत्र इस बात की पुष्टि करता है कि प्रोजेक्ट निर्माण मानकों, सुरक्षा नियमों और बुनियादी सुविधाओं की आवश्यक शर्तों को पूरा करता है। यानी जब तक OC जारी नहीं होता, तब तक किसी परियोजना में लोगों को रहने की वैधानिक अनुमति नहीं मानी जाती। ऐसे में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी में हजारों फ्लैटों का बिना OC पजेशन दिया जाना नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कई खरीदारों को यह तक जानकारी नहीं थी कि जिस प्रोजेक्ट में उन्हें घर दिया गया, वहां OC अभी लंबित है।
नोएडा प्राधिकरण ने आगे की पजेशन प्रक्रिया पर लगाई रोक
मामला सामने आने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने केवल नोटिस जारी कर जवाब नहीं मांगा, बल्कि जिन तैयार फ्लैटों का पजेशन आगे दिया जाना था, उस प्रक्रिया पर भी फिलहाल रोक लगा दी है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि बिल्डरों के जवाब, परियोजना की स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। इस कदम से साफ है कि नोएडा प्राधिकरण अब इस प्रकरण को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। प्राधिकरण यह जानना चाहता है कि इतने बड़े स्तर पर पजेशन की प्रक्रिया कैसे पूरी कर दी गई, जबकि जरूरी वैधानिक मंजूरी उपलब्ध नहीं थी।
बिजली-पानी और सुरक्षा इंतजामों की होगी पड़ताल
नोएडा प्राधिकरण के ACEO सतीश पाल ने बताया कि संबंधित बिल्डरों को करीब 6 से 7 दिन पहले नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस में साफ पूछा गया है कि बिना OC के फ्लैटों का कब्जा किन परिस्थितियों में सौंपा गया। इसके साथ ही प्राधिकरण ने परियोजना में फायर सेफ्टी, बिजली-पानी, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का भी पूरा ब्योरा मांगा है। दरअसल, नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में किसी भी आवासीय प्रोजेक्ट में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं सबसे अहम मानी जाती हैं। ऐसे में यदि बिना OC लोगों को बसाया गया है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि निवासियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी बन सकता है।
नोएडा के घर खरीदारों में बढ़ी चिंता
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी का यह मामला उन हजारों घर खरीदारों के लिए चिंता का कारण बन गया है, जिन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ यहां अपना आशियाना खरीदा। अब उनके सामने यह सवाल खड़ा है कि अगर परियोजना को अब तक OC नहीं मिला था, तो उन्हें पजेशन कैसे दिया गया और इतने समय तक यह स्थिति अनदेखी कैसे रही। नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में यह मामला एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और नियामक निगरानी को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी नजर बिल्डरों के जवाब और नोएडा प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर टिकी है। Noida News
Noida News : नोएडा के सेक्टर-150 स्थित Sports City SC-2 प्रोजेक्ट से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। यहां करीब 8 हजार फ्लैट खरीदारों को ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट (OC) जारी होने से पहले ही पजेशन दे दिया गया। चौंकाने वाली बात यह है कि इन फ्लैटों में बड़ी संख्या में लोग पिछले कई वर्षों से रह भी रहे हैं, जबकि संबंधित परियोजनाओं को आधिकारिक रूप से अभी तक रहने की अनुमति नहीं मिली थी। अब इस पूरे मामले पर नोएडा प्राधिकरण ने सख्त रुख अपनाया है। प्राधिकरण ने संबंधित बिल्डरों को नोटिस जारी कर पूछा है कि आखिर बिना OC के फ्लैटों का पजेशन किस आधार पर दिया गया। नोएडा प्राधिकरण ने बिल्डरों से विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा है और साफ किया है कि जवाब मिलने के बाद ही आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
नोएडा में बिना OC पजेशन से बढ़े सवाल
नोएडा में किसी भी आवासीय परियोजना में फ्लैट खरीदारों को पजेशन देने से पहले ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट लेना अनिवार्य होता है। यह प्रमाणपत्र इस बात की पुष्टि करता है कि प्रोजेक्ट निर्माण मानकों, सुरक्षा नियमों और बुनियादी सुविधाओं की आवश्यक शर्तों को पूरा करता है। यानी जब तक OC जारी नहीं होता, तब तक किसी परियोजना में लोगों को रहने की वैधानिक अनुमति नहीं मानी जाती। ऐसे में नोएडा स्पोर्ट्स सिटी में हजारों फ्लैटों का बिना OC पजेशन दिया जाना नियमों के उल्लंघन के रूप में देखा जा रहा है। बताया जा रहा है कि कई खरीदारों को यह तक जानकारी नहीं थी कि जिस प्रोजेक्ट में उन्हें घर दिया गया, वहां OC अभी लंबित है।
नोएडा प्राधिकरण ने आगे की पजेशन प्रक्रिया पर लगाई रोक
मामला सामने आने के बाद नोएडा प्राधिकरण ने केवल नोटिस जारी कर जवाब नहीं मांगा, बल्कि जिन तैयार फ्लैटों का पजेशन आगे दिया जाना था, उस प्रक्रिया पर भी फिलहाल रोक लगा दी है। प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि बिल्डरों के जवाब, परियोजना की स्थिति और उपलब्ध दस्तावेजों की समीक्षा के बाद ही आगे का फैसला लिया जाएगा। इस कदम से साफ है कि नोएडा प्राधिकरण अब इस प्रकरण को हल्के में लेने के मूड में नहीं है। प्राधिकरण यह जानना चाहता है कि इतने बड़े स्तर पर पजेशन की प्रक्रिया कैसे पूरी कर दी गई, जबकि जरूरी वैधानिक मंजूरी उपलब्ध नहीं थी।
बिजली-पानी और सुरक्षा इंतजामों की होगी पड़ताल
नोएडा प्राधिकरण के ACEO सतीश पाल ने बताया कि संबंधित बिल्डरों को करीब 6 से 7 दिन पहले नोटिस जारी किए गए थे। नोटिस में साफ पूछा गया है कि बिना OC के फ्लैटों का कब्जा किन परिस्थितियों में सौंपा गया। इसके साथ ही प्राधिकरण ने परियोजना में फायर सेफ्टी, बिजली-पानी, सुरक्षा व्यवस्था और अन्य बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का भी पूरा ब्योरा मांगा है। दरअसल, नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहरी क्षेत्र में किसी भी आवासीय प्रोजेक्ट में सुरक्षा और बुनियादी सुविधाएं सबसे अहम मानी जाती हैं। ऐसे में यदि बिना OC लोगों को बसाया गया है, तो यह केवल प्रशासनिक चूक नहीं बल्कि निवासियों की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय भी बन सकता है।
नोएडा के घर खरीदारों में बढ़ी चिंता
नोएडा स्पोर्ट्स सिटी का यह मामला उन हजारों घर खरीदारों के लिए चिंता का कारण बन गया है, जिन्होंने बड़ी उम्मीदों के साथ यहां अपना आशियाना खरीदा। अब उनके सामने यह सवाल खड़ा है कि अगर परियोजना को अब तक OC नहीं मिला था, तो उन्हें पजेशन कैसे दिया गया और इतने समय तक यह स्थिति अनदेखी कैसे रही। नोएडा के रियल एस्टेट सेक्टर में यह मामला एक बड़े संकेत के रूप में देखा जा रहा है। इससे यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या प्रोजेक्ट मॉनिटरिंग और नियामक निगरानी को और मजबूत किए जाने की जरूरत है। प्राधिकरण के अधिकारियों ने संकेत दिया है कि यदि जांच के दौरान नियमों का उल्लंघन सामने आता है, तो संबंधित बिल्डरों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। अब सबकी नजर बिल्डरों के जवाब और नोएडा प्राधिकरण की अगली कार्रवाई पर टिकी है। Noida News












